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चूत अब गीली होने लगी थी, मुझे मेरी बेबसी पर तरस आने लगा कि आखिर मेरी चूत इतनी जल्दी हथियार क्या डाल देती है. अच्छा चलो… तुम रीता पर लाइन मरो और मैं कामिनी पर… आप क्या कहती हैं… कामिनी जी… ” राहुल ने अंधेरे में तीर छोड़ा. उसकी आँखों से आँसू निकल आये, मैंने उसके आँसू पी लिए और अपने होंठ उसके होंठों से मिला दिए.

हम तीनों अब बिस्तर पर आराम से अधलेटे पड़े थे, गौरी कह रही थी- अंकल, प्लीज, जब आप फ़्री हों तो आ जाया कीजिये… हम दोनों आपका इन्तज़ार करेंगी. मैंने सभी के लण्ड देखे, सारे तने हुए थे।शर्मा अंकल का नंबर पहला था, मैं उठी और शर्मा अंकल को नीचे लिटा कर उनके लण्ड पर अपनी चूत टिका दी और धीरे धीरे उस पर बैठने लगी. वो भी हंसी मजाक में कभी कभी मेरे चूतड़ों पर हाथ मार देते थे, कभी मेरी पीठ पर हल्के से मुक्का मार देते थे.

मम्मी ने अंकल से कहा- डार्लिंग, जल्दी से इसे मेरे हवाले कर दो!और अंकल मम्मी की टांगों को फैला कर उनके ऊपर चढ़ गए. मैंने तुरन्त भांप लिया कि दीदी की शंकित नजरें हमारा एक्स-रे कर रही थी… पर मुझे उससे क्या… चुद तो मैं चुकी थी… मैं भी तो आधी घर वाली हूँ ना… भले ही वो जलती रहे. जीजू जब भी ससुराल आते तो उनकी जीजी के साथ अलग कमरे में सोने की हसरत पूरी की जाती लेकिन इस बार जब वो आये तो वो हौले से मेरे से बोले- आज रात को कमरे में आ जाना, बात करेंगे.

जब बहादुर अन्दर आया तो ताज़ी ताज़ी नहाई रीटा ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने बालों को संवार रही थी. वो बोली- और करो प्लीज! ऐसे ही करते रहो, और करो!फिर एक ही बार में मैंने उसके छेद में पूरी उंगली डाल दी और उसके होंठों पर होंठ रख लिए ताकि नीचे आवाज ना जाये.

अब उसके बाद मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी कमर पर रख दिया और उसकी कमर को अपनी तरफ और कस दिया और उसके होंठों को और चूसने लगा.

‘हायऽऽऽ बहादुर! कितना सताओगे मुझे? कुछ करो नाऽऽऽ!’ नशीली अधखुली आँखों से देखती और अंगड़ाई लेती रीटा की छोटी छोटी मुट्ठियाँ अब भी हवा में ही थी.

वो : उम्म्ममम शाआ शाआअंककशशांक : मेरा हाथ तुम्हारे दिल के पास हैं मैं तुम्हारी गरदन और कान को चाट रहा हूँ ! मेरा दूसरा हाथ तुम्हारी नाभि के पास है…. उसने चित्रा को बाहों में लेकर उसे बिस्तर पर लिटा दिया तो चित्रा बोली- अभी मैं थक गई हूँ!मगर योगी ने उसकी एक नहीं सुनी और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो वो दर्द के मारे चिल्ला उठी. मैंने दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया!अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामने था जिसके लिए मैंने हजारों मन्नत की थी.

बाद में जब सब अपने पलंग पर चले गये तो मैंने उससे कहा- ये क्या छोटे छोटे सेब खिला रही हो!तो वो बोली- अगर बड़े सेब खाने हैं तो घर आना पड़ेगा! फिर तुम्हें असली मुलायम और बड़े सेब खिलाऊँगी. मैं जंगली बिल्ली की तरह अब उसे नोचने लगी थी… उसने मेरी चूत को छोड़ा और खड़े होकर मेरी चूत में लण्ड फ़ंसाने लगा… लंड घुस तो गया था पर. पीड़ा के डर से आँखें भींच और थूक निगलती रीटा की टांगों ने घड़ी के दस बज कर दस बजा दिये.

करीब 5 मिनट चूसने के बाद मैंने आंटी को कहा- आंटी, मेरा निकलने वाला है!तो आंटी ने कहा- मुंह में ही झर जाओ!मैंने अपना सारा का सारा पानी आंटी के मुँह में निकाल दिया.

मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ!और यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया. फिर हम 69 की अवस्था में हो गए और मैं उसकी चूत और वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और कमरे में सेक्स का माहौल हो गया. बातचीत का विषय चलते चलते यहाँ तक आ पहुँचा कि अमित ( अमित अंकल कहना मैं छोड़ चुकी थी ) बोले- जिस दिन तुम्हारी चूत के गुलाबी होठों को खोलकर अपना लंड उस पर रखूँगा, तुम जन्नत में पहुँच जाओगी.

आशा करता हूँ सभी चूतों और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी. तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी. और लंड ने झूठी कल्पना पर ही अपना लावा उगल दिया। मैं तौलिया लपेट कर अपने कमरे में आया तो देखा जाने कब से यहाँ कोमल खड़ी थी। एक बार तो मैं बुरी तरह से डर गया कि कहीं इसने कुछ देखा तो नहीं? क्योंकि मैंने दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया था, पर दूसरे ही पल लगा- अगर देखा होगा तो ठीक ही है।अरे कोमल इस वक्त यहाँ ?”प्रेम, गर्मी इतनी ज्यादा है कि मुझे बिलकुल भी नींद नहीं आ रही है, प्लीज़ कुछ करो न….

इस बीच मैं उसके बहुत चक्कर लगा लेती हूँ, पर कभी ऐसा कोई मौका ही नहीं आया कि विपिन पर डोरे डाल सकूँ.

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और तो और वो समझेंगे भी नहीं कि यह सिर्फ दोस्ती है… और इससे ज्यादा कुछ नहीं…मैं इस बात से परेशान नहीं थी की घरवालों को पता चला तो क्या होगा. तो मम्मी ही ऐसा करने लगी थी फिर इसमें अंकल का क्या दोष?मैं खिड़की के थोड़ा और नजदीक आ गया. ”सच…तो पहले क्यों नहीं बताया…”शरम और धरम के मारे… आज तो बस सब कुछ अपने आप ही हो गया और मैं आपसे चुद बैठी.

रीटा अपने मुँह पर हाथ रखे हक्की-बक्की सी बहादुर के दस इंच लम्बे और चार इंच मोटे लण्ड को देखती रह गई. मेरा जोश पूरे यौवन में आ गया था ……………फिर से वो झड़ गई पर मुझमें अभी भी जोश बचा था……… आप लोग सोच रहे होंगे कि अब तक जोश क्यों बचा कर रखा था ?अब मैंने यह जोश उसकी गाण्ड मारने में लगाया ……. अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सलाम !यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम अवनीश यादव है, मैं कम्पयूटर साइंस तृतीय वर्ष का छात्र हूँ। बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी बारहवीं की परीक्षा पास करके बी.

उसने मुझसे कहा- चिंता मत कीजिये मैडम, मैं इसी कोच में हूँ, कोई भी परेशानी हो तो मुझे बता दीजियेगा, मैं हाज़िर हो जाऊँगा! आपके साथ वाली बर्थ खाली है अगर कोई पेसेंजर आया भी तो कोई महिला ही आएगी इसलिए आप निश्चिंत हो कर सो सकती हैं.

हाय मैं फरजान 39 बड़ोदा से!यह मेरे सेक्स एक्सपेरिएंस की असली कहानी है जो मैंने अपनी पड़ोसन भाभी के साथ किया था. मैंने ही उसको अपने करीब बुलाते हुए उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके लंड पर हाथ फेरना चालू कर दिया. तो वो बोली- ठीक है!और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया.

‘प्यारी सी गाण्ड है!इसे ही चोद दूं क्या?’ मैंने उसकी प्यारी सी गाण्ड देख ललचाई नजरों से देखा. फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना. सारी रात उसके बारे में सोच कर गुजार दी, मन में तरह तरह के ख्याल आए कि काश वो मेरी होती.

अब मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसके ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा के खुलते ही उसने अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढकना चाहा लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए।मैं उसके नायाब खजाने को देखना चाह रहा था. फिर सामान्य हो गई… फिर मैंने स्पीड से उसे चोदना शुरू कर दिया वो भी मेरा साथ दे रही थी….

मैंने कहा- मैं तो आपका साथ चाहता हूँ बस… पिज्जा तो एक बहाना है आपको यहाँ रोकने का! मैंने कोई पिज्जा आर्डर नहीं किया था… मैंने सच सच बोल दिया. मैं जैसे झरने को आया, उसकी चूत में दना-दन 5-6 ज़ोर के धक्के दिए और उसके ऊपर ही लुढ़क गया, जिससे वो भी एक और बार झड़ गई. बात यह है कि…’‘अरे बोल ना! शरमा क्यों रहा है?’‘चाची… बात यह है कि जब से मैंने तुम्हारे होंठों का रस चखा है मेरी रातों की नींद उड़ गई है.

जैसे ही हम अलग आये तो सोनम ने मुझे एक लाल गुलाब पकड़ाया और मुझे ‘आई लव यू ‘ बोलकर मेरे गले लग गई.

कॉम पर यह मेरी पहली कहानी है। यह कहानी सस्पेंस, थ्रिलर, एक्शन और गर्म कहानी है।तो शुरू करते हैं…. सब मेरे चेहरे और चूचों पर गिर गया …झड़ने के बाद भी उसकी भूख नहीं मिटी थी, उसने मुझे फ़िर से मेज पर लेटाया और मेरी चूत अपने मुँह में ले ली। मेरी मुनिया वैसे ही पानी पानी थी, अब तो मैं पागल हुई जा रही थी। उसे अच्छी तरह आता था कि एक औरत की भूख कैसे मिटाते हैं।मैं चीखती जा रही थी, वो अनसुना करके मुझे चाटता रहा काटता रहा. 2-3 दिन के बाद उसका एक संदेश आया- क्या हम एक दूसरे को जानते हैं?मैंने कहा- नहीं जानते पर अगर आप चाहो तो जान पहचान बढ़ा सकते हैं।उसने कहा- मैं शादीशुदा हूँ !मैंने जवाब में कहा- जान-पहचान बनाने के लिये शादीशुदा ना होना कोई नियम तो नहीं है?तो उसने जवाब में स्माइली बना कर भेज दी.

पिछला भाग:जीजू के साथ मस्त साली-1जीजू मेरी गांड मारने लगे, मैं बोली- जीजू, रहम करो! आप मेरी गांड को बख्श दो, मेरी फ़ुद्दी चोद लो!मुझ बावली को क्या पता कि मेरा जीजा तो चाहता ही यह था. प्रेषक : राज कार्तिकअँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई.

मैंने उसे सोफे के किनारे पर पैर लटका कर बिठाया और मैं नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया. और ऐसे ही अपना लंड रानी की चूत में डाले-डाले सो गया…सुबह हुई तो पहले मेरी नींद खुली. बीच बीच में मैं उसके होंठ अपने चूचों और अपने गालों पर महसूस करती…बीच बीच में वो मुझे प्रेम भरे चुम्बन देता… धीरे धीरे उसके धक्के तेज़ होने लगे … चूत में मुझे खिंचाव महसूस होने लगा… खुद ब खुद मैं उसके धक्कों से ताल से ताल मिला कर… उसका ज्यादा से ज्यादा लण्ड अपने भीतर लेने की कोशिश करने लगी… मेरी कोमल काया, उसके पसीने से भरे बलिष्ठ शरीर के नीचे दबी हुई कसमसा रही थी.

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प्रेषक : राज कार्तिकअँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई.

और मैं अक्सर छोटी मेम का छुप छुप कर दीदार किया करता था…छोटी मेम जूस पी लो…ओह्ह हो! राजू सोने दे ना…छोटी मेम हमेशा बड़ी बेखबर होकर सोती थी…उस दिन भी… उनकी नायटी थोड़ी ऊपर थी और उनकी लातों के बीच गांड के दरार बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी, शायद अन्दर पैंटी नहीं पहनी है… उनकी गोरी गोरी. लगता था कि उसके शरमाते ही मैं उसके बोबे दबा डालूँ और वो शरमाते हुए हाय राम कह उठे. आलोक का हाथ धीरे धीरे अब मेरी पूरे हाथ और कलाई पर रेंग रहा था।‘हाँ! मैं हफ्ते में दो बार ब्यूटी पार्लर जाती हूँ…’मुझे अब आलोक का सहलाना और अच्छा लग रहा था.

अब सुनीता का रंग बदला-बदला सा लग रहा था। मैं चुप रहा और उन्हें देखता रहा!चाय पीने के बाद सुनीता ने ब्लू फिल्म लगा दी और आकर बिस्तर पर बैठ गई, करीब 15-20 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के बदन को रह-रह कर नोचते रहे।मैंने हाथों से उनकी चूचियाँ जोर से दबाई तो उनकी आवाज निकली- आआह्ह्ह धीईरे!यह सुन कर मैं समझ गया कि सुनीता चुदवाना तो बहुत चाहती है… लेकिन बड़े आराम से! किसी भी प्रकार की कोई जल्दबाजी नहीं. कमसिन है… यह मेरा रेशम जैसा बदन जो दिखने में रेशम जैसा चमकदार लेकिन छूने में मखमल जैसा नर्म और मुलायम…कल ही मेरी डेट्स खत्म हुई हैं, मैं अपने अंदर एक नई ताज़गी और सेक्स के लिए एक नई उमंग महसूस कर रही हूँ. मध्य प्रदेश की देसी सेक्सी वीडियोतेरा बाप फिर तेरी माँ नै उठा उठा कर चोदे सबेरे तैं …मैं : चलो मौसी यहाँ से …हम दोनों वहाँ से वापिस चलने लगे …मध्य रात थी …मैं : मौसी … मौसा जी भी तो हट्टे कट्टे है वो भी तो …मौसी : बस देक्खण मां ही …कुछ ना होत्ता उसतै ! फिस्सड्डी साला ! … ब्याह की पैल्ली रात नै मैं बूझ गी ती … मन्नै मज़ा देणा इसके बसकी बात नी …मैं : क्या ? सच में ?मौसी : हाँ … है के उसकै धोत्ती मै? जरा सा डण्डी सा.

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मुझे समझते देर न लगी और मैंने खिड़की से झाँका तो मैंने जो सोचा था उससे ज्यादा देखने को मिला. उसने ना सिर्फ अब्बास के हाथ को पकड़ा बल्कि उसको हाथ के बल घुमा भी दिया। अब्बास ने छूटने की कोशिश की लेकिन वो अपना हाथ नहीं छुड़ा पा रहा था, तभी उसने अपने दूसरे हाथ से इंस्पेक्टर मोना की चूत को जोर से दबा दिया। मोना के मुँह से हल्की चीख निकल गई।अब्बास- क्यों साली? तू तो कुंवारी लगती है… आज तो मैं पूरी ऐश लूँगा… तेरा पति जो नहीं कर सका आज मैं करूँगा ! वो भी तेरी जेल…. तो दिमाग इस ओर गया ही नहीं कि वह अपनी चूत का स्वाद बदलने के चक्कर में भी हो सकती है.

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थोड़ी देर में उसने मेरा पैर पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने सीने पर दबा दबा कर रगड़ने लगी. लेकिन अचानक दीपू ने मेरे मुंह में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और मेरा सर पकड़ कर अपना पूरा लंड मेरे मुंह में अन्दर बाहर करते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा ‘आ…ह…. तब मेरा ध्यान सोनम के वक्ष की तरफ गया जो लाल-लाल सेब की तरह लग रहे थे क्योंकि सोनम ने लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और अब मैं अपनी कहानी भी भेज रहा हूँ. आज भी शाम को मम्मी के होस्पिटल जाते ही जीजू झील के किनारे घूमने के लिये निकल पड़े थे, मुझे भी उन्होंने साथ ले लिया था. नर्स की सेक्सी पिक्चरउनकी बातें और अनुभव सुनकर मेरे अन्दर भी किसी से प्यार करने की इच्छा जागृत हो गई, सीधे शब्दों में कहूँ कि मैं चुदवाने के लिए बेताब होने लगी.

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मैंने उठना चाहा लेकिन उसने मुझे अपने ऊपर खीच लिया और मेरे होंठों को अपने होठों से दबा कर चूसने लगी। थोड़ी देर तक हम दोनों इस प्यार भरे चुम्बन में लगे रहे लेकिन तभी…. मैंने कहा- आंटी, आप को गाण्ड भी बहुत प्यारी है और बड़ी भी! मुझे चोदनी है!आंटी ने कहा- पहले मेरी चूत का पानी निकाल दे, अभी तो सारी रात बाकी है, गाण्ड बाद में मार लेना!मोना जोर जोर से मेरे लण्ड पर वार करने लगी, जोर जोर से सिसकारियाँ ले ले कर आंटी ईईये ये ये यीईईई उईईई आआआ ऊऊऊऊ उफ्फ्फ्फ आयेच कर रही थी और धक्के लगा रही थी और मैं भी आंटी की कमर पकड़ कर आंटी को जोर जोर से चोद रहा था.

मुझे भी कभी कभी लगता था कि रोहित मुझे अपनी बाँहों लेकर चूम ले… रोहित ही आज की कहानी का नायक है. मुझे पूरा विश्वास था कि इसकी चूत चोदने में किसी कुंवारी चूत से कम मजा नहीं आएगा…मैंने उसके पैर फैलाये और नीचे अपने पंजों पर बैठ कर उसके जांघ मेरे कंधे पर रखते हुए अपनी जीभ फ़िर से उसकी रसीली चूत में लगा दी. उसने मेरे शरीर को नोचना और दबाना चालू कर दिया और और अपने होंठों को मेरे चेहरे पर बुरी तरह रगड़ने लगी.

इसीलिए मामा को ही बुला लिया। अब तो हम सब गोला बना कर भी एक दूसरे की गांड मार सकते हैं.

लड़कों को देखभाल की ज़रुरत भी नहीं पड़ेगी और लड़कियों के साथ आप रहोगे तो आपको भी मज़ा… आ… जायेगा… मेरा मतलब. रीटा भी नम्बर एक की मां की लौड़ी थी, अपनी शर्ट के ऊपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली- बहादुर बिल्कुल यहाँ लगाना है, टिप पे, जरा जल्दी करो. मैं सोचने लगा कि आखिर कहाँ है नीना? दरवाजे के पास ही अपना वाशरूम है, तसल्ली के लिए एक बार फिर से वाशरूम में झाँका.

इंडियन चुदाई की सेक्सीफिर मैंने सोनम से कहा- मैं उसके साथ शादी से पहले सुहागरात की प्रेक्टिस करना चाहता हूँ!यह सुनकर सोनम हंस दी, कुछ नहीं बोली और आकर मेरे पैर छूने लगी. क्या स्वाद था।बुआ मस्ती के मारे सीत्कारने लगी। उसकी आहें कमरे में गूंजने लगी- आह्हह्ह आह्ह्ह राज मैं मर जाउंगी राज आह्हह्ह….

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ये सोच कर मैंने उनको डराते हुए कहा ‘ठीक है मैं तुम लोगों को केवल आधा घंटे का समय देती हूँ तुम लोग जल्दी जल्दी अपना काम करो और यहाँ से निकल जाओ और अब कोई और इस कूपे में नहीं आना चाहिए. !वो मेर बात सुन कर मुस्कुराने लगी तो मेरा हौसला बढ़ गया। मैंने हाथ बढ़ा कर उसके कंधे पर हाथ रख दिया. पहले तो मुझे बहुत शर्म आ रही थी, फिर मैं हिम्मत करके एक दुकान से तीन पेंटी और एक ब्रा खरीद कर ले आई.

किसी एक साथ मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाती, जो भी लड़का या कोई भी मर्द मुझे सेक्स में खुश नहीं कर पाता या फिर जिस के साथ मुझे बिस्तर में मजा नहीं मिलता, मैं उसे छोड़ देती हूँ. वो उसकी पहली चुदाई होने के बावजूद एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह जुम्बिश देती जा रही थी और अपने कमर को लचका रही थी. माँ ने कहा- तुम क्या ढूंढ रहे हो? मैं कुछ मदद करूँ तुम्हारी?मैंने कहा- कुछ नहीं माँ, एक सीडी थी मूवी की.

यह सुनने के बाद भी भाभी और उनका बॉस माफ़ी मांगने लगे तो मैंने कहा कि मेरी दो शर्तें हैं, पहली यह कि आज के बाद भाभी तुम भैया के आलावा किसी और के साथ सेक्स नहीं करोगी और यह नौकरी भी छोड़ दोगी और आज के बाद कहीं जॉब नहीं करोगी. पहली बार आयशा को देख कर मेरे दिल में कुछ अजीब सा हुआ क्योंकि जिस आयशा को मैं अब तक बच्ची समझता था उसका शरीर भी अपनी उम्र के हिसाब से बड़ा था.

उसकी आँखों में फिर से वही ज्वालामुखी सा गुस्सा उबाल मारने लगा…मैं : तू टेंशन मत ले ! शांत हो जा.

तो वो बोली- ठीक है!और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया. सेक्सी वीडियो चोदा चोदी वाला 2020 के५ इंच तो जरूर होगा !और सुपाड़ा ?वो तो लाल टमाटर की तरह है !अच्छा तेल लगा लो और फिर मुट्ठ मारो !ठीक अभी लाता हूँ !दोनों हाथों से मार रहे हो या एक ही हाथ से काम चला रहे हो ?एक हाथ में तो मोबाइल पकड़ रखा है !क्या तुमने कसम खा रखी है दिमाग से काम नहीं लोगे ? एक नम्बर के लोल हो तुम मैंने कहा था ना ?ओह …. सेक्सी मैडम कातभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी. आजकल सोशल साईट का जमाना है … मेरी प्रोफाइल पिक्चर देख कर सब लोग मेरे फ्रेंड बनना चाहते थे।मैं नाम से सेक्सी श्रेया आहूजा और फिगर तो पंजाबन वाली लम्बे बाल गोरा चिट्टा रंग …पीले रंग की टॉप में गोल गोल मम्मे और वक्ष-रेखा पर तिल! नीचे शॉर्ट-स्कर्ट.

मेरी बात मानो, अभी के लिए इसको भूल जाओ, कहीं ऐसा न हो कि यह यहीं आपको मार डाले, इसका कोई भरोसा नहीं है।अब्बास- बस कर साले….

मैंने चूत को मुँह में ले लिया और जोर जोर से चाटने लगा! उसके मुँह से आह आहह की आवाज़ निकलने लगी. यह सुन कर मुझे शर्म आने लगी और मैं कमरे से बाहर आ गया और रोने लगा क्योंकि आज तक कभी मुझे कोई भी लड़की शादी लायक नहीं लगी थी और जब लगी तो वो भी मजाक निकला. वो मेरी गाण्ड चोदता रहा और फिर उसने अपना लण्ड बाहर निकाल कर अपना सारा वीर्य मेरे गाण्ड के गोलों पर निकाल दिया.

मेरी कहानीमेरी जीवन-यात्रा का आरम्भअन्तर्वासना पर जब आई तो मुझे 400 से अधिक पाठकों ने मेल की और कहानी को बहुत पसंद किया।गुरूजी ने मुझे सुझाव दिया कि मैं और विस्तार के साथ लिखूँ।इसलिए अब जो सेक्स यात्रा एक साथ बयां की थी उसके कुछ यादगार घटनाओं को सुनती हूँ. उसके बाद जब हम केबिन में कपड़े ठीक करने गए तो सब कपड़े निकाल कर मेरे ही सोफे पर बैठ कर मुझसे अपने घोड़े की सैर करवाई … रात भर हुई चुदाई के बाद हम दोनों को इसका चस्का लग गया।अब तो हर देर रात हमारी दिवाली थी. एक हाथ से उसके एक स्तन को ब्रा कर ऊपर से ही दबाने लगा, दूसरे से उसके दूसरे स्तन को पकड़ कर चूस ही रहा था.

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मैं उसके ऊपर चढ़कर उसके चुचे दबाने लगा और अपना लण्ड फिर से उसके मुंह में डाल दिया, तान्या बिल्कुल एक रण्डी की तरह मेरा लण्ड चूसे जा रही थी. ऊपर से ही… मेरी पैंटी तक नीची नहीं की थी उसने…फिर उसके करने से ज्यादा मुझे हवा में उड़ना क्यों याद आता है बार बार, क्यों अच्छा लगता है वो उड़ना…क्या वो गलत था या अब मैं गलत हूँ… सोच सोच कर सर फटने लगा है… आह…. और तुझे तो पता है कि मैं थोड़ी शर्मीली हूँ इसलिए उन्हें फिर से लाने को नहीं कह सकती, और वो हैं कि कुछ समझते ही नहीं.

वो शरमा गई और उसके गाल हल्के-हल्के लाल से हो गए।वो अंदर आ गई और मैंने गेट बंद कर दिया, अंदर आकर उसको पीछे से पकड़ लिया, अपने हाथ उसकी कमर में डाल दिए और उसके बदन की खुशबू लेने लगा। उसके बदन की खुशबू इतनी मस्त थी कि किसी को भी दीवाना बना दे.

वो मेरे पापा के सामने कम आते थे पर पापा के चले जाने के बाद अंकल एक न एक बार जरूर आते थे.

उस दिन जैसे ही मुकेश ने मुझे घर के बाहर उतारा तो मैंने उसे अपना बैग ऑटो के पीछे से उतार कर देने को कहा. तब से उसके एक स्कूल के टीचर के साथ उसकी अफ़वाहें उड़ने लगी थी… मैंने भी उन्हें होटल में, सिनेमा में, गार्डन में कितनी ही बार देखा था. बिल्कुल ओपन सेक्सीमैं तो ज़न्नत में आ गया था जैसे !थोड़ी देर उसके चूसने के बाद मैंने अपना सारा लावा उसके मुँह में छोड़ दिया जो वो गटागट सारा पी गई।मुझे एहसास था कि मैं कहाँ हूँ इसलिए अपने होंठ दबा गया वर्ना तो मेरी कामुक सिसकारी और किलकारी दूर तक जाती, इतना मज़ा आया मुझे !उसने सारा रस पी लिया और मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया.

उसने मेरे गुलाबी होंठों को चूम लिया, एक हाथ मेरी कुर्ती में डाल मेरे मम्मे दबा दिए. जैसा कि मैंने आपसे कहा था, मैं पलक और अंकित की अधूरी कहानी लेकर आप के सामने हाजिर हूँ. ?” करेन ने मेरे कंधों पर घुमाकर अपने हाथ रख दिये।और जब आज रात इतना सब हो चुका, फ़िर भी तुम यहाँ पर तौलिया लपेटे बैठे हो ?”करेन की इस बात से मैं सहमत था। मैं खड़ा हुआ, तौलिया नीचे गिर जाने दिया और वापस बैठ गया। मेरा लिंग पूरी तरह से उत्तेजित नजर आ रहा था।अब ठीक है?” मैंने कहा।हाँ नग्न ही रहना है तो ऐसे बेहतर है.

भाभी ने मुझे एक तरफ करते हुए कहा- क्या करते हो? सबके आने का समय हो गया है, किसी ने देख लिया तो?लेकिन मैंने भाभी की एक ना सुनी और उन्हें फिर चूमने लगा तो भाभी ने मेरे गालो पर एक थप्पड़ मार दिया और चली गई. मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो बोल रही थी- चाटो प्लीज़ आआआआ ह्ह्ह्हह्ह और चाटो ! जोर जोर से चाटो ! खा जाओ मेरी चूत को ! आआअ ह्ह्ह्हह्ह सीईईईइ म्मम्मम आआआ ह्ह्हह्ह.

मैं काफी देर तक सोनम को ऐसे ही देखता रहा, सोनम वैसे तो उस वक्त बुरके में ही थी मगर उसके चेहरे पर से नकाब हटा हुआ था.

?मैडम ! आपको बुरा न लगे तो मेरा हाथ पकड़ लीजिए, मुझे तैरना आता है। आपको डूबने नहीं दूँगा। आप बैग को एक हाथ से ऊपर उठाइए तथा दूसरा हाथ मुझे थमा दीजिए।थैंक्यू !उसने अपना हाथ मुझे पकड़ाते हुए आभार व्यक्त किया। हम दोनों अन्य लोगों के पीछे-पीछे संभल कर चल पड़े।अगर बुरा न लगे तो क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?”मेरा नाम रंजीता है। घर वाले मुझे. जिस चीज़ की मुझे हवस थी यानि मर्दाना लण्ड, वो भला कोई लड़की कैसे दे सकती थी क़िसी को. पर मैंने भी फूल हाथ से नहीं छोड़ा…जब मेरे इस कारनामे पर भी उसका ध्यान नहीं गया तो मैंने उन्हीं रक्त भरे हाथों से उसके सामने फूल कर दिया…यह काम कर गया…उसकी नज़र फूल से पहले मेरी हथेली पर गई…उसने झट से मेरे हाथ से फूल छुडा कर फेंक दिया… मेरे हाथ थाम कर हथेली को अपने हाथ पर रख दूसरे हाथ से कांटा निकालने लगा.

सेक्सी पिक्चर दिखाइए ब्लू सेक्सी मैंने उठना चाहा लेकिन उसने मुझे अपने ऊपर खीच लिया और मेरे होंठों को अपने होठों से दबा कर चूसने लगी। थोड़ी देर तक हम दोनों इस प्यार भरे चुम्बन में लगे रहे लेकिन तभी…. मैं न चाहते हुए भी उससे दूर होने लगी थी… मेरा यह आकर्षण हमारी दोस्ती को दीमक की तरह चाट रहा था…एक दिन …मेरा जन्मदिन था.

मेरी तो आह ही निकल गई…उसकी एक ऊँगली मेरी चूत में भ्रमण कर रही थी !उसने उस स्थान के गीलेपन को छुआ और ऊँगली बाहर निकाल ली… उसे सूंघते हुए… उसने मेरी ऊँगली चाट ली…!!!अब उसने मेरी टीशर्ट उतार फेंकी और अपने मुँह मेरी चूचियों में दे दिया… मेरे होंठों को हाथों से दबा दिया. बस फिर क्या था, मैं चूमता गया उसकी आँखों, माथे और फिर नीचे की ओर गले में, सब जगह! बस उसने आँखें बंद कर ली. समय बिताने के लिए मैंने अपना पीसी चालू किया और उसे अपने और मेरे घर वालो के फोटो दिखाने लगा.

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मैं आनंद-विभोर होकर कहते जा रहा था- वाह रसगुल्ले सरीखी बुर !फिर मैंने सम्भोग की इज़ाज़त मांगी !आंटी ने कहा- चोद ले. मेरे खेल में उसकी रुचि देख कर फिर मैं पजामा पूरा उतार कर लंड हाथ में छुपा कर लेट गया. दोस्तो, यह तो है मेरी पहली चुदाई अपनी जिंदगी की और मस्त चुदाई जल्दी लेकर आऊँगी, तब तक के लिए अलविदा।[emailprotected].

जोर जोर से चोद मुझे…बहुत दिन से इस चूत को फड़वाना चाहती थी पर कोई तेरे जैसा लण्ड मिल ही नहीं रहा था. ”झंडे हल्के हाथों से मेरी दोनों जांघें सहलाने लगा। मेरी योनि के बाल उसके हाथ से टकरा रहे थे। इस बार मैंने महसूस किया कि लौड़ा बहकने लग गया था। बार-बार उसके हाथ मेरी जाँघों के बीच की घाटी की गहराई नापने लगते।हाँ, ऐसे ही बेटा, बड़ा ही आराम मिल रहा है….

अब क्रिस्टीना ने भी शाल निकाली और ओढ़ कर बैठ गई और मुझसे बोली- अब नींद आ रही है, मैं थोड़ी देर झपकी लूंगी।मैंने जी.

मैंने मौका देखा और बिना किसी हिचक चाची की भारी चूचियाँ पकड़ ली और दबाने लगा- चाची, आप जो हो ना, प्लीज मेरा कंवारापन तोड़ दो!वो मेरा हाथ अपनी चूचियों से हटाने लगी. संगेमरमर जैसी चिकनी जांघों के बीच में फूले हुए पावरोटी के जैसे बिल्कुल चिकनी और गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड ने अपना माल छोड़ दिया. सामान्य अवस्था में आने पर वेदांत मुझ पर से हट कर मेरे साथ में लेट गया…हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और जोर जोर से हंसने लगे… यह सोचकर कि यह क्या हो गया.

उधर राहुल का लंड खड़ा ही था… पर रीता को पता था उसे कैसे ठंडा करना है… उसने तुंरत ही राहुल की गांड में अपनी उंगली डाल दी… और उसके लंड कामिनी की चूत में से बाहर निकाल कर, गीले लंड की मुठ मारने लगी. बहादुर ने सोचा कि क्या किस्मत है, मेरे लण्ड को रीटा जैसी शहर की येंकी चूत चखने को मिली और वो भी स्कूल की टनाटन लौंडिया. मैंने देर ना करते हुए भाभी का हाथ पकड़ लिया और कहा- जो उस दिन नहीं हो पाया उसे आज पूरा कर लेते हैं.

उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.

बीएफ पिक्चर नंगा पिक्चर: दोस्तो,स्वीटी और जानू का मिलन-1में आपने पढ़ा कि मैंने श्रेया की चूत नहीं चाटी।अब आगे पढ़ें कि मैंने चूत क्यूँ नहीं चाटी…. उसने उस आदमी को कुछ पैसे दिए और बीयर लेकर आने को कहा और साथ में कुछ खाने के लिए भी!उसने मुझे बाँहों में भर लिया, मैं भी लिपट गई.

मैं थोड़ा घबरा गया और मैंने कहा- दीदी दीदी!!!तो दीदी बोली- मैंने तुमसे कहा था कि अकेले में मुझे दीदी नहीं डार्लिंग बोला करो. बस आँखें बंद किये मैं इन्तज़ार कर रही थी कि कब उसका प्यारा लण्ड मेरी गाण्ड का उद्धार कर दे. अब मैं सोचने लगी कि यदि अब कोई आकर दरवाजा खटखटाए तो हम दोनों को इस तरह अकेले देखकर क्या सोचेगा.

हेल्लो ! मुझे ठण्ड लग रही है…”मैंने उसे घर के भीतर लिया उसने भी अपनी चप्पल हाथ में ले ली ताकि कोई आवाज़ ना हो.

मैंने बोला- ठीक है, जब तक तुम नहीं चाहोगी मैं सेक्स नहीं करूँगा … लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हू और तुम्हारे पूरे बदन को मैं चूमना चाहता हूँ…यह सुनने के बाद उसने मुझे नहीं रोका।फिर मैंने उसका कुरता उतारा, काले रंग की ब्रा में क्या चूचियाँ थी बिल्कुल मक्खन जैसी…. ट्रेन का सफर था और मुझे अकेले ही जाना था इसलिए मेरे पति ने प्रथम श्रेणी एसी में मेरे लिए रिज़र्वेशन करवा दिया था. मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ उसके चुत के छोटे से छेद से घुसने को बेसब्र हो रहा था.