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चोदना शुरू करने के कुछ ही देर बाद वो झड़ गई।करीब दस मिनट के बाद वो फ़िर से झड़ गई और कुछ मिनटों के बाद मैं भी झड़ गया और अपना सारा गरम पानी उसकी चूत में लबालब भर दिया।हम कुछ देर तक थकान से ऐसे ही पड़े रहे और यहाँ-वहाँ की बातें करने लगे।फ़िर वो बोली- एक बात बोलूँ. বিএফ এডালधक्कों पर धक्कों को लगाने लगा।मैं 5-6 धक्कों में ही मदमस्त हथिनी सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- ओह… ओह… म्मम्म… ह्म्म्म… हाय जानू कितना मजा आ रहा है… चोदते रहो.

और समय पर उनके घर चला गया। यह मैं लखनऊ की बात कर रहा हूँ। वहाँ उनके पति मुझे स्टेशन लेने आए थे। वहाँ से सीधे उनके घर गए। आपस में बातचीत के दौरान मुझे मालूम हुआ कि पति का नाम अवि था और पत्नी का नाम रेखा था। वहाँ अच्छा घर था, फ्रेश होने के बाद कमरे में आया और पूछा- क्या करना है?अवि बोला- आप रेखा की मालिश कर दो. कल्याण और राजधानी नाइट चार्ट एक साथ??’ मैंने एक दिन शरारत करते हुए पूछा।वो कुछ नहीं बोली, मैं समझ गया कि मादरचोदी अभी भी पुराना लंड खाना चाहती है।‘शनिवार की रात को उसे फोन करके बुला लेना, दोनों साथ में होंगे तो तुझे रंडी बना देंगे। ऐसा चोदेंगे कि कभी नहीं भूलेगी।’निभा को तो जैसा मन की मुराद पूरी करने वाला मिल गया था, उसका चेहरा खिल उठा।मैं जो कर रहा था.

मैंने रिया से अलग होकर तुरंत उसे खड़ा किया और उसकी सलवार का नाड़ा खींच कर खोल दिया, उसकी खुली सलवार नीचे सरक कर फर्श गिर गई और अब वह मेरे सामने सिर्फ आधी गिठ कपड़े से बनी पेंटी में खड़ी थी.बीएफ फोटो चोदा चोदी: लगता है मैं 2-3 दिन ठीक से चल भी नहीं सकूंगी।”मेरी जान तुम तो मुझे रात को ही कहोगी… एक बार आ जाओ !” वो हँसने लगा। मेरी भी हंसी निकल गई।रात की बात रात को देखेंगे….

मैं उसके चेहरे पर एक संतुष्टिभाव दिख रहा था… जैसे उसको सब कुछ मिल गया हो…फिर वो मेरी बाहों में समा गई… कुछ देर बाद मैं उठ कर अपनी जगह पर चला गया।वो सुबह मुझसे मिली, वो आज भी बहुत खुश थी.उफ्फ… उन्हें देख कर लौड़ा खड़ा हो जाता है।पड़ोस के सब लड़के उन पर फ़िदा थे, मैं भी उनमें से था।मैं उनको देखता रहता था, जब भी वो घर से बाहर आतीं.

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अगले कुछ 7-8 दिन हमारे कुछ इसी तरह गुजरने लगे हम कभी मॉल में मिलते, कभी पार्क, कभी मार्केट में, और अब हम एक फ़िल्म तो रोज देखते थे, हमारी काफ़ी अच्छी दोस्ती हो गई थी, अब हम एक दूसरे के हाथों में हाथ डाल कर घूमते थे और रात को तीन-तीन चार-चार घंटे बात करते.!मुझे समझ नहीं आया आखिर हेमा ऐसा क्यों बोली।तभी फिर से आवाज आई- प्लीज बस एक बार और!हेमा ने कहा- इतनी जल्दी नहीं होगा तुमसे… काफी रात हो गई है.

मैं- जी हाँ, मगर तुम इतनी घबराई हुई क्यों लग रही हो, क्या तुम्हारा भी गला सूख गया है क्या…?पूजा ने शरमाकर अपना मुँह नीचे कर लिया. बीएफ फोटो चोदा चोदी कुछ देर बाद सोनिया वापिस आई और मेरे नंगे चूतड़ों पर फिर से एक जोरदार थप्पड़ मार कर बोली- चल सायरा खड़ी हो जा! मैं खड़ी हुई पर मुझे अपने कपड़े वहाँ नहीं दिखे इसलिए मैं समझ गई कि सोनिया का दिल अभी नहीं भरा, वो अभी मुझे और ज़लील करेगी.

बस सुहागरात को तेल लगा कर उसकी चूत में लौड़ा घुसाया था, मगर उसकी सील बचपन में खेल-कूद में टूट गई थी, तो खून तो नहीं आया.

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अब तू हर तरह से चुदने के लायक हो गई है।उनकी बात सुनकर मेरा डर निकल गया, मैं जब उठी तो मेरे पैरों में दर्द हुआ और चूत में भी अंगार सी जलन हो रही थी।मैंने हिम्मत करके खुद को उठाया और कमरे में थोड़ा चहलकदमी की, यह भी मुझे पापा ने ही बताया।दस मिनट में मेरा दर्द कम हो गया और मैंने चादर हटा कर बाथरूम में धुलने में रख दी, पापा और मैं एक साथ नहाए।पापा ने बड़े प्यार से मल कर मेरी चूत साफ की. !वो मेरी बाइक पर आ गईं, तब मैंने देखा कि वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थीं। करीब 30 साल की होंगी। उसके कपड़े में से उसका जिस्म साफ़ दिखाई दे रहा था।मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागृत होने लगी, मैं बाइक चलाते वक्त उसको थोड़ा पीछे को दबाया तो देखा कि वो भी आगे की ओर धक्का दे रही है। मुझे मज़ा आ रहा था।जब उनका घर आया तो वो बोलीं- बस यहीं रोक लो. !फिर हम दोनों ने एक-दूसरे से खूब सारे वादे किए, खूब सारी कसमें खाईं।फिर वो उठा और ड्रेसिंग टेबल से कुछ लेकर आया, बोला- आँखें बंद करो.

की नज़रों ने हमारी यह हरकत पकड़ ली और वो भी चालू हो गया। उसने मौका देखा और बॉस का हाथ वहाँ से हटते ही अपना हाथ मेरी चूत पर धर दिया।मुझे लगा कि आज तो कुछ गजब ही हो रहा है, मेरी चूत से जैसे अब पानी बहने लग जायेगा। ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। खैर अब ड्रिंक्स के बाद डिनर भी जल्दी ही हो गया और बॉस अपनी कार से हमको होटल छोड़ने आये। वहाँ पर एक कमरा हमारे बगल का ही सी. दोस्तो, मेरा नाम अजय है। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूँ, मैं अपनी पहली कहानी आप सबके सामने प्रस्तुत करने आया हूँ। यह कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी की है।भाभी का नाम सुमन है वो बहुत ही गर्म माल लगती है, उसकी मस्त चूचियां. वो तो चिल्ला पडी- अरे मार डालोगे क्या??मैंने उनके चूतड़ सहलाये और आगे हाथ बढ़ा कर उनकी चूचियाँ दोनों बगलों से दबाने लगा… करीब 3-4 मिनट में भाभी फ़िर पानी छोड़ने लगी.

उधर मोनिका रीटा की चूत से कतरा कतरा जूस कचकचा कर पीने की नाकाम कोशिश कर रही थी पर रीटा की चूत तो जैसे हमेशा हमेशा के लिये बाल्टियाँ भर भर कर छपाक छपाक पानी फैंके जा रही थी. उसके बाद जब उसका जन्मदिन आया तो मैंने उसे मिलने की योजना बनाई पर कुछ और काम आ जाने से उस दिन मैं नहीं मिल सका पर उसके दूसरे ही दिन मुझे मौका मिल गया. फिर भी मैंने खुद से कहा कि सोनिया मुझे जो भी कहेगी मैं उसे करूँगी क्योंकि मैं हार तो चुकी हूँ और अब यह नहीं चाहती कि सब मुझे डरपोक या वादा फ़रामोश कह कर बुलाएँ.

तू होश में तो है, नीचे मेरी मम्मी हैं और मैंने तो अन्दर से कुछ पहना भी नहीं है?कहानी जारी रहेगी।आपके विचारों का स्वागत है।. भैया रुक जाओ ना… दुख रहा है!भाई बोला- बस ॠदिमा थोड़ी देर में मज़ा आने लगेगा!और फिर धीरे-धीरे भाई ने अपना पूरा लवड़ा अपनी बहन की छोटी सी चूत में घुसेड़ दिया और सुकून से बोला- बस ॠदिमा पूरा अन्दर है अब देख चुदाई शुरू होगी!भाई ने पहले मेरे निपल्स चूसे फिर धीरे-धीरे अपना लंड खींच कर फिर से धीरे से घुसा दिया…! इस तरह बड़ी ही धीरे-धीरे अपनी प्यारी बहना को चोदने लगे।‘उन्न्ह.

इसीलिए मैंने भी सोच लिया था… कि उनकी सभी इच्छा पूरी करुँगी…नलिनी भाभी- और तेरे अमित भैया की क्या इच्छा थी?सलोनी- क्या भाभी आप भी… मुझ जैसे लड़की को नंगी देखकर एक लड़के की क्या इच्छा हो सकती है… हा हा…नलिनी भाभी- तो तुम दोनों ने सब कुछ कर लिया?सलोनी- ह्म्म्म बताती हूँ ना, रुको तो…और कुछ देर के लिए वहाँ चुप्पी सी छा गई।अब क्या राज खोलने वाली है सलोनी…????कहानी जारी रहेगी।.

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!फिर क्या, शीला बाइक पर बैठ गई। मैंने बाइक चालू की और उसके घर की ओर चल दिया। धीरे-धीरे उसके मम्मे मुझे छूने लगे, मेरा लंड खड़ा होने लगा था, पर पहली बार में हिम्मत नहीं हुई। बस बातें करता रहा। थोड़ी देर में उसका घर आ गया।क्या मस्त घर था, उसने कहा- आओ चाय पी कर जाना।मैंने कहा- नहीं, बाद में. पहले तेरी चूत तो चाट लूँ।मैं जीभ से उसकी चूत के दोनों हिस्सों को चाट कर चोदने लगा, इससे मैं तो उत्तेजित हो ही रहा था, वो भी ‘आह. मैंने नशे में बंद होती आँखों से देखा तो उनकी उंगलियाँ सलोनी की शर्ट के नीचे उसकी चूत के ऊपर थी।अंकल- बेटा ध्यान रखना अपनी इतनी चिकनी सड़क का.

मैं अम्बिका की चूत बड़े जोश से चाट रहा था तो रोशनी बड़ा स्वाद लेकर मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी। हम तीनों मदहोश हो चुके थे.

तुम नहीं जानती, तेरे को बच्चा हो गया तो तुम क्या करेगी?’उसने मुझे एक डर दिखाया जो कि लड़कियों की बहुत बड़ी मजबूरी है।यह बात सुन कर मैं बहुत घबरा गई थी।तब वो बदमाश सान्याल अंकल मेरी पीठ पर हाथ रख कर मुझे दिलासा देने लगे, फिर मेरी चूची धीरे-धीरे दबाने लगे और कह रहे थे- रामदीन ने तुझे चोदा है, यह तो बहुत अच्छा हुआ. और फिर लंड का रस पी गई… मुझे बहुत ही अच्छा लगा… मामी ने मेरा जूस पी लिया… मामी भी झड़ गई थी… उसकी भी चड्डी गीली हो चुकी थी. मैंने चोदते हुए उससे पूछा- मेरा लंड कैसा है?वो बोला- तुम्हारा लंड काफ़ी लम्बा है, मजा आ रहा है, प्लीज़ क्या तुम मेरी गाण्ड रोज़ मार सकती हो?मैंने कहा- हाँ!इतना सुनते ही वो और ज़ोर से गाण्ड उछाल उछाल कर अपनी मरवाने लगा और मेरे चूचों को मसलने लगा.

!फिर क्या था मैं और माया मेरे रूम में आ कर मेरे बेड पर बैठ गए।मैंने उसका हाथ पकड़ कर बोला- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।तो उसने भी वही कहा, मैंने कहा- मैं तुमको चुम्बन कर लूँ. प्रेममेरी इस कहानी के पिछले भाग में आप सभी ने पढ़ा कि भाभी की मस्त चुदाई करने के बाद मैं वहीं उस पर ढेर हो गया। थोड़ी देर हम ऐसे ही एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे। कुछ देर सोने के बाद वो उठी, अपनी पैन्टी पहनी और जैसे ही वो नाईटी पहनने लगी, मैं उठा और उसको पकड़ लिया और कहा- आज तुम सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी ही पहनोगी मेरे लिए. ‘भईयाऽऽऽ! कुछ कुछ होता है!’ हाँफती रीटा अपनी गोरी बांहों का हार राजू के गले में डाल कर मदभरी निगाहों से राजू को ताकती और मदहोशी में सरसराती अवाज़ में बोली.

भाभी जोर-जोर से हंसने लगी- समीर, दिन में तो मैंने अपनी लिप्सटिक से तुम्हारा मुँह लाल किया था लेकिन पूजा ने तो अपने काम रस से तुम्हारा मुँह एक दम से सफेद बना दिया है, शाबाश पूजा…मैं बाथरुम में गया और अपना मुँह अच्छी तरह साबुन से धोया, कुल्ला किया और वापस कमरे में गया.

निशा बेटा आओ…निशा- आँटी, रिया है?मम्मी- ऊपर है अपने कमरे में, जाओ बेटा ऊपर ही चली जाओ।निशा- ठीक है आँटी।निशा आई, तब मैं अपने कमरे में लेटे हुए टीवी देख रही थी और मैंने काले रंग की लैगी और सफ़ेद टॉप पहना हुआ था।मैं- अरे निशा… तुम यहाँ कैसे?निशा- क्यों यार. वो एकदम से तड़प उठी और उसकी चूत से खून आया थोड़ा और वो अपना सर इधर उधर पटकने लगी और थोड़े घूंसे मारने लगी मुझे हटाने को.

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उसके थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने पूरा जोर लगाते हुए उसके मुँह को अपने मुँह से बंद किया और एक तगड़ा झटका मारा और मेरा लंड मेरी वैदेही की चूत की जिल्ली फाड़ कर पूरा उसमें समा गया.

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फिर थोड़ी देर बाद मैं अपने घर आ गई लेकिन दर्द के मारे दो दिन तक कहीं नहीं गई। उसके बाद से तो वो लोग मुझे अक्सर उसके रूम पर बुला कर दिन में भी चोदते हैं।लेकिन वो रात मैं कभी नहीं भूल सकती। आखिर वो था मेरा पहला गैंग-बैंग।यह मेरी पहली कहानी है इसलिए प्लीज इस पर अपने कमेन्ट जरूर करें।[emailprotected]. लो ना।उनके दूध पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और ज़ोर से अपना लंड मुँह में पेल दिया। वो बिल्ली की तरह चपड़-चपड़ चूसने लगीं।मैं- आय हाय मेरी प्यासी रखैल. और उसने भी फोन रख दिया।मैं काफी थक गया था इसलिए जल्दी से घर पहुँचा।वहाँ सलोनी और मधु रसोई में काम करने में व्यस्त थे…कहानी जारी रहेगी !.

!उसने फिर स्माइल दी मैंने उसका नम्बर माँगा जो मुझे मिल गया और मैंने उसे अपना नम्बर दे दिया।एक हफ्ते के बाद उसने मुझे कॉल किया- मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ, आज हमारे घर में कोई नहीं है!मैंने ‘हाँ’ कर दी और मैं ठीक समय पर पहुँच गया।उसने दरवाजा खोला।क्या कयामत लग रही थी. मैंने झट से कहा- नहीं पापाजी, मुझे तो बिल्कुल भूख नहीं है, मेरा पेट तो आप की मलाई और सजा के आनन्द से भर गया है. मानो खा ही जाएगी।फ़िर उसने अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दिया और उसकी और मेरी जीभ आपस में खेलने लगी।हम दोनों ही बड़े मजे ले रहे थे।हम चूसते-चाटते ही बिस्तर की ओर बढ़े और वहाँ जाकर जब हम अलग हुए तो मैंने उसकी मैक्सी निकाल दी.

’ निकल गई।दूसरे झटके में पूरा लंड अन्दर डालकर धकापेल चुदाई करने लगा।वो भी चूतड़ हिला कर मेरा साथ दे रही थी और मुझे अपनी मादक सीत्कारों से उत्तेजित कर रही थी। उसके कंठ से- तेज.

और मैं धीरे धीरे लण्ड ऊपर नीचे करने लगा, उसे भी थोड़ा मज़ा आने लगा। लण्ड अभी पूरा अंदर नहीं गया था इसलिए धीरे धीरे छेद को चौड़ा करने लगा. तुम गुस्सा मत हो!कृपा अब उसे धक्के देने लगा। कुछ देर बाद मैंने गौर किया कि हेमा भी हिल रही है। उसने भी नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।दोनों की साँसें तेज़ होने लगी थीं और फिर कुछ देर बाद कृपा फिर से हाँफते हुए गिर गया, तो हेमा ने फिर पूछा- हो गया?कृपा ने कहा- हाँ. मैंने भाभी के पैरों को अपने कन्धों पर लिया और उनकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा।वो गरम हो कर कहने लगी- अब और मत तड़पाओ.

!वो मेरी बाइक पर आ गईं, तब मैंने देखा कि वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थीं। करीब 30 साल की होंगी। उसके कपड़े में से उसका जिस्म साफ़ दिखाई दे रहा था।मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागृत होने लगी, मैं बाइक चलाते वक्त उसको थोड़ा पीछे को दबाया तो देखा कि वो भी आगे की ओर धक्का दे रही है। मुझे मज़ा आ रहा था।जब उनका घर आया तो वो बोलीं- बस यहीं रोक लो. देख मेरी इस नादान उम्र का लिहाज कर… मुझे खराब मत कर !’यह सब मैं नाटक कर रही थी पर असल में तो मैं लौड़े का पूरा मज़ा लेना चाह रही थी।‘चुप्प रंडी. !”वो मना करने लगी और बोली- मैं तुमसे इस लिए चुदवा रही हूँ, क्यूँकि तुमसे मुझे एक बच्चा मिलेगा और तुम तो अपने मज़े के लिए ये करवा रहे हो.

’ की आवाजें निकल रही थीं।काफी देर तक चली इस चुदाई में मैं झड़ने वाला था जबकि वो दो बार झड़ चुकी थी।मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुँह में पेल दिया और झड़ गया। वो भी मेरे साथ साथ तीसरी बार झड़ गई।उस रात मैंने उसकी तीन बार चुदाई की और सुबह अपने पैसे लेकर चला गया।आपको मेरी यह सच्ची घटना कैसे लगी, ज़रूर बताना।अभी और भी कहानियाँ हैं जो आगे लिखता रहूँगा।आप अपने ईमेल यहाँ भेजें।[emailprotected]. उस दिन घर आकर मैंने दसियों बार ब्रश किया होगा…अब मेरा भाभी से और दानिश से कोई लेना देना नहीं था… महीनों बीत गए दोनों से बात किये हुए।बस घर पर पढ़ाई.

जब वह चुप नहीं हुआ तो मैं उसे पापाजी के कमरे में ले गई और उन्हें देकर उनसे उसे चुप कराने का आग्रह किया. !तो रीना ने मुझसे पूछा- क्या तुमने कभी किसी के साथ किया है?तो मैंने ना बोल दिया, क्योंकि मैंने इससे पहले कभी किसी के साथ चुदाई नहीं की थी।मुझे तो पता ही था कि आज मुझे कुँवारी चूत मिलने वाली है।वो मुझसे पूछती- क्या तुमने ऐसी मूवी पहले कभी देखी है?तो मैंने बता दिया- देखी है तीन चार-बार. दोस्तो, इस तरह चुदाई करते समय लंड पूरी तरह से तो चूत के अन्दर नहीं घुसता, वो सिर्फ़ आधा या आधे से ज्यादा ही घुस पाता है.

!मैं तो बस पागल हो गया था और उसकी चूत में अपना लण्ड तेज़ी से अन्दर-बाहर कर रहा था और बार-बार बस यही कहे जा रहा था- ओह पूजा.

ऋज़ू ने भी बिना सोचे उसके लण्ड को अपने मुख में भर लिया…अब मैंने हिम्मत करके सलोनी की ओर देखा… वो दोनों आदमी अभी भी सलोनी से मस्ती में लगे थे…मैंने ऋज़ू के हाथ से अपना लण्ड छुड़वाया और सलोनी की ओर गया…वाओ… जैसे ही मैंने देखा. अब धीरे-धीरे मैं उसको चूमता हुआ नीचे की तरफ़ बढ़ा और मैंने एक ही झटके में उसका पेटीकोट निकाल कर उससे अलग कर दिया, जैसा मुझे यकीन था उसने काली रंग की जालीदार चड्डी पहनी थी, मैं यह देखकर हैरान था कि उसकी चड्डी पूरी तरह से उसकी चूत के रस में भीगी हुई थी और कमरे की लाल रोशनी में गजब की चमक रही थी. क्यूँ पूछ रहा है? खूब साबुन लगा-लगा कर धोई थी।यह सुनते ही अगले पल में उसकी गाण्ड का स्वाद ले रहा था। उसकी गाण्ड की गुफा को अपनी जीभ से चाट रहा था।वो बोली- लगता नहीं कि यह तेरा पहली बार है.

उसमे उंगली डाल कर उसे फैलाया फिर अपना लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और और धीरे धीरे लंड को उसके चूत में घुसाना चालू कर दिया. !फिर उसने मुझे शाम को मिलने को कहा, और हम फिर मिले और दो बार सम्भोग भी हुआ।फिर इसी तरह 2-4 दिन गुजर गए। एक दिन मैंने अमर से कहा- मैं अकेली हूँ दोपहर में.

’ सिसकारियाँ भरने लगी और जल्दी घुसाने के लिए बोलने लगी। पर मैंने लण्ड रगड़ना चालू रखा।कुछ देर में उस के लण्ड से फिर ढेर सारा पानी निकला, वो एक बार और झड़ गई। फिर मैंने जोर का झटका दिया, तो वो चिल्लाने लगी और मेरा लण्ड बुर में थोड़ा ही ही घुस पाया था।उसकी बुर बहुत टाईट थी जवानी में पहली बार चुद रही थी न इसलिए…. रात को बॉस फिर आ गए और उनके आते ही हम तीनों कमरे में पहुँच गए और कल वाला सेशन फिर चालू हो गया रात भर हम दोनों दीदी को मन लगा कर चोदते रहे. करने दूसरे शहर चला गया। खैर अब मुझे पप्पुओं की क्या कमी थी?यह थी मेरी कहानी !ओह… एक बात तो मैं बताना ही भूल गई। मैंने बी.

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फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या?चाची- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ.

फिर उठ कर देखा तो बिस्तर की चादर खून से गीली थी।हमने उसे हटा कर खुद को भी साफ किया।फिर वो चाय बना कर लाई. कुछ देर बाद भाभी खड़ी हुई और मेरा लंड पकड़ कर मुझे पूजा के पास ले गईं, और पूजा से मेरा लंड चूसने को कहा. ।तो मैंने अपने लण्ड को दबा कर ठीक करते हुए ‘सॉरी’ बोला तो उन्होंने बोला- इस उम्र में सबके साथ ऐसा ही होता है.

मैं उसकी योनि को चूसे जा रहा था कि अचानक उसने अपनी कमर को ऊपर उठा लिया और जोर जोर से आहें भरते हुए मेरे सर को अपनी योनि पर दबा दिया. आ मज़ा आ गया आ…!जूही भी इतने तेज़ झटकों को सह नहीं पाई और उसकी चूत का बाँध भी टूटने लगा। अब दोनों चुदाई को एन्जॉय कर रहे थे।जूही- आआ आआ आ…हह. वीडियो सेक्सी अंग्रेजभाभी ने मेरी पीठ पर एक चांटा मारा- क्यूँ तड़पा रहा है बेचारी को, जल्दी से इसकी चूत की सील तोड़…फिर मैंने लंड को चूत के द्वार पर रखा और झटके से लंड को अंदर करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा, पूजा की चूत भाभी के थूक से बहुत चिकनी हो चुकी थी इस कारण मेरा लंड फिसल गया.

पहले दस दिन तक तो वह उस एक घंटे में वह मुझ से बहुत ही संकोच से बात करती थी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता उसका संकोच दूर हो गया और वह मुझ से खुल कर बात करने लगी. यह देख कर रीटा की ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे रह गई- साला! मां का लौड़ा! लड़की चौद! चूतीया मेरी चूत देख रहा है? और वो भी मूतते हुए?शर्म और गुस्से से लाल, पैर पटकती राजू को बिना बताये घर वापिस आ गई.

तब भाई साब ने कहा- अमिता अकेली है और बच्चे भी नाना के यहाँ गए हैं एक महीने के लिये, तुम शाम को एक फ़ोन कर लेना घर पर या फ़िर घर जाकर आना।मैंने कहा- जी ठीक है!और मैं वहीं से ऑफ़िस चला गया।शाम को लौटने में देर हो गई, करीब सात बज चुके थे, अचानक सेल पर मेरी बीवी का फ़ोन आया- अरे भाभी का फ़ोन नहीं लग रहा. सिर्फ़ एक बार…फिर मैम ने अपना पल्लू हटाया और आँखें बंद कर लीं।मैम- जल्दी करियो…मैंने अपना हाथ मैम के मम्मों की तरफ बढ़ाया और उनके मम्मों को दबाने लगा।वो बहुत ही मुलायम थे और इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।मेरा मन बहुत उत्तेजित होने लगा और लंड फिर कड़ा होने लगा।मैम भी अब सिसकियाँ ले रही थीं- आहह. !!रणबीर- झूट मत बोल, मुझे चुतिया समझ रहा है? मैंने देखा कि उसकी फ्राक पीछे से पूरी खुली थी, उसकी चड्डी यहाँ क्या कर रही थी.

दुबे और मामा ने एक साथ मिलकर नेहा से कैसे मजे लिये। इस कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया मेरे ई-मेल आईडी[emailprotected]पर भेज सकते हैं।प्रकाशित : 15 अप्रैल 2013. क्या बात है आज तो तुम्हें हमारी याद आ गई, ऐसा क्या हो गया?तो मैंने कहा- पहले दरवाजा बंद कर लो।फिर मैंने उसे सारी बात बताई।उस पर वो हँसने लगी।मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी यहाँ लगी पड़ी है और ये साली हँस रही है।मैं रोने लगी. अरे नहीं यार मेरी शादी पक्की हो गई है।रणजीत- क्या बात है… वाह यार मुबारक हो।सीमा- इसी सिलसिले में मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ। रविवार को घर जा रही हूँ पापा ने बुलाया है, वहीं लड़के वाले भी मुझे देख लेंगे।रणजीत- तो ठीक है… एक घंटे में मेरी ड्यूटी ऑफ हो जाएगी। तुम वहीं आ जाना जहाँ हम मिले थे।सीमा के शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी हो गई थी और एक हल्की सी शरम उसके गालों पर दिख रही थी।वो बोली- ठीक है.

मगर बाबा से दोबारा मिलने का वादा करके वो आई थी।बाबा की मालिश से उसका दिमाग़ भी ठीक हो गया था और पढ़ाई में भी उसका ध्यान लग गया।बस दोस्तो, यही थी रीना की चुदाई की हवस कहानी, मैंने इसमें कोई मिलावट नहीं की है, बस सेक्सी शब्दों का इस्तेमाल किया है।यह कहानी लिखने का मकसद यह था कि चलो ये तो चुपचाप में काम निपट गया अगर कहीं रीना को कुछ हो जाता तो जनता शोर मचा देती, बाबा जेल के अन्दर होते।ना ना.

पर तुम्हारे पास तो कंडोम भी नहीं है।मैं- यार पति-पत्नी में कंडोम की क्या ज़रूरत है और मुझे एड्स नहीं है।मेघा- वो बात नहीं है, फिर भी हमें सुरक्षित रहना ही होगा।मैं- यार. लेकिन अभी तक तुमने मुझे बताया नहीं कि तुम मुझसे किस टाइप का कन्फेशन सुनना चाहते हो?मैं अपनी फ़ेसबुक पेज पर तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ.

ज़िंदगी में पहली बार मैं किसी और का वीर्य अपनी जान के चूत में जाते देखने वाला था…मगर थैंक गॉड… उसने आखरी समय में अपना लण्ड सलोनी की चूत से बाहर निकाल लिया… भक की तेज आवाज आई…और उसने शायद हमको देख लिया था… वो उठकर हमारी ओर को आया…मैंने उसके लण्ड को देखा. !वो पूरा दानव लग रहा था, अंडरवियर हटते ही उसका लंड जो करीब एक बिसलरी की बॉटल जितना लंबा और उतना ही मोटा होगा, बिल्कुल तना हुआ बाहर आ गया।मधु उससे हाथों से सहला रही थी, उसके बाद मधु ने उसे अपने साड़ी से साफ किया और मुँह में लेकर चूसने लगी।नारायण अब मधु के बालों को सहला रहा था और उसके मुँह से ‘आ. लो ना।उनके दूध पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और ज़ोर से अपना लंड मुँह में पेल दिया। वो बिल्ली की तरह चपड़-चपड़ चूसने लगीं।मैं- आय हाय मेरी प्यासी रखैल.

भाभी नंगी ही मुझसे दूर भागीं।अब तो मैं भी पागल हो गया था, मैंने भी कपडे उतार दिए और भाभी को देखने गया, भाभी ने दूसरे कमरे में चादर लेकर ओढ़ ली थी।भाभी- अजय रहने दो. !’भाभी की चूत में से थोड़ा सा खून भी निकल आया। अब मैं धीरे-धीरे लंड को थोड़ा सा अन्दर-बाहर करने लगा। भाभी का दर्द कम हो गया था और वो भी चूतड़ों को पीछे की ओर उचका कर लंड को अन्दर ले रही थीं।अब मैंने भी लंड को सुपारे तक बाहर निकाल कर जड़ तक अन्दर पेलना शुरू कर दिया। भाभी की चूत इतनी गीली थी कि उसमें से ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी।‘तू तो उस साण्ड की तरह चढ़ कर चोद रहा है रे. उसकी चूत नमकीन पानी छोड़ रही थी और मैं पी रहा था। मैंने पहली बार ऐसी नमकीन चूत देखी थी।फिर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा, एक ही शॉट में पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में उतार दिया। शायद पहले भी कई बार चुदी हुई थी।फिर भी मैंने तो ज़ोर-ज़ोर से चोदना जारी रखा। वो अपने मुँह से बोल रही थी- चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो… आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दो.

बीएफ फोटो चोदा चोदी लेकिन मुझे पास जरूर करवा देना !सर की पत्नी घर पर नहीं थी।सर- मेरे पास आओ !मैं सर के पास चली गई।सर– गोपी, मुझे खुश करना शुरू करो…मैं तो पास होने के लिए कुछ भी कर सकती थी इसलिए मैंने सबसे पहले सर के सामने अपने मम्मों को दबाया. फिर मैं उसकी छत की तरफ को चल पड़ा और जहाँ उस दिन मेरा मामा खड़ा हुआ बातें चोद रहा था, वहीं जाकर खड़ा हो गया.

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उसके थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने पूरा जोर लगाते हुए उसके मुँह को अपने मुँह से बंद किया और एक तगड़ा झटका मारा और मेरा लंड मेरी वैदेही की चूत की जिल्ली फाड़ कर पूरा उसमें समा गया. रीटा बड़े ही भोलेपन से बोली- पता है, अब मम्मी मुझे स्कर्ट के नीचे पेंटी ना पहनने पर डांटती है और कहती हैं कि अब मैं बड़ी हो गई हूँ. इसको चूसेगी? सुना है बहुत मजा आता है?अनु ने कहा- किसने कहा?मोनिका- दीदी ने!मैंने कहा- तुम्हारी दीदी तुम्हें ये सब बातें बताती है?मोनिका ने मेरे लंड को मुँह में लिया और थोड़ा चूसते हुए कहा- और नहीं तो क्या? वो मुझे अपनी चुदाई की सब बातें बताती है.

!मैंने कहा- नहीं सब ठीक है। बस कॉलेज से वापिस आने के बाद समय पास नहीं होता है, बोरियत होती है!तो वो बोले- ऊपर आ जाया करो. ठीक है, तुम इन सभी को ले जाओ और इसे छोड़ दो।’ रणजीत ने अपने असिस्टेंट को कहा।सभी लोग चले गए अब सिर्फ़ रणजीत और वो लड़की ही रह गए।रणजीत- तुम्हारा नाम क्या है?लड़की- सीमा।रणजीत- क्या करती हो?सीमा- मैं स्टूडेंट हूँ और पास ही एक हॉस्टल में रहती हूँ।रणजीत- कहाँ की रहने वाली हो?सीमा- जी. मारवाड़ीसकसप्रेषक : रॉकीहेल्लो दोस्तो, मेरा नाम रॉकी है। मैंने अन्तर्वासना पर हजारों कहानियाँ पढ़ी हैं। यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है।मैं वड़ोदरा (गुजरात) के सरकारी विभाग में एक अच्छे पद नौकरी करता हूँ। मैं छः फुट लम्बा और कसरती बदन का मालिक हूँ। मैं सिख परिवार से हूँ तो लड़कियाँ मुझे देखते ही फ़िदा हो जाती हैं। एक बार मेरा लैंड लाइन बी.

शाम हो गई मगर बारिश नहीं रुकी। ऑफिस से छुट्टी होने के बाद सबकी तरह मैं भी अपनी बाइक लेकर घर जाने लगा कि अर्चना मेरे पास आई.

मैं मज़े ले रहा था। मैं उसे मम्मे दबाता रहा। मैंने भी ज्यादा देर करना सही नहीं समझा और उसकी चूत पर लंड रखा एक हल्का सा झटका दिया।थोड़ा ही घुसा आआआईईईई” उसके मुँह से चीख निकल गई।मैंने हल्का पीछे होकर और एक जोर से धक्का मारा।” आआआआअईईईईई…. उसने भी मुझे मुस्कुराते हुए देखा और मेरी योनि को फिर से चूमा और मुझे उल्टा लिटा दिया, फिर मेरे कूल्हों को प्यार करने लगे.

आह… आह… आह… की सिसकारियाँ निकाल रही थी और मुझसे बार बार लंड को उसकी चूत के अन्दर डालने के लिये आग्रह कर रही थी. पर उसका कोई प्रेमी न होने की वजह से वो ये सब नहीं कर पाती।अब वो मुझसे भी पूछ रही थी कि क्या मैंने कभी सेक्स किया है?मैंने भी उसे ‘ना’ कर दिया। उस दिन तो हम ज्यादा कुछ बात नहीं कर पाए, पर इतना तो पक्का था कि अब वो भी मचलने लगी थी।इसी बीच चार-पाँच दिन बीत गए फ़िर एक दिन उसका मुझे फ़ोन आया।वो आज कुछ उदास लग रही थी, तो मैंने उससे पूछा।मैं- क्या हुआ. साली।’मैं भी उनकी बातों से गर्म होकर उनके धक्कों का साथ देते हुए अपनी गाण्ड को ऊपर उठाए जा रही थी।फिर ‘रत्ना.

मैं कहाँ शरमा रहा हूँ।मैंने इधर-उधर नजरें दौड़ाई, दूर कुछ लोग थे, पर वो हमारी तरफ नहीं देख रहे थे।मैं अपनी बात साबित करने के लिए उसके गालों को चूमने के लिए बढ़ा लेकिन वो मुझसे दूर हो गई।‘देखा.

’ की आवाज मेरे मुख से अनायास ही निकलने लगी।वो मेरी पीठ सहलाने लगी।मुझे बहुत बुरा लगा कि मैं इतनी जल्दी कैसे झड़ गया, मैं उदास होकर उसकी बगल में लेट गया।कहानी जारी रहेगी।. मैं भी बोर हो रही हूँ!वो आई मेरे घर में, आकर मेरे पास बात गईं, बोलीं- मैं तो अकेली पड़ गई हूँ, तू भी होली के मुझसे बाद बात नहीं करता।मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है!फिर बोलीं- तेरा तो समय पास हो जाता होगा।मैंने बोला- कहाँ यार. सोनिया समझ गई थी कि मैं अपनी नंगी चूत उन लड़कों से छुपाने कि कोशिश कर रही हूँ, उसने पास में ही पड़ा एक धार वाला चाकू उठा कर मेरी नंगी चूत में चुभाया और बोली- साली रंडी, अगर तूने अभी के अभी अपनी टाँगें नहीं खोली तो मैं यह चाकू तेरी चिकनी नंगी चूत में डालकर तेरी खूबसूरत चूत चीर डालूंगी!मैंने शर्मसार होते हुए अपनी दोनों टाँगे चौड़ी करके खोल दी और अपनी नंगी चूत सबको दिखा दी.

फैजाबाद सेक्सी वीडियोपूजा यह देखकर हँस रही थी और अपनी चूत में उंगली डालकर आगे-पीछे कर रही थी।मैं बिना रुके लगातार झटके मारे जा रहा था। धीरे-धीरे भाभी का चिल्लाना सीत्कारों में बदलने लगा और गाण्ड खुद आगे पीछे करने लगी। मैंने लण्ड गाण्ड से निकाला और चूत में ठोक दिया।लण्ड थोड़ा जोर लगाने से अन्दर चला गया। भाभी फिर चिल्लाने लगी- मार डालोगे क्या… आ… आ…अ. क्या फीलिंग थी!’उसके बाद उसने मेरा नीचे वाला होंठ अपने होंठों में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। उसका ऊपर वाला होंठ मैंने अपने होंठों में ले लिया। फिर उसने मेरा होंठ चूसते-चूसते अपनी जीभ मेरे होंठ पर फेरी।बाय गॉड.

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’उसने अपना लौड़ा खोल दिया।मेरी माँ खिलखिला कर हंसती हुई काउंटर पर पहुँची- ओए… चार रॉयल स्टैग की बोतल दे. ”विनायक ने चूत चूसते चूसते अपने हाथों से मेरी चून्चियां दबानी शुरू कर दी, मैं भी कमर उठा कर अपनी चूत को उसके मुँह के अंदर धकेलने लगी और अपने हाथों से उसका सर अपनी चूत पर दबाने लगी. बहादुर ने भी अपने कपड़े उतारे तो पारो ने बहादुर के अजूबा लण्ड को देख खुशी से चिल्ला सी पड़ी- आईऽऽऽऽ बाप रे बाप हायऽऽऽ राजा लगता है कि आज मेरी छोटी पारो के चिथड़े होंगें!पारो भी खूब गीली और बैड कबड्डी खेलने को बथेरी उतावली थी.

मेरा नाम श्लोक है, मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। मैं एक कॉल बॉय हूँ, मुझे सेक्स बहुत पसंद है, मैं बहुत गंदा सेक्स करता हूँ…लड़की को देख कर ही मुझे क्या नशा हो जाता है, मेरा हर तरह की लड़कियों से पाला पड़ा है।किसी को 8 इंच का लण्ड चाहिए तो किसी को 10 इंच का. समस्या यह थी कि इन दोनों के साथ जाने वाला कोई था ही नहीं क्योंकि मेरे साले की अभी अभी नौकरी लगी थी और वो दिल्ली में था. मैंने पैन्टी को सूंघा, बहुत मस्त अहसास था, मैंने अपना लोवर आधा नीचे किया और लण्ड को मुठियाने लगा।मेरा मन इतना मस्त हो गया कि मुझे याद ही नहीं रहा कि मैं कहाँ हूँ।तभी मेरा पानी निकल गया, मैंने पैन्टी को देखा, वो मेरे रस से भीग गई थी। मैं पैन्टी को रख कर पीछे मुड़ा तो देखा कि भाभी बाथरूम निकल कर दरवाजे पर खड़ी थीं।मेरे होश उड़ गए.

मैंने कहा- ठीक है!और बाथरूम मैं भी साथ चला गया, मैंने कहा- भाभी, आप खड़ी होकर मूतो! मैं देखना चाहता हूँ. ! अब मैं तुम्हें कॉल करूँगी तो आओगे न?मैंने ‘हाँ’ बोला और मैंने रिया की चुदाई के बाद और दो औरतों को जो रिया की ही सहेलियाँ थीं, उनको चोदा!यह थी मेरी सच्ची कहानी आप मुझे जरूर ईमेल कीजिए।[emailprotected]. बोल कर, गीता को ‘बाय’ किया। गीता की बस चल दी और मैं अपने घर आ गया और फिर रात में हमने बहुत बातें की।दूसरे दिन मैं कैसे गीता को चोदा और फिर उसकी स्कूल की अकाउंट डिपार्टमेंट की मेमों को चोदा, यह मैं आपको अवश्य ही लिखूँगा।मुझे अपने विचार और संपर्क के लिये नीचे दिए मेल पर संपर्क करें।आपका प्रेम प्रकाश[emailprotected].

मैं छोटे और लंबे-लंबे धक्कों का मजा लेने लगा।जब लंड चूत से बाहर आता तो उस तंग चूत की अंदरूनी गुलाबी दीवार भी लंड के साथ चिपक कर रगड़ खाती हुई बाहर खिंच जाती और जब लंड अन्दर घुसता चला जाता तब. दीदी फिर बड़े कामुक अंदाज में इठला कर बोली- आप मुझे प्यार नहीं करते, बस जब ठरक होती है तो चोदने आ जाते हो…वो बोला- नहीं मेरी जान, तुम मेरी जान हो, ऐसा मत सोचो.

बस वैसे ही थोड़ा सा उदास सा हो गई थी।मैंने पूछा- अगर आप मुझे अपना दोस्त मानती हो तो मुझे अपनी उदासी का कारण बता सकती हो।तो उन्होंने कहा- हाँ लव.

मैं ज़रूर बुरा आदमी हूँ पर मेरी बेटी ऐसी नहीं है। वो तो बहुत अच्छी लड़की है, पर भगवान ने उसकीमाँग सूनी कर दी है। मुझे उसके बहुत चिंता रहती है।सीमा- वो तो है ही. ఎక్స్ వీడియోస్ ఎక్స్अपने हाथो में पानी लीजिए औए इसे बूंद बूंद करके गिराइए- टिप टिप टिप !बॉस- इससे क्या होगा?संता- टिप टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई !इस आग से सिगरेट जला लीजिए !संता- आगे सुनिए!आप एक सिगरेट की तारीफ करनी शुरू कर दीजिए. भोजपुरी देसी सेक्समैंने अपनी नंगी गोरी व चिकनी जांघें सबको दिखाते हुए जींस घुटनों से नीचे खींची और टांगों से निकाल कर फर्श पर कुछ दूरी पर फैंक दी. भूले तो नहीं ना मुझे?तो लगी शर्तजीजा मेरे पीछे पड़ागर्मी का इलाजऔरडॉक्टर संग मस्तीआया कुछ याद?हाँ जी आपकी वही शालिनी भाभी जयपुर वाली.

कुछ देर तक चूचियों को अदल-बदल कर चूसता रहा और फिर नाभि और पेट पर चुम्बन करता हुआ नीचे पहुँच गया और पेंटी की नीचे सरका दिया.

मैं- अरे छोड़ो यार ये तो अब… मैंने कहा था ना… चलो गाड़ी में ही बदल लेना…सलोनी- अरे गाड़ी में कैसे… क्या हो गया है आपको जानू?? सब देखेंगे नहीं क्या. ठीक है माँ, कल चलेंगे !राधा- अच्छा अब सो जा, रात बहुत हो गई है !कहानी जारी रहेगी।आपकी राय से अवगत कराने के लिए मुझे मेल अवश्य कीजिएगा।[emailprotected]. !मैंने अपना चोदन थोड़ा रोका और भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसा। भाभी कुछ ही क्षणों में अपना दर्द भूल कर अपने चूतड़ उठाने लगीं।‘आ…आहह.

उसकी साँसें और शरीर में बैचेनी सी होने लग रही थी मानो जैसे तड़फ रही हो।मैं कंधे से उसके वक्ष पर आ गया, उसके चूचों को मसलने लगा तो वो छटपटाने लगी। मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लिया तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी और हम दोनों की मादक तेज़ चलती साँसों से कमरे में उफ़ान आ रहा था. भी अब मेरे साथ?’‘नहीं थोड़ा आराम से चाटूँगा, पर अगर तू बोलेगी तो तुझे चोद भी दूँगा, पर अभी तो सिर्फ़ तेरी चूत का पानी पीना है… और वो भी आराम से मज़े ले-ले कर. एस भी करने लगे।कुछ महीने ऐसे ही चलता रहा और हफ्ते में हम एक दो बार मिल लिया करते थे।कभी कभी मैं उसको गंदे एस.

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तब मैं बोला- दीदी कल रात को घर में हमारे अलावा और कौन था?तो दीदी एकदम खामोश हो गई और कुछ संभालते हुए बोली- कोई भी तो नहीं. मैं अपनी बाईक पर था और घर से कुछ जल्दी निकला था, तो मेरे पास समय काफ़ी था, मैं आराम से सड़क के किनारे से अपनी ही धुन में चला जा रहा था. मैंने सोचा ऐ सी के कारण हॉल ठण्डा है फ़िर भी पसीना? मैं समझ गया कि जो मेरे दिल में है वो उसके दिल में भी चल रहा है.

कुछ देर तक तो सब ठीकठाक रहा, उसके बाद हम दोनों खुद को एक दूसरे से बेहतर और बड़ी खिलाड़िन जताने की कोशिश करने लगी.

दोनों ने एक साथ मिलकर उसे चाटना चूसना शुरू किया, मेरा लंड थोड़ी देर में वापस खड़ा हो गया और चुदाई के लिए तैयार हो गया। मैंने कहा- अम्बिका तुम नीचे लेटो और रोशनी को अपने ऊपर लिटा लो.

सिर्फ़ एक बार…फिर मैम ने अपना पल्लू हटाया और आँखें बंद कर लीं।मैम- जल्दी करियो…मैंने अपना हाथ मैम के मम्मों की तरफ बढ़ाया और उनके मम्मों को दबाने लगा।वो बहुत ही मुलायम थे और इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।मेरा मन बहुत उत्तेजित होने लगा और लंड फिर कड़ा होने लगा।मैम भी अब सिसकियाँ ले रही थीं- आहह. आज तुम मुझे औरत होने का सुख दे दो। मैं तुम्हारी जिन्दगी बदल कर रख दूँगी।मैंने बोला- मैडम आप जैसा चाहें. एक लड़की का नंबर चाहिएमुझे बैड पर लेटाने के बाद आदिल मेरे बेड पर बैठ गया, आहिस्ता आहिस्ता वो नजदीक आने लगा, मैं पीछे खिसकने लगी.

अबकी बार वो अपनी पूरी शर्म हया भूल कर यह सब कुछ कर रही थी, मैं उसको इस तरह देख रहा था जैसे कोई ब्ल्यू फ़िल्म देख रहा हो. ???? इंस्पेक्टर की पूरी हथेली सलोनी की चूत पर थी, उसने सलोनी की चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया।सलोनी- अह्ह्हाआआआ मत करो…इंस्पेक्टर- सच वे… बहुत चिकनी है …हवलदार- साब अंदर से भी चेक करो ना. आधा लौड़ा गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया, जूही बस गूं गूं अईयू” करती रही, मुँह में जो लौड़ा फँसा हुआ था। साहिल ने देर ना करते हुए लौड़ा पीछे खींचा और दोबारा पूरी ताक़त से लौड़ा अन्दर डाला। अबकी बार पूरा 8″ का लौड़ा गाण्ड की गहराइयों में खों गया। जूही को इतना दर्द हुआ, अगर लौड़ा मुँह में नहीं होता, तो उसकी चीखों से पूरा फार्म गूँज जाता।रेहान- उईईई साली काटती क्यों है, आ.

जब यहाँ मेरे सामने ही उन्होंने उसकी स्कर्ट उठा उसको नंगा कर दिया था और उसके चूतड़ और चूत सब छू रहे थे. देसी रोमियो हरमनमैं दो मिनट तक भाभी के ऊपर ही लेटा रहा और भाभी से पूछा- आपकी चूत दो बच्चों की माँ होते हुए भी इतनी टाइट क्यों है.

तेरी जीभ ने बहुत मस्त किया है मेरी गांड को… अब चोद डाल !”मैंने चचाजी की गांड में और मक्खन लगाया और फ़िर अपना लंड डाल दिया। लंड का सुपारा जाते ही चचाजी- हाँ इमरान… डाल बेटे… पूरा डाल दे !” करने लगे।चचाजी का गांड मस्त टाइट थी, शायद सच में पहली बार मरा रहे थे। पर मूड में थे इसलिये अपनी गांड ढीली कर करके उन्होंने पूरा ले लिया।आ जा बेटे, चढ़ जा मुझ पे,.

फ़िर वो मेरा हाथ पकड़ कर ले गई, बैड पर बैठाया और मेरे पास बैठ कर केक काट कर उसका एक टुकड़ा उठा कर मुझे खिलाने लगी, मैंने उस टुकड़े में से आधा खाया और आधा उसके हाथ से अपने हाथ में ले लिया और उसके मुहँ की तरफ़ बढ़ाया. क्या कह रहे हो?रणजीत- हाँ 11 को… मैं 18 वर्ष की उम्र से ही चोद रहा हूँ, सबसे पहले मैंने अपनी मौसी को चोदा. !मन करता था कि बस उसके दूध पकड़ कर चूस ही लूँ और सारे दूध मुँह में लेकर खा जाऊँ। अपना लन्ड उसके मुँह में दे दूँ, पर मन मार कर रह जाता था। उसकी टांगें भरी-भरी थी, जांघें.

फुल सेक्स वीडियो फुल एचडी तुम गुस्सा मत हो!कृपा अब उसे धक्के देने लगा। कुछ देर बाद मैंने गौर किया कि हेमा भी हिल रही है। उसने भी नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।दोनों की साँसें तेज़ होने लगी थीं और फिर कुछ देर बाद कृपा फिर से हाँफते हुए गिर गया, तो हेमा ने फिर पूछा- हो गया?कृपा ने कहा- हाँ. आभार तुम्हारा (धन्यवाद) मेरी पलक !’ मैंने ‘मेरी पलक’ जानबूझ कर कहा था।अगले 3-4 दिन ना तो उसका कोई मेल आया ना ही उसने फोन पर संपर्क हो पाया। मैं तो उससे मिलने को इतना उतावला हो गया था कि बस अभी उड़ कर उसके पास पहुँच जाऊँ।फिर जब उसका फोन आया तो मैंने उलाहना देते हुए पूछा,’तुमने पिछले 3-4 दिनों में ना कोई मेल किया और ना ही फ़ोन पर बात की?’‘वो… वो.

थोड़ी देर उसके होंठ पीने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, उसने भी स्वागत में अपने जीभ को मेरे जीभ से लगा दिया और हम एक दूसरे को और जोश से चूमने लगे।हमें अपने चूमने के आवेश का पता तब चला जब हमने अपने मुँह में रक्त का सा स्वाद महसूस किया. अभी तैयारी कर रही हूँ। बहुत काम है, अभी बात नहीं कर पाऊँगी।अताउल्ला- तो चलो, अब्बू जी से ही बात करा दो।मैंने कहा- ठीक है. उउह’ कर रही थीं जिससे पता चल रहा था कि उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है और बीच-बीच में बोल भी रही थीं- और तेज करो.

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तभी भाभी से नहीं रहा गया और खुद मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और अपने चूत के दाने पर रगड़ने लगी… मैं तो बेकाबू होने लगा, वहीं दीवार पर उनकी पीठ टिका दी और उनके पैर खुद ही फ़ैल गए लंड को रास्ता देने के लिये…ऊउफ़्फ़ कितना पानी निकाल रही थी भाभी. ! मैं कई दिन की प्यासी हूँ यह मादरचोद अफजल तो शीघ्रपतन का रोगी है! दो मिनट में ही झड़ जाता है!फिर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा, पर वो अन्दर नहीं जा रहा था। मैंने थोड़ा सा थूक लगाया और जैसे ही धक्का मारा वो चिल्लाई- आईईईईई मर गई… प्लीज़ धीरे से करो. !मैंने गौर किया तो मुझे हल्का सा दिखा कि हेमा का हाथ उसके टांगों के बीच में है, तो मुझे समझ में आया कि वो कृपा का लिंग पकड़ कर उसे अपनी योनि में घुसाने की कोशिश कर रही है।फिर हेमा की आवाज आई- तुम बस सीधे रहो.

वो एक नई दुल्हन की तरह बैड पर बैठ गई, उसने अन्दर काला ब्लाऊज और काला पेटीकोट पहना हुआ था जिसमें उसका गोरा बदन कोयले की खान में हीरे की तरह चमक रहा था. !उसकी चूत को सहलाने लगा और सोनिया मस्ती में भर गई।फिर मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत पर रखा और जोर से धक्का मारा, तो वो चिल्लाई- उई माँ.

लेकिन यह बताओ तुम्हें डर नहीं लगा कि अगर मैं तुम्हें थप्पड़ मार देती तो?मैंने कहा- मैं जानता था कि तुम ऐसा नहीं करोगी, क्योंकि जब मुझे अच्छा लग रहा था तो तुम्हें भी लग रहा होगा.

बहादुर ने चंचल पारो के चूतड़ों को सहला कर मसल कर पूछा- उलटी सीधी बातों से क्या मतलब?पारो अपने पाईनएप्प्लों से चुच्चे को बहादुर के सीने में जोर से गाड़ती, आँखों में आँखो डाल कर अर्थपूर्ण स्वर में बोली- मर्द औरत के बारे में तो सुना था, पर एक औरत औरत की कैसे ले सकती है?बहादुर समझ गया कि कमरे में क्या हो रहा है. तो यहाँ क्या करोगे?वो बातें कर रही थी और मैं कमीना उनके वक्ष पर नज़र गड़ाए बैठा था !मैंने कहा- बस किसी कॉलेज मैं कुछ लेक्चरर बनने की सोच रहा हूँ. पर क्या हम लोग ऐसे ही एक-दूसरे के नाम पर ऊँगली करते और मूठ मारते रहेगे?उसने बस एक ‘स्माइली’ के साथ रिप्लाई दी।फिर मैं भी मूठ मार कर हॉल में वापस आ कर सीट पर बैठ गया और चुपके से एक चुम्मी उसके गाल पर कर दी।अब पूजा पट चुकी थी और मुझसे चुदने को राजी थी।आगे के कहानी फ़िर कभी.

हम औरतों के भी कुछ अरमान होते हैं, शारीरिक ज़रूरतें होती हैं!मैंने उसके होंठों को चूम लिया।वो एकदम से पीछे हटी और कहने लगी- यह क्या कर रहे हो. जो तुम्हारे बगल में सब कुछ हुआ?मैं अनजान बनती हुई बोली- क्या हुआ?उसने कहा- तुम्हें सच में पता नहीं या अनजान बन रही हो?मैंने कहा- मुझे कुछ नहीं पता, मैं सोई हुई थी।उसने कहा- ठीक है, चलो नहीं पता तो कोई बात नहीं. जब मेरी सांस रुकने लगी तो मैंने पूजा की चूत के दाने को दांतों से काट लिया, तब जाकर पूजा ने मुझे अपने चुंगल से आज़ाद किया, तब मुझे एक जवान लड़की की ताकत का अंदाज़ा हुआ.

मैं भी सीमा को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा।फ़िर वो बाथरूम में चली गई, शायद वो अपनी चूत साफ़ कर रही थी।जब वो लौट कर आई तो मैंने पूछा- जान, सब ठीक तो है ना?सीमा- हाँ.

बीएफ फोटो चोदा चोदी: सॉरी आप हैं कौन ?”हाय ! क्या अदा है ? तुम क्यों पहचानोगे तुम्हें तो उस मैना के सिवा कुछ दिखाई ही नहीं देता। पता नहीं ऐसा क्या है उसमें जो उसके मिट्ठू ही बने रहते हो !”ओह… न … नीरू ? … ओह… सॉरी मैंने पहचाना नहीं था… कैसी हो ?”ओह… यह तो नीरू थी। आपको ‘अभी ना जाओ छोड़ कर…. और मैं धीरे धीरे लण्ड ऊपर नीचे करने लगा, उसे भी थोड़ा मज़ा आने लगा। लण्ड अभी पूरा अंदर नहीं गया था इसलिए धीरे धीरे छेद को चौड़ा करने लगा.

सब देख रहे हैं।फिर मैं राजीव को बोल कर जाने लगा तो मयंक बोला- सुशान्त, तुम दीदी को भी घर छोड़ दोगे, मुझे यहाँ कुछ काम है, मैं कल जाऊँगा।मैं बोला- कोई बात नहीं मैं छोड़ दूँगा।मैं बाहर निकल कर मन में बोला- हम तो चाहते ही यही थे।हम दोनों मयंक की कार में आकर बैठ गए।मैं उसको अपने घर ले आया और आते ही हम एक-दूसरे से लिपट गए।अब उसकी मीठी आवाज निकली- चलो, कमरे में चलते हैं।आहा. !मैंने कहा- आज घर में कोई नहीं है, आज मैं ‘वो’ सब कुछ करूँगा।मैं उसे खींच कर उसे कमरे में ले गया और झट से अपनी पैन्ट उतार कर, उससे भी कपड़े उतारने को कहा।तो वो शरमाने लगी, बोली- मुझे शर्म लग रही है।मैंने उसे समझाया- मेरी छम्मकछल्लो… आज मैं तुम्हें ऐसा मजा दूँगा कि तुम रोज ही मेरे पास आया करोगी।वह बोली- कहीं कुछ हो गया तो. क्या बला की खूबसूरत लग रही थी वो!उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, उसी रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी.

क्यूँ तड़पती रहती है !रीना- चल हट… ये आज कल के लड़कों में कहाँ दम है ! मैं तो अपनी बुर का मुहूर्त किसी तगड़े लौड़े से करवाउंगी, जिस दिन वो मेरे सामने आएगा मैं अपने आप उसको पकड़ लूँगी !गीता- यार अब तगड़ा लौड़ा कहाँ से आएगा और तूने कौन सा लड़कों का देखा है, जो तुझे बड़ा पता है कि उनका तगड़ा नहीं है !रीना- हा हा हा एक बात बताऊँ.

बात तब की है जब दो साल पहले में अपनी कॉलेज के अंतिम साल में था तब वो मुझे एक सेमिनार में मिली थी, उसकी छोटी छोटी आँखों ने मुझमें उसके प्रति प्यार जगाया. उधर मास्टर ने लड़की को पेट के बल सोफे पर लिटा दिया और उसकी गांड को जोर-जोर से मसलने लगा और कभी उसकी गांड के गोल-गोल उभारों को चाटता तो कभी मुँह में लेने की कोशिश करता जैसे कि उन्हें खा ही जाएगा. क्या मस्त चूचियाँ हैं… मेरी बीवी की इनके सामने कुछ भी नहीं…‘आओ!’‘भाभी, आपका फ़ोन बंद है क्या?’‘मालूम नहीं, वैसे बहुत देर से किसी का फ़ोन आया नहीं!’मैं फ़ोन का रीसिवर उठाया.