बीएफ बड़े-बड़े

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मैं उसके होंठों को चूस रहा था और साथ ही उसकी चूत में उंगली भी कर रहा था. करीना कपूर की बीपीएक दिन आफिस में कुछ ज्यादा काम की वजह से हम दोनों को घर जाने में देर हो गई.

वह शायद पानी लाने के लिए किचन की ओर गई हुई थी। उसको देख कर मेरा दिमाग कहीं खो सा गया था. मजदूर आदमी लोन कैसे लेजब भी मैं नीचे जाता तो मेरी मुलाकात लता भाभी और उनके हस्बैंड से होती रहती थी, लता भाभी मुझसे बातें करने का बहाना ढूंढती रहती थी.

वो बोली- डियर आज ये सारा काम तुम्हें ही करना है … और मुझे हर तरह से संतुष्ट करना है.बीएफ बड़े-बड़े: मैं उसके लंड का दीवाना हो चुका था और हमेशा ही उसका लंड लेने के लिए तैयार रहता था.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम पंकज है (ये बदला हुआ नाम है) मैं अपने बारे में बता दूं, मैं सोनीपत हरियाणा का रहने वाला हूं.वैसे तो मम्मी पापा मुझे डिस्टर्ब नहीं करते थे, शायद उनका भी यही कार्यक्रम चलता होगा, पर मैं भी बिना रिस्क लिए सब सोने के बाद ही मेरा कार्यक्रम शुरू करती.

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भाभी के बारे में बता दूँ, वो 5 फुट 3 इंच की लंबाई की है और उसके दोनों उभार अच्छे साइज के हैं.मैंने एक हाथ से उसकी चूचियों को उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.

मुझे उसके जागने का भी डर था, मगर न जाने मैं ये सब कैसे कर पा रहा था. बीएफ बड़े-बड़े अब तक आपने जाना था कि इमरान के तलाक दे देने के बाद मेरी (कजिन सिस्टर) आपा हलाला के चंगुल में आ गई थी और अब उनका निकाह मेरे साथ हो गया था.

चार पांच मिनट तक मैंने उसे ऐसे देखा, फिर उसने कपड़े पहन लिए और मैं वहां से चला गया.

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चारों ओर से चूत की दीवारों में फंसे हुए टाइट और खासे मोटे लंड की मौजूदगी मेरी नीना रानी को जन्नत का सैर कराने लगी. वंश ने अपने होंठों को फैला कर मेरी चूत पर एक तरह से ढक्कन सा लगा लिया था और वो मेरी चूत से टपकने वाले मेरे चूतरस का एक कतरा भी खराब नहीं जाने देना चाहता था. फिर वो मेरे पास आने लगा, तो मैंने उससे कहा- अब तुम मुझे होंठों पर नहीं चूमना.

अभी तक कहानी के पिछले भाग में कल्पना ने बताया कि मेरी सास मुझे एक कॉल ब्वॉय से मिलने को समझा रही थीं और मैंने उन्हें ‘सोच कर बताती हूँ. मैंने उसकी दोनों टांगें फैला के उसके घुटनों को उसकी चुचियों पे लगा दिया, तो उसकी छोटी सी बुर ने अपना छोटा सा मुँह खोल दिया. बहुत छोटी उमर से ही सेक्स का ज्ञान हो गया था मुझे … और अपने लंड को पकड़ कर मूठ मारने की आदत पड़ गई थी, हर लड़की को देख कर मैं उसके नाम की मूठ मारता था.

तभी मणि ने कोमल को पीछे से पकड़ कर गांड चौड़ी करके लंड पेल दिया और संजय नीचे से कोमल की चूत में लंड डाले हुआ था. दोबारा लगभग 4 बजे मैं उनके घर गया कि उनके हाथ से बनी चाय पी जाए, तो वह चादर ओढ़कर सोई हुई थी. इतना कहने के बाद मैंने ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड माँ की गांड को फाड़कर अन्दर तक घुस गया और फिर मैं धीरे-धीरे अपनी सगी माँ की गांड को मारने लगा.

सुखबीर को पता था कि मेरे पति सुबह ही चले गए, इसलिये जब मैं दुकान पर पहुंची, तो सुखबीर ने तरह तरह से बात करने के बहाने निकाले और करीब आधे घंटे तक मुझसे बातें की. उस दिन के बाद मेरी और मोनिका की बात लेट रात को जब होती थीं, जब उसकी बातें अपने पति से खत्म हो जाती थीं.

मेरे चूचुक चूमने और योनि में लगातार लिंग के कारण वो और भी ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मेरे मुंह में मलाई छोड़ने के बाद वो नीचे लेट गया और मैं उसके पूरे बदन को चाटने लगा.

कुछ ही देर में वह दोबारा गर्म हो गई और मुझे पकड़कर अपनी तरफ खींचने लगी. अगर सूरत की कोई फीमेल मुझसे दोस्ती करना चाहती है तो मेरा ई-मेल एड्रेस नीचे दिया हुआ है. समय बहुत ज्यादा हो गया था और उसके घरवाले भी आने वाले थे इसलिए मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और सुचेता को एक किस किया और फिर उसके घर से आ गया।उसके बाद मैंने उसकी कई बार चुदाई की और उसकी गांड भी मारी कभी होटल में तो कभी उसके घर में ही उसकी चुदाई की।अभी कुछ दिनों पहले ही वो अपने गांव में चली गई.

मैंने पूछा- सेफ्टी रेजर तो होगा?वो सेफ्टी रेजर ले आयी, मैं इंदु की पैंटी को उतार के बालों में क्रीम लगा कर झाग बनाने लगा. भाभी कहने लगी- ठीक है, किसी दिन आएगी तो मैं तुम्हारी तारीफ कर दूंगी. दो चार ज़ोरदार झटकों के साथ मैंने भाभी के मुंह में अपने लंड को धकेला, और मेरे लंड से गर्म-गर्म लावा उनके मुंह में गिरने लगा.

मेरा घुटना लगते ही उसके लंड ने एक झटका देकर ये जता दिया कि वह भी मेरे लिए तैयार है.

फिर मैंने प्यार से उसके माथे को चूमा और पूछा- ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा?तो उसने पलक झपका कर उत्तर दिया और वो हैप्पी हो गयी. उसकी बहुत तेजी से चीख निकल गयी, पर वो शायद जानती थी कि क्या होने वाला है इसलिए उसने अपने दोनों हाथों से अपने मुँह को दबा लिया. लेकिन मैं उसे बहुत उत्तेजित करना चाहता था इसलिए मैं अब उसके पेट होते हुए उसके बड़े बड़े दोनों कबूतरों को मसाज देने लगा.

जब कॉलेज फिर से खुला तो एक दिन पहले मुझे मेरी माँ ने कमरे की सफाई करने को कहा जो काम मैंने पूरा कर दिया. मैडम जी, आप बहुत बहुत सुन्दर हैं … वो फोटो वाली हीरोइन आपके सामने क्या है … कुछ भी नहीं. मुझे वह जगह मिली, रिस्ट्रिक्टेड एरिया में, वहां कोई नहीं आता जाता था.

फिर भी मैं भाभी की दोनों चुचियों को मुट्ठी में भर में उन्हें किस करने लगा.

मैंने कहा- तो फिर बना लो, नहीं तो शादी के बाद पति को कैसे खुश रख पाओगी?वो- उसके लिए बायफ्रेंड की क्या जरूरत है. हमारे बंगलो में एक गेस्ट क्वार्टर में उनके रहने की व्यवस्था की गई है.

बीएफ बड़े-बड़े फिर मैंने उसकी सलवार ब्लेड से फाड़ दी और हल्के हल्के हाथ से उसका सलवार हटा दी. फिर उसने खुद ही मेरे गालों को अपनी मोटी-मोटी उंगलियों में भींचकर मेरे होंठों को अलग-अगल करके खोल दिया और अपना लंड मेरे मुंह में दिया.

बीएफ बड़े-बड़े जब वो गाड़ी रख कर वापस आई, तो हम दोनों लिफ्ट से उसके फ्लैट में चले गए. शाम को पांच बजे मेरी नींद खुली तो देखी कि वो सो रहा है और मेरी भाभी उसके लंड के साथ खेल रही है, चूस रही है.

उन्होंने मेरे कानों को भी नहीं छोड़ा, अंत में उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे और उन्हें चूसने लगे.

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मैं नौकरी छोड़ कर अपने शहर इलाहाबाद आ गया, पापा के साथ व्यापार करने लगा. उधर सब लोग सामान्य बातें कर रहे थे, पर मैं अब भी उसी में खोया हुआ था. एक महीने बाद मेरे जन्म दिन पर मैडम ने मेरे जयपुर के पते पर एक सैमसंग का एक फोन भेज दिया था.

इतना खुमार था कि मेरी आंखें मजे के कारण बन्द हो रही थीं, मगर दिल करता था कि मैं यूं ही इसी हालत में ही सो जाऊं. उसमें उस कहानी में मैंने थोड़ा सा झूठ लिखा था कि उसके पहले मुझे किसी मर्द ने टच नहीं किया. मैं जैसे जैसे उसका लंड चूसती, वो वैसे वैसे मेरे बाल पकड़ के अपनी तरफ खींचता जाता और मेरे चूचों को दबाता जाता.

मामी बोली- तो फिर आप से गलती हुई है तो आप सजा के भी हकदार हो जाते हैं.

भैया भाभी का ब्लाउज और ब्रा खोल चुके थे और उनके मम्मों को मसल मसल कर रंग मल रहे थे. फोन काटने के बाद मीरा मैडम बोलीं- ऋषभ, मैं जिससे अभी बात कर रही थी, उनका नाम सिमरन मैडम है, वह यहां पर आ रही हैं. तो उनको कोई एतराज नहीं था क्योंकि मैं बचपन से ही उनके साथ सो जाती थी जब वो घर आते थे।बस यही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ी मोड़ था।बात करते 2 बज गए तो हमने सोने की सोची.

उसके बाद हम अच्छे दोस्त बन गए, फिर मैंने उससे उसका फ़ोन नंबर मांगा और उसने बिना कुछ सोचे दे दिया. मीना ने कहा- देखो जी, तोहार बीना जी ना लगे घर में … तुम्हारे बिना मेरा घर में तनिक भी दिल नहीं लगता. मैं उसकी हूँ… फिर तो मैं उसे जीजा जी कहूंगी, क्यों दीदी?’और मेरे चेहरे पे बरबस मुस्कान आ गयी.

मैंने कहा- अच्छा यह बताओ, तुम्हारी मम्मी की चूत कैसी है?सोनू कहने लगी- एकदम सुंदर, चिकनी और गोरी, अंदर से पिंक कलर की है. सुहागरात में जब आशा कमरे में सेक्सी नाइटी में मेरा इंतज़ार कर रही थी.

उसने मेरी तरफ घूम कर मेरे होंठों को अपने होंठों में ले लिया और चूसने लगी. जब भी मुझे पड़ाई में कोई भी प्राब्लम होती थी मैं उस से पूछ लेती थी. एक कोने में एक लकड़ी का बेड था, उसके पास उनका स्टडी टेबल, उसके पास एक फ्रिज.

जब मैं स्कूल की छोटी कक्षा में था, तो मुझे सेक्स के बारे में कुछ कुछ पता चल गया था, पर बहुत ज्यादा मालूम नहीं हुआ था.

और इतना सब होने के बाद भी तुम …इतना कह कर वो कुछ बोलते बोलते रुक गई. हम लोगों ने रात का खाना खाया और फिर सब लोग आराम से बेड पर जाकर बातें करने लगे. रूपा डायनिंग टेबल पर खाना परोसा, उस वक्त मेरी नजर उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर थी.

वह बिल्कुल डंडे की तरह खड़ा हुआ और कम से भी कम 7 इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा।मैं डर गयी और चाचा से कहने लगी- चाचा जी, प्लीज मुझे छोड़ दे … ये बहुत बड़ा है. उसने जब दो तीन बार मेरे सामने आकर मुझे पेप्सी दी, तब मैंने उसे नोटिस किया.

मैं उसके ऑफर को सुन कर पहले तो दंग रह गया … बाद में यह सोच कर कि हाथ लगी मुर्गी को ऐसे कैसे चला जाने दूँ … और बस उसके साथ अन्दर चला गया. उसे देख कर मैं भी उसकी हिलती चूचियों को दबोच कर मसलता हुआ, पूरा मजा ले रहा था. दरवाजा खोला तो क्या बताऊं दोस्तो … सामने मेरी हसीन परी पायल खड़ी थी.

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फिर उन्होंने जल्दी से मेरी टांगों को चौड़ी कर दिया और फिर अपने छोटे से लंड को मेरी चूत के मुंह पर रखकर मेरे ऊपर लेट गए.

मैं तो अभी अच्छी तरह से गर्म भी नहीं हो पाई थी और उनका खेल खत्म हो चुका था. मैं सच में उस वक्त दोबारा जीजा जी का मूसल लंड अपनी योनि में नहीं लेना चाहती थी. मैंने भी एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड उनकी चुत की गहराई में उतार दिया और उनके ऊपर लेट गया.

शैली ने लंड हाथ में लिया, प्यार से सहलाया, ऊपर से नीचे तक चाटा, फिर मुँह में ले लिया. मर्दों को तो ऐसे सुडौल और गोल चूतड़ खुले ही ज्यादा आकर्षित करते हैं. एक्स एक्स एक्स प्रेसिडेंट न्यूज़ हिंदीमैंने लंड खींचने की कोशिश की, उनको इशारा भी किया, पर उन्होंने लंड को नहीं छोड़ा.

मैं, मेरा दोस्त अविनाश और उसकी गर्लफ्रेंड साक्षी साथ ही पढ़ाई करते थे. वो मुझे लगातार प्रेरित कर रहा था, साथ ही मेरे चूतड़ों को चूम और सहला भी रहा था.

मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी इसलिए लिंग आराम से अंदर चला गया. मैंने मैडम की तरफ सिगरेट बढ़ाई तो देखा कि मैडम की साड़ी एकदम खुली पड़ी थी और उनके गहरे गले वाले ब्लाउज से उनकी मदमस्त चूचियां मुझे ललचा रही थीं. अंकल ने मुझे पकड़ कर बेड पर बिठाया, मेरा तो गला सूखा पड़ गया था, मैंने अंकल को बताया तो वो फ्रिज के पास गए और फ्रिज से स्लाइस की बोतल निकालकर मुझे दी.

महीने भर के बाद तो हम दोनों इतने ज्यादा खुल गए कि वो मुझे अपने फ़ोन के वाट्सअप पर दोहरे मतलब वाले चुटकुले, मजाकिया अश्लील तस्वीरें व अन्य कई वयस्क सामग्री दिखाने और साझा करने लगी. वहाँ भैया और भाभी ही रहते थे, उनका एक ही रूम था और वो मेरे सोने के बाद सेक्स करते थे. उसकी बात मेरी समझ में नहीं आई तो मैंने कहा- आपको क्या काम है और क्या चाहिये?वो मेरी बात सुनकर हँसने लगी और बोली- आज तुम अकेली ही सो जाओगी क्या?मैं- नहीं, मेरे साथ बच्चे भी सो रहे हैं.

भाभी- तो मेरा एक काम कर दे बस … फिर कुछ नहीं … और फिर उसके मजे और भी दिलवाऊंगी.

मणि आने लगा तो संजय ने कोमल को अपने ऊपर ले लिया और नीचे से उसकी चूत में लंड पेलने लगा. हम कब उस रोमांटिक पल से काम वासना की ओर चल दिये हमें पता ही नहीं चला। हम दोनों की किस और टाइट होती चली गयी और उसने मुझे धकेल के दीवार से सटा दिया और हम दोनों काफी ज़ोर से एक दूसरे को किस कर रहे थे, हम दोनों एक दूसरे के होंठों की होंठों से रगड़ रहे थे, अब वो मेरे और मैं उसके होंठों को चूस रही थी। लगभग 1-2 मिनट के किस के बाद हम हटे, हम दोनों के दिल ज़ोरों से धड़क रहे थे।कहानी जारी रहेगी.

उस दिन शाम तक मैं उसके घर पर ही रहा और हमने साथ में खाना खाया और उसके बाद दो बार फिर से सेक्स किया. मैं सोचने लगा कि क्या यह वही लेडी है जो मुझे वहां बाहर पसीने से भीगी हुई मिली थी. जब वह झुक कर मुझे जूस का गिलास देने लगी तो उसके टॉप के अंदर लटक रहे उसके चूचे मुझे साफ-साफ दिखाई दे गए.

मैं- ह्म्म्म मेरे पास इसका इलाज है, चलो मामी जी बाथरूम में हल्का सा शावर लेते हैं, वहां आपका दर्द में भगा दूँगा. एक रोज़ सुबह ही मैंने पिछले आँगन में नीचे झाँक कर देखा तो मैं दंग रह गया. दस मिनट में ही उसकी हालत खराब हो गयी और वो बोलने लगी- बस करो मेरी चूत फट गयी है.

बीएफ बड़े-बड़े वो नीचे से अपने लंड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोद रहे थे और इधर मैं उनके लंड की सवारी करने के साटी साथ अपनी चूचियों को सर के मुँह से चुसवा रही थी. मुझे इस बात से जरा और अजीब सा लगा कि मैडम तो आज रंग पर रंग दिखाए जा रही हैं.

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एक और समस्या यह थी कि इस तरह हम औरतें पेशाब करती नहीं हैं, सो कुतिया की तरह झुक कर करना बहुत मुश्किल था. फिर हम उठे और कुछ देर गंगा नदी के किनारे टहलकर वापिस आ गए। अब कुछ बातें करने से मैं और रितिका आपस में खुल चुके थे. मैंने सोचा कि यदि मैं अपनी लुल्ली दिख देता हूँ, तो फिर मैं रवि मामा से अपना लंड दिखाने की जिद कर पाऊँगा.

मैं बोली- अंकल, आप का काम हो गया हो तो मैं जाऊं?अंकल मुझे रोकते हुए बोले- अरे नीतू रुको, तुम्हें यह सब अच्छा नहीं लग रहा क्या?अब उनको कैसे बताती कि मेरे पूरे बदन की हर तार झनकार कर रही थी. जब शाम हो गयी तो राजन बाहर जाने लगा और जाते हुए उसने कहा कि वह रात का खाना बाहर ही खाएगा. बाथरूम करते हुएमैंने कई बार अनुष्का की कामुक आवाजें वैन में सुनी थी मगर आज तो मैं खुद अपने मुंह से कामुक आवाजें निकालने पर मजबूर हो गया.

मैंने पहले ही कहा था न कि मुझे अपने साथ ले चलो पर तुमने मेरी बात पर गौर नहीं किया.

मैं प्रधान जी एक स्कूल में शिक्षक हूँ, मेरे सहकर्मी शिक्षक शंकर कुमार झा जो विधुर हैं. मैं राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक गांव का रहने वाला हूँ और अभी अजमेर में रहता हूँ.

उससे पूछा- रीना, तुम कुछ ठंडा या गर्म लेना चाहोगी क्या?वह बोली- मैं तो ठंडा ही पीना पसंद करती हूँ. हम्म … कौन है वो? तेरी क्या लगती है?” सर की आवाज़ में बड़ी मिठास थी अब. वह शायद पानी लाने के लिए किचन की ओर गई हुई थी। उसको देख कर मेरा दिमाग कहीं खो सा गया था.

फिर कुछ देर बाद मुझे एक ग्राहक का कॉल आया, उसने अपना नाम हर्षिता बताया और उसने मेरा कोड पूछा.

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उस वक़्त रात के करीब 9:30 हो रहे थे और स्टोर पर भी दुकानदार के अलावा कोई नहीं था.

अबकी बार मैं चित लेट गया और भाभी ने मेरे ऊपर आकर अपनी चुत में मेरा लंड घुसा लिया. सेक्सी पिक्चर गाना मेंउसने वापस हाथ निकाल लिया और वो हंसते हुए चाय बनाने के लिए रसोई में चली गयी. लड़की के कपड़े उतारते हुए वीडियोवो बेचैन हो रही थी लंड के लिए, कहने लगी- जल्दी करो ना!मैंने उसकी चूत में वेसलीन लगाई और अपना पेनिस सेट करके उसकी क्लिट पर रगड़ने लगा. फिर हमने धीरे धीरे मालिश करना कम कर दिया क्योंकि भविष्य में कभी दिक्कत न आये.

तभी दीदी ने घर जा कर मुझे मैसेज किया- क्या कल तुम फ्री हो?मंडे को कोई सरकारी छुट्टी थी, तो मैंने बोला- हां दीदी.

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चूंकि वे काफी लम्बे थे लगभग 6 फिट और क्योंकि वह खेत में मेहनत करते थे, तो उनकी बॉडी किसी खिलाड़ी की तरह ही काफी सुडौल और मस्त थी. मैंने हां कर दी और अगले दिन ही मैं अंडों की दो ट्रे ले आया और भाभी के घर पर रख दी. वो मेरी तरफ पलट गयी थी और मैंने उसकी टीशर्ट ऊपर कर दी थी और उसके मम्मे बाहर आ गए थे.

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लेकिन दोस्तो … अक्सर, अक्सर ही होता है, वो रोज़ में तब्दील नहीं हो सकता है. जैसे ही मैंने उसकी पेंटी निकाली, उसकी मस्त सी चूत मुझे दिखाई दी जो हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी. इस पर बड़ी कातिल अदा के साथ नीना भी पूरी घरेलू चुदक्कड़ औरत की तरह प्रशांत को तड़पाने के मूड में आ गई और पलटकर प्रशांत के खूंटे जैसे लौड़े को अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया.

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मीरा- तुम्हारे पीजी वालों को कॉल करके मैं बोल दूंगी कि आज ऋषभ की नाइट शिफ्ट है … ऑफिस में काम थोड़ा ज्यादा है. मैंने कहा- अरे मैडम … मैं मजाक में बोल रहा था कि कुछ मिलाने के लिए है और आप तो असली में लेकर आ गईं. नमस्कार दोस्तो, अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज़ डॉट कॉम पर यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है। अगर कोई ग़लती हो तो माफ कर दीजियेगा।सबसे पहले दोस्तो, मैं अपना परिचय देना चाहूँगा। मेरा नाम राहुल है, मैं रांची में रहता हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ, यह कहानी तीन महीने पुरानी है। जब मैं जॉब की तलाश में था और घर पर ही रहता था। मैं घर पर बैठे-बैठे बोर हो रहा था.

इधर मैं भी अपने मित्रों को एडल्ट साईट में देख और बातें कर कभी कभी उत्तेजित हो जाती और संभोग की कमी महसूस करती, पर मेरे लिए ये सब कुछ फिलहाल सपने की तरह था. आप प्लीज़ मेरी इस पहली स्टोरी को अपना समर्थन दें और अपने कमेंट मुझे ईमेल से जरूर भेजें.

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अंकल ने अपना एक हाथ मेरे पीठ पर लेकर आ गए और दूसरा हाथ मेरे सिर के पीछे ले आए. मैंने उसके सारे कपड़े उतारकर उसे बिल्कुल नंगी कर दिया था और खुद भी अंडरवियर में आ गया. मैं अपने कोलेज के दोस्तों की ओर हमेशा ही आकर्षित रहने लगा था और उनकी ओर वासना भरी नज़र से ही देखता था.

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खुद का ठेका ले लिया था, इस वजह से वो वहीं रहने लगे थे और 3-4 हफ्ते में आते और राशन पानी की व्यवस्था करके चले जाते. अन्तर्वासना का नाम सुनते ही वो लेडी एकदम से चहक उठी और बोली- वाह, तुम भी अन्तर्वासना साईट के फैन हो. वह बोली- क्या देख रहे हो?मैंने कहा- मैं पहली बार किसी जवान लड़की को नंगी देख रहा हूँ.

वो मुझे होंठों से लेकर गालों और गले में चूमते हुए मेरे दोनों मांसल स्तनों को मसलने लगा. अम्मी चाय नाश्ता बिस्तर में रख कर भाभी को बाहर ले गयी और कहा- तू चल, मुझे मालूम है क्या हो रहा है.

फिर मैंने उसकी पेंटी पर हाथ फिराना शुरू कर दिया तो उसने मेरा हाथ फिर से हटा दिया.

वह तो तुरंत ही लंड को चूत की सुरंग में ठेल देने को बेचैन हो गया मगर नीना के डर से ऐसा नहीं कर सका. मेरी भारी चीख निकल गई पर पूरा लंड गांड में जाने के बाद अब बहुत ही मज़ा आ रहा था. मैंने कहा कि फूल को फूल दे रहा हूँ … समझ नहीं आता, कौन ज्यादा खूबसूरत है.

एक दिन वह मुझसे अपने बॉयफ्रेंड की बात करने लगी और उसने मुझे किस करने के लिए अपना चेहरा आगे कर दिया. मैं घबरा गयी, मैंने घबराहट में पूछा- क्या नहीं करते? क्या तुझे प्यार नहीं करते? मारते हैं क्या?मेरी बेटी ने कहा- अरे नहीं मम्मी … वो रात को पता नहीं कैसी कैसी डिमांड करते हैं. उसने अपना गरम वीर्य मेरे अन्दर ही छोड़ दिया, उस गर्माहट से थोड़ी राहत मिली.

सरोज भाभी लम्बी लम्बी सिसकारियां लेने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ तो मुझे लगा ये सही समय हैं मैंने बिना देखे ही 3 खतरनाक धक्के लगा दिए.

बीएफ बड़े-बड़े: ऐसा करने के बाद वह दूर हटी और बोली- यही मौका उस दिन भी मैं तुम्हें दे रही थी और तुम बेवकूफों की तरह मेरी शक्ल देख रहे थे. यह सुनकर मैं बेकाबू हो गया, मैंने दूध का गिलास पिया और माँ को अपनी बांहों में भर लिया.

पहले तो मिसेज पाटिल थोड़ा डरीं, लेकिन मैंने उन्हें इशारा किया और डॉली को बोला- यार, बेचारी की मदद कर रहा हूँ. सोनम से मैंने कहा- तुम अब मेरे को कब मिलोगी?तो उसने कहा- दोपहर में घर आ जाना. अब रिया बोली- में नहीं सहन कर सकती … तुम्हारे सबके बहुत बड़े हैं … प्लीज़ रुक जाओ.

मैंने पूछा- क्या हुआ?तो बोली- जल्दी जाओ … नहीं तो मैं वापस जा रही हूँ.

फिर अपना लौड़ा मेरी चुत के गेट पर रखकर बोले- थोड़ा दर्द होगा मेरी गुड़िया … फिर अच्छा लगेगा, तुम चिल्लाना मत, नहीं तो मम्मी आ जाएंगी।मैंने ओके कहा. तीन बार लगातार चुदाई के बाद मैं भी थक गया था और वह भी काफी थकी हुई लग रही थी. ”वैसे भी दिन के समय सभी या तो आराम के लिए सोये होते हैं या डयूटी पर होते हैं.