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यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने उसके कपड़े उतारे और उसकी गाण्ड में तेल लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया।अब कैसे पेला उतना नहीं बता रहा हूँ. लगता है कि किसी हसीन और खूबसूरत लड़की की ख्वाब ही देख रहे थे?फैजान मुस्कराया और एक नज़र जाहिरा पर डाल कर बोला- हाँ. ’ मेरा दिल इस तरह मुझे दुनियादारी समझा रहा था।ये सब बातें सोचते-सोचते मेरा लण्ड फिर से बगावत कर बैठा और तमतमा कर खड़ा हो गया और मैं आरती के बारे में सोचता हुआ अनजाने में ही मुठ मारने लगा।जब मेरे लण्ड से लावा की पिचकारियाँ छूटीं.

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पर फिलहाल अनुपमा के बाद चूत का इन्तजाम नहीं हो पा रहा था।मैं अब नई चूत की तलाश में था। नसीब से वो तलाश भी जल्दी ही पूरी कर हो गई।उसका नाम मीरा था.

और मैं भी अपनी ऊँगलियां माँ की बुर में तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा।माँ भी धीरे-धीरे अपनी कमर ऊपर उछाल कर चुदवा रही थीं और खूब ज़ोर से हिलते हुए झड़ गईं।तभी मैं अपना लंड दीदी के मुँह में अन्दर तक घुसड़ेते हुए झड़ गया।दीदी भी मेरे लंड का पानी पूरा चाट गई. मैं उसको मना लूँगा।सूर्या अपने घर चला गया और मैं सोनाली के कमरे में गया तो देखा वो पूरी नींद में औधी पड़ी थी तो मैं भी अपने कमरे में जाकर सो गया।जब पापा आए तो मेरी नींद खुली. लगभग 10-15 मिनट तक चुदाई करने के बाद वो भी दीप्ति की तरह ही मेरे लंड पर बैठ गई और उसने लंड को पूरे ज़ोर से अन्दर खींच लिया.

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जिसका फल उसकी कोख में था।ठीक 9 महीने बाद वह एक बेटे की माँ बन गई। उसके बाद मैंने उसे नहीं चोदा। क्योंकि अब मेरी नजर उसकी सबसे छोटी बहन पर थी जो अभी अभी जवान हुई थी।मैंने उस कली को फूल कैसे बनाया। यह कहानी भी जल्दी ही आपकी नजर करूँगा।आपको कहानी कैसी लगी. तुम लड़कों को और काम ही क्या है लड़कियों को देखने के अलावा।मैं- और करना ही क्या है हम लोगों को?कुछ देर बाद उसने कुछ कपड़े ले लिए तो मैंने भी एक कपड़ा जैसे सोनाली को लाकर दिए थे. ।’ मैं बोला और उसकी गर्दन चूमने लगा, उसकी कलाइयाँ थाम के दोनों मम्मों को एक-एक करके पीने लगा।आरती कुछ बोल नहीं रही थी.

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मैं आरूष दिल्ली से हूँ। मैं आज जो कहानी लिख रहा हूँ उसे झूठ मत समझना, मेरी कहानी बिल्कुल सच्ची है।हमारा फ्लैट दूसरे माले पर है. जिससे मेरे मम्मे और भी उभर कर बाहर को दिखने लगे।मेरे आधे से ज्यादा मम्मे बाहर निकले पड़ रहे थे और नीचे से बस घुटनों तक की ही स्कर्ट थी. कितनी तनी हुई हैं।फैजान ने मेरी तरफ देखा और फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा।अब आगे लुत्फ़ लें.

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जिससे हमारी गुजर-बसर बड़े आराम से हो जाती थी। नौकरी लगने के बाद मेरी भी शादी हो गई और मेरा गाँव जाना भी कम हो गया। कभी-कभी तो पूरा साल निकल जाता गाँव गए हुए. आप लोगों को बता दूँ कि अब मेरे मम्मे बहुत ही बड़े थे, ब्रा 36 सी की साइज़ की पहनती हूँ। उनको जितना भी ब्लाउज. वो सही नहीं हैं। आज मैंने आपको उस आदमी के साथ देख लिया है।मेरी बात सुनते ही मॉम रोने लगीं और बोलीं- तो मैं करूँ भी तो क्या करूँ.

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लेकिन ये कहानी बिल्कुल सच्ची है। आप अपने विचार मुझको जरूर मेल करें लेकिन मेरी हिदायत को न भूलें। अब आप मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।मेरी फेसबुक आईडी है।[emailprotected]. वो चुदने के बाद में बता रही थी कि उस दौरान वो चार बार झड़ी थी।जब मेरा निकलने को हुआ तो वो बोली-अन्दर ही डाल दो. तुरंत भाभी का कॉल आ गया।भाभी मन ही मन अपनी तारीफ में बहुत खुश थीं। उनके ‘हैलो’ बोलते ही मैंने कहा- भाभी आपकी आवाज़ बहुत प्यारी है.

साथ ही उसकी कुरती भी उतार दी। अन्दर उसने एक स्लिप पहनी हुई थी। तब मैंने उसकी छोटी सी चड्डी पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उसे नीचे खिसका दी। अब मेरे सामने उसकी गोरी चूत थी.

हर वक़्त तुम्हारी चूत को याद कर करके खड़ा हुआ ही रहता है। जब तक अब यह तेरी चूत की अन्दर नहीं चला जाएगा.

मेरी जीभ का स्पर्श अपने क्लिटोरिस पर वो सहन नहीं कर सकी उसके बदन में भूकम्प सा उठा और उसने कसके अपनी टाँगें मेरी गर्दन में लपेट दीं. सही बता मैंने यहाँ चूमा तो मज़ा आया ना?निधि के गाल शर्म से लाल हो गए थे। उसने धीरे से ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई।अर्जुन- ये हुई ना बात. औरतों की चुदाई दिखाइए? हमारा कमरा भी इतना बड़ा नहीं था कि उसमें कोई और बिस्तर लगाया जा सके और ना ही उसमें कोई भी और सोफा वगैरह ही पड़ा हुआ था।काफ़ी सोच विचार के बाद मेरे शैतानी दिमाग ने एक अनोखा आइडिया दिया जिससे मेरा काम भी आगे बढ़ने की उम्मीद थी।मैं फैजान से बोली- फैजान एक बात हो सकती है कि हम जाहिरा को अपने साथ ही बिस्तर पर सुला लें।फैजान चौंक कर बोला- लेकिन यह कैसे हो सकता है.

तो वह और गरम हो गई व अजीब सी आवाजें निकालने लगी।फिर वह मेरा साथ देने लगी व मुझे भी चूमने लगी, मैं पैन्टी के अन्दर हाथ डालकर उनकी चूत सहलाने लगा।उनकी चूत पानी छोड़ने लगी थी, मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी, उन्हें मजा आने लगा. तुम्हें ऐसा देखते ही मुझे समझ में आ गया था कि तुम में एक एग्ज़िबिजनिस्ट छुपा है और तुम शायद ऐसे नंगा होने के लिए कुछ भी करने को तैयार बने रहते हो. अगले भाग में आप पढ़ना कि रोहन ने मेरे घर में ही मेरी चुदाई की और मुझे अपना शैदाई बना लिया। आपके ईमेल का इन्तजार रहेगा।कहानी जारी है।[emailprotected].

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