बीएफ सेक्स मुस्लिम

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बीएफ फिल्म बिहार की: बीएफ सेक्स मुस्लिम, मूल रूप से मैं राजस्थान के बीकानेर में एक छोटे से गाँव की रहने वाली हूँ.

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अपने साथ क्यूँ चिपका रखा है?मैंने कहा है सर … पर वो कह रही है कि मेरे साथ ही जाएगी … अब बाकी बच्चे भी जा चुके हैं … मैं उसको फिर से बोल कर देखती हूँ. जापान की लड़कीअपनी प्रसंसा सुनकर वो एक तरफ तो खुश हुई, मगर उसके मन में कोई और भी बात थी, जो मुझे नहीं बता रही थी.

जब वो गाड़ी रख कर वापस आई, तो हम दोनों लिफ्ट से उसके फ्लैट में चले गए. मां बेटे की ब्लू पिक्चर हिंदी मेंजैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पे लगाए, उसने एक आह भरी और मुझे और जोर से पकड़ लिया.

ये सुनकर उनके मुँह से बेसाख्ता निकल पड़ा- ओह्ह माय गॉड … ये तो चुत का भुर्ता बना देगा?’उनके चेहरे पर थोड़ी परेशानी सी दिखी, तो मैंने कहा- क्या हुआ, ये तो अपनी जगह खुद बना लेता है और मज़ा भी बहुत देता है … और फिर इतना बड़ा साइज़ कहां किसी के नसीब में होता है.बीएफ सेक्स मुस्लिम: वह बोली- अगर देख लिया हो तो मुझे भी दिखा दो कि लड़के नंगे होने के बाद कैसे लगते हैं! तुम भी अपने कपड़े उतार दो न यार, मैं भी तुमको नंगा देखना चाहती हूँ।मैंने कहा- तुम ही उतार दो अगर ऐसी बात है तो.

शोभन- क्या मतलब?आरती- अबे चोदू, तू मेरे पास आकर तो रोटी ही ख़ाता है.जब मैं उसको चोद रहा था, तब उसने अपनी चुत से दो बार पानी छोड़ा और मुझको पता लग गया कि ये भी चुदाई का मजा ले रही थी.

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उनकी एक और खास बात थी कि वह थोड़े कंजूस थे इसलिए जब खेतों में काम करते.उन्हें देख कर फिर से उनको मसलने का मन हुआ, पर मैंने अपने आपको रोक लिया क्योंकि दादाजी भी लगभग उसी समय उठते थे.

मेरा लंड भी उसकी चूत रस से गीला होकर अपनी ही भतीजी की चूत में जाने को तैयार था. बीएफ सेक्स मुस्लिम मैं उसकी बात सुन हंस पड़ी और भीतर ही भीतर अपनी प्रसंसा सुन खुश हो रही थी.

मेरे पहले चुम्बन का क्या गज़ब का जवाब मिला था मैं तो उसके चूमने की अदा पर ही घायल हो गया था.

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जैसे ही उसकी नजर मुझपे पड़ी, तो मैं हंसने लगा और उसने अपने फ़ोन को बंद कर दिया. थोड़ी ही देर में यह कड़क लंड मेरी नीना की चूत में सरपट दौड़ लगाने के लिहाज से तैयार हो गया. फिर बोला- आज नहीं, कल एक और पिक्चर दिखला कर फिर इसको मिलवा दूँगा इसके यार से … तब तक और गर्म हो जाएगी और अपने यार से मिलते हुए रोएगी कम और खुश ज़्यादा होगी.

’ भी कर रही थींमैंने इसके बाद एक हाथ पेटीकोट पर ले जाकर उनका नाड़ा खोल दिया. मैं थोड़ी हिन्ट दे रही हूँ कि अब आप इन्हीं दो जगहों पर अपने मुंह और जीभ से सॉरी महसूस करायें।मैं (सुधा) बोली- मामी इनसे कहिये कि पहले ये पूरे नंगे हो जाएं उसके बाद ही माफी मांगने के लिए आगे बढ़ें. मैंने घूमना चाहा तो उसने मेरे सर फ्लशटैंक में दबा कर जानवर बना गया.

उनकी खड़ी सॉलिड चुचियों की, उनके गोल गोरे चूतड़ों की, उनकी गांड की, उनकी गुदाज बगलों की, उनकी नशीली आंखों की, उनकी गर्दन की और उनकी चूत की तारीफ की. वह अपनी कमर को दीदी की कमर पर पटक रहे थे। दीदी बिल्कुल गुडीमुडी हुई अनन्त जीजू के नीचे दबी हुई थी। अनन्त और विनय दोनों ही जीजू मेरी दीदी पर रहम नहीं कर रहे थे। मैं बुरी तरह से डरकर वापस अपने कमरे में आ गई. और जैसे ही वो धक्के लगाना शुरू करता तो पहले से ज्यादा मज़ा आने लगता था.

उसकी चूचियों को हाथ से मसला और उसकी दोनों टांगों को थोड़ा चौड़ा करके अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसकी चूत के छेद पर लगाया. अभी मेरा आधा ही लंड अन्दर घुसा था कि सीमा भाभी दर्द से कराहने लगीं.

इतना बोलकर मैंने उसके चेहरे को किस किया और फिर हमारे होंठ आपस में चिपक गए.

खुद बेड पर खड़ी होकर अपने चुत को मेरे मुँह सामने करके खड़ी हुईं और अपनी चुत खुद ही सहलाने लगीं.

सासू माँ- तू अपने तरह से तैयारी कर, मैं अपने तरह से तैयारी करती हूं. उन्हीं दिनों एक दिन वो सफेद रंग का सूट पहनकर आयी और अन्दर उसने पिंक कलर की ब्रा और पेंटी पहन रखी थी. उन्होंने बिना किसी डर के मेरी पैन्ट पूरी उतार दी, मेरा लौड़ा कुछ देर हाथ से हिलाया और फिर चूसने लग गयी.

मैंने उससे बातचीत करके अपने करीब थोड़ा ला दिया था और वो भी मेरे साथ कुछ ज्यादा ही घुलमिल गई थी. मैंने कहा- ओह लेकिन ये क्या है?सासू माँ ने कहा- मूर्ख है … तू चुपचाप पिला दे. फिर उन्होंने अपनी टाँगों को फैला दिया और मेरे हाथ को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख दिया.

मेरी योनि से पहले ही पानी रिस रहा था और सुखबीर के थूक से मिलकर योनि और भी चिपचिपी और लार युक्त हो गयी थी.

मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कोई अनजान आदमी घर के दरवाजे में खड़ा है और हम सबको आश्चर्यचकित नज़र से देख रहा था. हर बार मैं अपना मुँह उसकी योनि के पास ले जाता, लेकिन उसे छूता तक नहीं … और वो बस अपनी योनि रस छोड़े जा रही थी. दोस्तो, मैं आपको बता दूँ कि इस तरीके की चुदाई से लड़की जल्दी झड़ जाती है.

आंटी के मम्मों पर हाथ रखते वक्त मेरी डर के मारे हालत खराब हो रही थी. घर पहुंच कर मुझे पता लगा कि मीरा मैडम ने पहले ही मेरे घर पर कॉल करके बता दिया है कि आज ऋषभ की नाइट शिफ्ट है. दोस्तो, मैं आपका रवि खन्ना फिर से अपनी सच्ची कहानी इश्क़ विश्क प्यार व्यार और लंबा इंतजार का अगला पार्ट लेकर हाजिर हूँ.

आहना के पेट पे हमारी प्रेमलीला के कारण पसीने में थी और मैं उसका पसीने से भीगा पेट चूम रहा था या कहिये कि मैं उसका पसीना चाट रहा था.

ऑनलाइन फ्रेंड बना कर उनका ये पहिला तजुर्बा था, जो कि बहुत अच्छा रहा. मैं उसकी हूँ… फिर तो मैं उसे जीजा जी कहूंगी, क्यों दीदी?’और मेरे चेहरे पे बरबस मुस्कान आ गयी.

बीएफ सेक्स मुस्लिम गुलाबो को भी एक्साइटमेंट होने लगा, गुलाबो भी मेरे सामने ढीली पड़ने लगी, मैं उसे हग करके गुलाबो की गांड को सहलाने लगा. मैंने उसकी गांड को दबा दिया और उसमें उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा.

बीएफ सेक्स मुस्लिम मैंने उसकी दोनों टांगों को दोनों तरफ से पकड़ कर और ज्यादा फैला दिया. इतने मक्खन से मुलायम उनके स्तनों को थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने अपना बांया हाथ उनकी मख़मली चूत पे रख दिया.

दोस्तो, मेरा नाम दिव्या है और मैं अहमदाबाद गुजरात की रहने वाली हूँ.

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मैंने उससे कहा- क्या देख कर ही मन भर लेना है आज?उसने उत्तर दिया- सारिका जी, आप इतनी सुंदर और कामुक लग रही हो कि देखते ही रहने का मन कर रहा. अब मैंने अपना चेहरा उनके गले से हटा कर उनके कान के पास लाकर उनके कान के लौ को चूमने लगा. मैं अपने आपको बहुत ही खुशनसीब मान रहा था जो बृजेश जैसे सांड ने मेरी चुदाई की.

उसने मना कर दिया और बोली- नहीं मैं खाना बना रही हूँ … खाना खा कर जाना. तो एक बार टीवी पर बीएफ चलने लगी थी, शायद बगल में कोई वी सी आर में देख रहा था और हमारी टीवी ने उनके सिग्नल कैच कर लिया था. मैं अपनी चूत की आग अपनी उंगली और भाई के पतले लंड से रगड़ कर शांत कर लेती थी.

मैंने रेड ब्रा पेन्टी स्ट्रिंग वाली और ब्लैक कलर का घुटने तक का सिल्क का गाउन पहन लिया.

खैर मैं नहाकर तौलिया कमर पे लपेट के बाहर निकला और अपने रूम में गया तो वो बिलकुल सीधी स्टेचू बन के बैठी हुई थी और मुझे देखते ही अपनी आंखें अपने हाथो से छुपा के बोली- कपड़े पहन के आओ. फिलहाल मैं बाइक काफ़ी तेज चला रहा था … ताकि जल्दी पहुंच जाएं … रात का समय था. अरे नीतू बेटा सुनो तो, मुझे एक रिसर्च करना है, इसके लिए मुझे तुमसे एक किस चाहिए.

इसके बाद मैनेजर सर ने एक सिगरेट सुलगाई और मेरी चूत में उंगली डाल कर मेरी चूत के दाने को मसला. इतना कहकर वो अपने घर चली गयी।उन 3 दिनों में मैंने भाभी की गांड भी मारी और अच्छा चुदाई का दौर चला। मुझे अब जब कभी भी मौका मिलता है, मैं भाभी की चुदाई करता हूँ। उनका गुलाम बनकर, कभी सेवक बनकर और कभी कुत्ता बनकर।और जब भी मैं चुदाई करता हूँ भाभी की चूत का गोल्डन रस, मूत जरूर पीता हूँ. कुछ देर के बाद भाभी खुद ही अपनी गांड को नीचे से उठा कर मेरे लंड की तरफ धकेलने लगी.

विनय ने भी दीदी के बालों को पकड़ा हुआ था और उनके मुंह को अपने लंड की तरफ धकेल रहे थे. उन्होंने अपने ज़िप को खोल कर अपना लंड बाहर निकाल कर मेरे हाथ में रख दिया.

मेरी मांसपेशियां दबाकर बदन की मज़बूती जांचनी चाही- राजे, बड़ा सख्त और कड़ा बदन है तेरा … मज़ा आएगा तेरी तगड़ी बाज़ुओं में जब भिंचूंगी. अब मैं सहम गई।तब दीदी ने मुस्कराते हुए कहा- रचना, तू भी जवान हो गई है, तुझे भी मस्ती का हक है। तू घबरा क्यों रही है? तू अपनी दीदी के घर आई है और तेरी चूत को शांत करने की जिम्मेदारी मैं ही लूंगी. मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उसका हाथ अपनी पेंट के ऊपर से ही लंड पर रख दिया.

इसी बीच एक दिन मैं नीचे दूध लाने गयी, तो देखा कि जिस दुकान से दूध लाती थी, वो बन्द थी.

मैंने चाय बनायी और मैडम को दी, साथ में खाने को भी बिस्कुट दिए और टैबलेट दी. मैंने उन पर हाथ लगा कर हल्के से दबाया औऱ अपनी टी-शर्ट भी उतार डाली. थोड़ी देर बाद में मालूम चला कि इमरान भी अपनी बाकी बहनों के साथ हैदराबाद आ गया है और बाकी भी बहुत सारे रिश्तेदार आज रात को वलीमा (रिसेप्शन) की दावत में आ रहे हैं.

जब दूसरी बार मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा पानी निकलने ही वाला है तो मैंने जीजा की तरफ अपने होंठों को बढ़ा दिया. मगर वह तेजी से अपने चूतड़ों को आगे की तरफ धकेल रहे थे और पूरा लंड दीदी के गले में उतार रहे थे.

अब हम लोग एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताते थे, वो इंस्टिट्यूट का बहाने मेरे से पार्क में मिलने आती थी, हम लोग खूब बातें करते थे. एक दिन हम खेत पर काम कर रहे थे कि माँ की साड़ी का पल्लू झाड़ में अटक गया और मुझे ब्लाउज के ऊपर से उसके चुचे दिखने लगे. क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मर्दों का कितनी देर में होता है लेकिन इतना जरूर पता था कि इतनी जल्दी तो नहीं होता है.

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इसी के चलते मैंने अपनी लुल्ली निकाल कर दिखा दी और इसके बाद बड़ी ही उम्मीद के साथ रवि मामा से अपना लंड खोलकर दिखाने को कहा.

मैंने उन पर हाथ लगा कर हल्के से दबाया औऱ अपनी टी-शर्ट भी उतार डाली. उसको मैं भाभी के मुँह से मुँह लगाकर पूरा चाट गया। उनके पूरे शरीर को कुत्ते की तरह चाटने लगा।भाभी- चाट साले कुत्ते, चाट, आह … आह … उह … उह … की आवाजें भाभी के मुंह से निकलने लगी. तभी अचानक सोनिया वहां आ गई और उसने बुआ से पूछा- क्या बात है, आप रो क्यों रही हो?तो बुआ ने उसे पूरी बात बता दी.

हम दोनों की आँखें बंद हो गयी और हम दोनों उस लम्हे में डूब गए।अब किस हुई तो बात आगे भी बढ़नी ही थी. अनन्त ने अपने लंड को दीदी के मुंह में तेजी के साथ धकेलते हुए अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मधुबाला का फोटोमम्मी कहने लगी आज तो मेरा भी बहुत दिल कर रहा है, वैसे भी तीन-चार दिन हो गए हैं और बच्चे भी सो गए हैं.

सारा के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह अब लंड डाल दो … अब और इंतज़ार नहीं होता … प्लीज जल्दी करो ना … प्लीज आहहह …अब मैं टोपी से लगातार उसकी चूत को छेड़ रहा था और वो ज़ोर से सिसकारियाँ भर रही थी- आमिर ये तूने क्या कर दिया? अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, जल्दी से चोद दो, मेरी चूत में आग लग रही है. सासू माँ- अब जो कुछ मैं तुझसे कहने वाली हूँ, उसे ध्यान से सुनना और समझना कि हम लोग तुझसे कितना प्यार करते हैं.

साथ ही मैं अपने हाथ पीछे ले जाकर उसके दोनों चूतड़ों को भी सहलाता रहा. मैं दोबारा से उनके चुचे दबाने ओर चूसने लगा, तो वो बोली- अब कंट्रोल नहीं हो रहा है. चिन्टू खाट से उठा और मीना के पास जाकर उसके गले में अपनी बाहें डाल दीं.

क्या ग़जब की चूत थी … ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने पाँव रोटी में चाकू से दो इंच का चीरा लगा रखा था. अब प्रशांत ने नीना के चूतड़ पर अपने हाथों की मजबूत पकड़ बनाई और दे गचागच, दे गचागच, चूत में धक्के पर धक्का मारने लगा. उसने मुझसे विनती करनी शुरू कर दी- यही तो मजा है सारिका जी, आप कोशिश कीजिये न.

मैंने नीलू को बताया कि यह आशीष है और आशीष को बताया कि यह मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड नीलू है.

उसने हंसते हुए कहा- क्या हुआ … क्या यहीं खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे … चलो जल्द से अन्दर आओ … वर्ना कोई देख लेगा. घर का दरवाजा शायद खुला हुआ था और तभी कोई अनजान आदमी घर में घुस गया था और हम लोगों को ऐसी हालत में देख लिया था.

वह जब घर में होता था तो उल्टा होकर अपना लिंग गद्दे के साथ घिसाने लगता था और मैथुन करता था. मैडम ने जल्दी से अपना गाउन निकाल फेंका और मेरे सामने घोड़ी बनकर बेड पर झुक गई. वो बहुत होट हो गयी थी और मेरे बालों को कस के पकड़ कर सीइईई सीयइई ईईहह हहह कर रही थी.

मैं तो सोच रहा था कि इसको दर्द होगा मगर यह तो आराम से पूरा लंड ले गई. नीचे उसकी बिकनी में उसकी गोरी टांगें देखकर मेरे मुंह से लार टपकने लगी. मेरे साइज को जानकर आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि मेरे चूचे कितने बड़े होंगे.

बीएफ सेक्स मुस्लिम दोनों सहेलियाँ आपस में कुछ गप-शप करने के लिए ऊपर वाले कमरे में चली गईं. मैं उसके मोटे लंड को अपने होंठों से चूमना चाहती थी लेकिन कर ना सकी.

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हम बाहर गए, घूमे फिरे, मूवी देखी, फिर खाना खा कर सासू माँ के घर आ गए. अब आरती ने कहा- नहीं प्रसंग, आज का दिन मेरा नहीं है, आज पुन्नी का दिन है, उसे मस्त करो और यह चूत चटवाने की बहुत शौकीन है, ज़रा आज इस को अपनी ज़ुबान का करतब भी दिखा दो. एक लौंडे ने मेरी जीएफ रिया को खींच कर गाड़ी से निकाल कर उसे दरी पर बिठा दिया और बोला- चल कपड़े उतार … वरना फिर हम कपड़े फाड़ेंगे, तो तुझे यहां से नंगी ही घर जाना पड़ेगा … सोच ले.

ननकू के नौकरी छोड़ गाँव में रहने की बात सुन मीना परेशान हो गयी क्योंकि अब उसे चिन्टू से मिल कर अपनी कामवासना शांत करने का अवसर नहीं मिल सकता था. मैंने अपना लंबा मोटा लंड अपनी पैन्ट से बाहर निकाला और उसको चित लिटा कर उसकी चूत की फांकों में लंड को घिसना शुरू कर दिया. सेक्सी मराठी झवाझवीमैं अपने घुटनों पे फर्श पे आ गयी और एक उत्तेजना के साथ उसके अंडरवियर को उतारने लगी.

आशीष बोला- यार तू जबरदस्त है मुझे क्या हर लड़के और मर्द को तेरे जैसी सेक्सी गर्ल फ्रेंड और वाइफ चाहिए.

जब हम दोनों की साँसें दुरुस्त हुईं, तो अपना लंड मामी जी की गांड से धीरे धीरे बाहर निकाल लिया. वो बोली- क्या मतलब?मैं- मेरी जान, तू तो पहले ही सुहागरात मना चुकी है और किसी का लंड पहले भी खा चुकी है.

शाम को प्रीति को फ़ोन किया तो उसने कहा कि संबंधी के घर है, इसलिए वो यहां खुल कर ज्यादा बात नहीं कर सकती और उसने मुझे सुखबीर का थोड़ा ख्याल रखने बोला. शायद भाभी कभी मंसूर भाई को बोल नहीं पाती होगी, ताकि उन्हें बुरा न लगे. मैं उसके माँ-पापा से मिला और सीमा को अपनी दीदी के घर ले जाने के लिए कहा.

चार दिन बाद मैंने पानीपत से सुबह की बस पकड़ी और दिल्ली बस स्टैंड आ पहुंचा.

अब मैं भाभी का गाउन खोलने लगा, तो वो बोलीं- अमित कपड़े मत खोलो, जो करना हो ऊपर ऊपर से कर लो. उन्होंने कराह कर बोला- आखिर फाड़ ही दी मेरे छोटी सी चुत को!मैंने उनके आंसू पौंछते हुए कहा- जो होना है, सो हो गया … अब तो और मज़ा आने वाला है. जब वो गाड़ी रख कर वापस आई, तो हम दोनों लिफ्ट से उसके फ्लैट में चले गए.

चांदनी का मतलबउनकी इच्छा तो थी कि उन्हें कोई पुत्र प्राप्त हो, पर कम उम्र में माँ बनने से उसकी तबियत बिगड़ चुकी थी और वो कमजोर हो गयी थी. इन चार महीनों में मेरा केवल 3 बार पति के साथ संभोग हुआ, पर हर बार मेरी कामाग्नि अधूरी ही रही.

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उसके बाद भाभी ने मुझे शिकायत करने की धमकी दी और मैं भी अपनी मर्दानगी साबित नहीं कर पाया था. इतना सुनते ही मैंने कंप्यूटर पर ‘तुम मिले …’ फ़िल्म के रोमांटिक गाने लगा दिए. काफी देर तक प्रयास करने पर दोपहर तक फ़ोन लगा तो प्रीति ने बताया कि वो अपनी बेटी के यहां जा रही है, क्योंकि 2 महीने के बाद उसे बच्चा होने वाला था.

मैं पूरे लंड को उनके मुंह में धकेल रहा था जो उनके गले तक जा रहा था. इंदु अभी भी अकेली ही थी, दिल तो कर रहा था कि अभी ही चोद दूँ पर इंदु ने कहा- मेरी सास अभी इधर आसपास ही हैं, कुछ मत करो. फिर उसने मुझे डॉगी पोज में झुका लिया और घुटनों के बल खड़ा होकर मेरी गांड में अपना लंड पेलने लगा.

मामी- शम्मी बेटा, तू एक काम कर, ये तौलिया लेकर जा और अपने कपड़े उतार कर चादर में लेट जा. मैंने कहा- मैं क्या डाक्टर हूँ कि मैं तुम्हारा इलाज करूँ?मतलब मैंने मामी को मना कर दिया. मैंने भी मैडम की इच्छा को भांप कर अपना लंड अनुष्का की चूत में धकेल दिया.

पर सेक्स करने की इच्छा तो हर किसी में होती है, सो मैं अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ कर मुठ मार लेता था. मैंने उसके भीगे मुंह वाले लंड को बिना पूछे ही अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

फिर मैंने अपने आपको सम्भाल कर उसे सवाल किया- हां जी कौन?उसने कहा- मैं अमीषी.

फिर आशीष उठा और सीधे मेरे सीने के इधर-उधर पैर कर दिया और उल्टा हो ग‌या. अनन्या पांडे सेक्सवहाँ पर लड़के-लड़कियाँ यहाँ-वहाँ कोने में छिपे हुए चूमने-चाटने में लगे हुए थे. ट्रिपल एक्स फोटोदोस्तो, लंड चुसाने में जो मजा है, उसे मैं लफ्जों में बयान नहीं कर सकता. मामा ने भी खाना वहीं पर छोड़ कर उसकी तरफ मुखातिफ हो गये और बोले- आओ पहले उसी चिकनी का स्वाद ले लेता हूँ.

और मैं तुरंत बाहर वाला गेट खोल के इंदु के घर चला गया, जाते जाते मैं वो गिफ्ट ले गया जो इंदु रानी को देना था.

गर्म-गर्म पेशाब जब फुद्दी पर लगने लगा तो उनकी मुनिया को गर्म कर दिया. दीदी के हाथ अनन्त की कमर पर थे और दीदी ने दोनों हाथों से अनन्त की कमर को संभाला हुआ था. उस वक़्त रात के करीब 9:30 हो रहे थे और स्टोर पर भी दुकानदार के अलावा कोई नहीं था.

मैंने सोनू से पूछा- सोनू सच बताओ, आज तुम्हें अच्छा लगा या बुरा लगा?सोनू कहने लगी- बाकी तो सब अच्छा लगा, लेकिन दर्द बहुत हुआ. मैंने आह सी भरकर जवाब दिया- नहीं सर, भगवान की कसम …चलो कोई बात नहीं … जवानी में ये सब तो होता ही है. उसने कहा- थोड़ा सब्र तो करो!मैंने उससे कहा- यार, अब इन्तजार नहीं होता तुम बस मेरी हो जाओ!फिर उसने मुझे कहा- बस 5 मिनट में मैं फ्रेश होकर आती हूँ.

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भैया मुझसे बोले- अमित पकड़ तो इसे … आज कुछ ज्यादा ही तेज भाग रही है. अब आगे:मैंने कहा- जल्द ही यह काम भी कर दूंगा, ये तो क़िस्मत की बात होती है, तुम्हारी शादी हो गयी … फिर भी तुम कुंवारी रही और मेरी सुहागरात तुम्हारे साथ मन रही है. थकहार कर मैंने जाने के लिए ऑटो को आवाज दी, तो मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आयी.

चाची भी देर ना करते हुए वहीं फर्श पर लेट गईं, मैं भी 69 में लेट गया और उनकी चूत के पास मुँह ले गया.

उसने बहुत सारा थूक मेरी गांड में थूक दिया और अपने लंड में भी लगाया.

उम्म्ह… अहह… हय… याह… लौड़ा बेकाबू होकर और भी ज़ोर से कूद फांद करने लगा. हल्का काला लम्बा और मोटा बिल्कुल सीधा लंड, जिसके थोड़े से खुले गहरे गुलाबी सुपारे पर प्रीकम की एक बड़ी बूंद. ब्लू पिक्चर कुत्ता वालीमैंने ही वासना से उत्तेजित होकर उसके कूल्हों पर जोर से थप्पड़ मार दिया था.

स्कूटर पर हेमा भाभी मेरे साथ बेफिक्री से बैठी थी, उनके पट, चुचे और शरीर बार बार मुझसे टच हो रहे थे जिससे मेरा शरीर रोमांच से भर गया था. किसी ने सच ही कहा है जब देने वाला देता है तो छप्पड़ फाड़ कर देता है. थोड़ी देर बाद उसका जिस्म कांपने लगा और एक झटके के साथ वो मेरे मुँह में झड़ने लगी.

मैंने अजय को शुक्रिया भी कहा, क्योंकि अपने घर में अपनी बीवी के लिए किसी अनजान आदमी, भले ही उसका मित्र ही कह लो, उसको बुलाकर अपनी बीवी भी उसके हवाले कर देना, हर किसी के सामर्थ्य में नहीं होता है. मैंने उसे सुझाव दिया कि ये सब कुछ करने से पहले अपने पति से खुल के बात करो और अपनी इच्छाएं बताओ.

मैंने जब पीने के लिए पानी मांगा तो सरोज भाभी बोलीं- बहुत थक गए क्या?मैंने हां कहा.

मैं उस वक्त काफी मॉडर्न कपड़े में थी, जिसमें से मेरी चूचियां दिख रही थीं. पड़ोसन मिक्सी मांगने आयी थी और जीजाजी के खड़े लंड पर डण्डा पड़ गया था. भाभी को खड़ा करके मैंने उन्हें दीवार से लगा लिया और उनकी एक टांग को अपने हाथ में उठा कर भाभी को चोदने लगा.

उंगली कटा हुआ फोटो डॉली अपने कपड़े चेंज करने में लगी थी और हम चुदाई में इसी स्टाइल में पिले पड़े थे. थोड़ी ही देर में उनकी चूत की मांसपेशियां सिकुड़ने लगीं और मेरे लंड को दबाने लगी.

वो मेरे बगल में दूसरी तरफ मुँह करके सिर्फ लोअर और पैंटी नीचे करके मेरा लंड पैंट से निकाल के रगड़ने लगी अपनी चूत पर. आख़िर वो घड़ी भी आ गई और धीरज ने अपना लंड मेरी बुर पर रखा और मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर और मेरे मम्मों को जोर से दबा कर एक कस कर लंड का बुर पर धक्का मारा जिससे लंड का टोपा मेरी कुंवारी बुर में घुस गया और मैं दर्द से बिलबिलाने लग गई. अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी टांगों को चौड़ा किया और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में रगड़ने लगा.

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उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर ऊपर नीचे रगड़ा और फिर छेद में थोड़ा सा घुसाकर टिका दिया. परंतु आज जब मेरे साथ कुछ कामुक घटनाएं हुई हैं तो मैंने उसे अंतर्वासना पर लिखने के जहमत उठाई है. इसी दौरान एक दिन ननकू अनायास ही गाँव आ गया, उसकी तबीयत कुछ नासाज़ थी.

दोस्तो, कैसी थी यह कहानी, अच्छी लगी या बुरी … बताने के लिए आप मुझे मेल करें. मैंने एक झटके मैं आशा की ब्रा उतार कर फेंक दी और मम्मों को चूसने लगा.

रवि मामा के मुँह से निकलने वाले लंड चूत के शब्दों ने मानो मेरे दिल में बुझ चुके लंड के अंगारों को हवा देने का काम किया, जिससे उनकी बातें सुनते हुए मेरे दिल के पुराने अरमान फिर से जागने लगे और अब तो मेरा मन आत्मविश्वास से भी भर चुका था.

दूसरे दिन मैं सुबह नौ बजे उनके पास पहुंचा, तो देखा दीदी तो गजब लग रही थीं. सोनू बार-बार मेरे मुंह को अपनी जांघों में भींचने लगी और कहने लगी- बस करो … बस करो!मैंने सोनू से पूछा- सोनू बताओ लंड अंदर लेना है या नहीं?सोनू कहने लगी कि लंड तो मैं बहुत समय से लेना चाहती हूँ, आपने जो करना है करो. कभी कभी तो उनकी शर्ट काफी ज़्यादा फट जाती और उनका कड़क जिस्म फ़टे कपड़ों में से बाहर झांकने लगता.

तीसरी बात उसने ये अच्छी की कि सुखबीर के झड़ने के बाद उसे फिर से उत्तेजित किया और पारंपरिक तरीके से बदल कर खुल कर संभोग में भागदारी निभाई. मीना कुछ समझ पाती, उससे पहले ही मैंने मीना के बाल पकड़ कर उसे बेड के किनारे पर खींचते हुए उसके मुँह के सामने लंड रख दिया. मैं दौड़ के अम्मी के पास गयी और उनको बताया तो वो खुश हो कर बोली- जा अंदर बुला ला, चाय नाश्ता करा!मैंने उसे अंदर बुलाया और अब्बू को हिंट कर दिया की यह वही नेट वाला फ्रेंड है.

इसी बीच मैं प्रीति से उसके संबंधों के बारे में पूछा, तो वो कहने लगी कि अभी भी वैसी ही स्थिति है.

बीएफ सेक्स मुस्लिम: तो डॉली ने कहा- हां करो मदद … इनके मिस्टर तो पी के टुन्न हो गए हैं, वहीं नीचे हैं. मैं हमेशा खुश रहने लगी थी और मेरी खूबसूरती और बढ़ती जा रही थी। अब मैं अपना और अपने लुक्स का बहुत ध्यान रखने लगी थी। मेरा फ़िगर अब 36-26-36 हो गया था और मेरा रंग और निखर गया था। मुझे हर्षिल ने समझाया था कि सेक्स इंसान के लिए बहुत जरूरी होता है, इसी से दुनिया चलती है।लगभग एक महीने बाद मेरे मामा के लड़के की शादी थी और हम सब का जाना बहुत जरूरी था.

जैसे ही मैंने मामा को बांहों में कसा, मामा बोले- बंध्या, तू तो चुदवाने को एकदम पागल हो रही है … तू अब चिंता नहीं करना, मैं सब इंतजाम कर दूंगा. जब भैया को जम कर नशा चढ़ गया, तब मैं बोला- भैया, अब मैं भाभी के साथ होली खेल लूँ?भैया बोले- हां हां आज तो होली का दिन है … रंग दे अपनी भाभी को …भाभी बोलीं- नहीं अमित … मैं अभी नहा कर साफ़ होकर आई हूँ … अब रहने दो. उसकी जीन्स इतनी टाइट रहती थी कि उसकी बड़ी गांड की वजह से 3-4 मिनट तो पैन्ट खोलने में ही लग जाते थे.

मगर सर … आधा टाइम पहले ही निकल चुका है पेपर का!” मैंने डरते डरते कहा।आज के पेपर को तो भूल ही जाओ.

अब वो पूरी मस्ती से गांड उठा कर लंड के मजे लेने लगी- आआहह आहहह … उउउहह … आई लव यू करीम!उसकी आंखों में मेरे लंड लेने की ख़ुशी दिखाई दे रही थी. मीना समझदार थी उसने लेटे लेटे ही लंड मुँह में लिया और चूसना चालू कर दिया. मैंने उसकी चूत को अच्छी तरह से चूसना और चाटना जारी रखा और मैडम की आवाजें तेज होती जा रही थी.