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कई दिनों से मैंने अपनी पासबुक में एंट्री नहीं करवाई थीं और बैंक में कुछ और भी काम था, तो मैं घर से लगभग 10 बजे बैंक के लिए निकल गई. मैंने अंजलि को इशारा किया ऊपर वाली मंजिल पर आने के लिए और म्मैने मम्मी को कहा कि मैं ऊपर वाले कमरे में जा रहा हूँ.

तो वो मुझे बहुत अच्छी लगती थीं, पर उनको मैंने कभी गलत नजरिए से नहीं देखा था.

मैंने मुठ्ठी को पीठ के चारों और थपथपाते चैक किया, तभी मीना जी खामोशी तोड़ते हुए बोलीं- क्या ढूँढ रहे हो?वो हंसने लगीं.

तुम्हारे संधी जी तो मुझे चोदते ही नहीं तो कंडोम का क्या काम!वो बोले- और अगर तुम प्रेग्नेंट हो गयी तो?मैंने कहा- तो कर दो ना मुझे प्रेग्नेंट!उन्होंने अपने लंड को मेरी गीली चूत टिकाया और एक झटके में मेरी चूत के अंदर कर दिया. वो मेरे कमरे में आई और चुपचाप चादर तकिया रजाई ले गई; टीवी वाले कमरे में सो गई. गजब का ठंडा पड़ गया था बोनेट और इन सबने जो मेरे चूतड़ों का अब तक तबला बनाया था वो चोट खाया हिस्सा उसकी वजह से दर्द कर गया.

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मेरे दिल में कई सवाल पैदा होने लगे कि क्या होगा आज??मुझे खुशी भी थी और डर भी था.

अदिति बेटा, अब तू अपने पैरों से मेरे लंड से खेल; अपने पंजों में इसे दबा कर इसकी मूठ मार और इसे रगड़!”मेरे कहने से बहूरानी ने मेरा लंड अपने पैरों के पंजों में अच्छे से दबा लिया और इसे हल्के हल्के रगड़ने लगी जैसे हम कोई चीज अपनी हथेलियों से मलते या रगड़ते हैं. अभी तक की इस कामवासना से भरपूर बहु की चुदाई कहानी में आपने पढ़ा कि हम ससुर बहू अपने केबिन के बाहर की दुनिया से बेपरवाह अपनी ही दुनिया में खोये हुए सेक्स का मजा कर रहे थे. यह सुनते ही पापा ने लंड की स्पीड बढ़ा दी और मेरी दोनों टांगों को ऊपर कर दिया और जम के लगे चोदने ‘आहह हउंह हह ओहह हहह मेरे राजा… और चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत को… पूरा डाल दो!और जोर से चिल्लाई मैं, मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, पूरे कमरे में फच फच की आवाज चुदाई की गूंज रही थी.

पता नहीं मेरे किस जन्म के कुकर्मों का फल इस पाप कर्म के रूप में उदय हो रहा था. वह बोला- अबे यार, मैं भी तेरे पर मरता हूं, पर अभी तेरी नहीं मारूंगा. शादी में जाने के कारण उसने लिपस्टिक, बिंदी, काजल और न जाने क्या क्या मेकअप किया हुआ था.

उसमें कूलर लगा हुआ था, गर्मी बहुत थी और मैं और दीदी शतरंज खेल रहे थे.

इस पर मीना जी ने अपने दोनों हाथों को जरा सा खोल दिया ताकि मैं अच्छे से मालिश कर सकूँ. थोड़ी देर तक चूची चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके पेट में घुमानी चालू कर दी, जिससे उसे गुदगुदी होने लगी.

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चाचा जब भी मेरे घर आते थे, वो मुझसे मजाक करते थे और हम दोनों लोग कभी कभी एक दूसरे के साथ खेलते भी थे लेकिन मैं चाचा के बारे में कुछ गलत नहीं सोचती थी.

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2-3 मिनट में ही दोनों धक्के लगाने बन्द कर दिए और दोनों ने ही लण्ड को बाहर निकाल लिया. वो समझ गई कि मैं उसकी गाण्ड मारने वाला हूँ।बोली- राज आज पीछे नहीं डालना प्लीज. यह सब करने के बाद वो शादी में गये और फटाफट चाट टिक्की खाकर घर आ गए.

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दीदी के कमीज़ उतारते ही मैं दीदी के बड़े बड़े बूब्स को खा जाने वाली नज़र से देखने लगा.

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थोड़ी देर बाद मैं फिर से ट्राइ करने लगा लेकिन इस बार भाभी की नींद टूट गई और वो जाग गईं.

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मैं समझ गया कि भाई के काम की वजह से भाई भाभी को रोज मजा नहीं दे पाते. चार तक ज्यादा डर नहीं लगा क्योंकि उतना तो मैंने सोच ही रखा था, पर जब पांचवें, छटवें और सातवें साधक ने उस कक्ष में प्रवेश किया तो मेरी गांड पहले से फटनी शुरू हो गई।मैं डर रही थी कि और भी कोई ना आ जाये. दोनों पति पत्नी रोपड़ के रहने वाले थे और दोनों काम की तलाश में चंडीगढ़ आए थे.

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मुझे खुशी भी थी और मैं काफ़ी डर भी रही थी क्योंकि कमल का लंड बहुत बड़ा और मोटा था. मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं उनके ऊपर लगभग कूद ही पड़ा और दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चुची पकड़ कर दबाने लगा. है ना सही बात?मैं- अच्छा ठीक है यदि 15 दिन का काम है तो इतने दिन कर लूँगी.

भाभी बोलीं- आह… क्या कर रहे हो… आह…मैं बोला- मैं नहीं चाहता कि हमारे प्यार की एक बूँद भी वेस्ट हो. तुम कैसे मजदूर से चुदवा सकती हो, नहीं नहीं, मैं तेरी बड़ी बहन हूँ कैसे तुझे चुदवाऊं और पहली बार चुदवाना बड़ा दर्दनाक होता है. जानवर के बीएफ वीडियोअब ब्रा निकाली और वो मैं पहन ना सकी क्योंकि वो रबड़ की तरह थी जैसे बालों में लगाने वाली रबड़ होती है.

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फिर मैंने पूछा- अगर आप बुरा ना मानो तो कुछ पूछूँ?छाया- जी हां पूछो न!आपके बच्चे नहीं हैं, आप लोग भी कहीं फैशन के चलते कहीं ये तो नहीं सोच रहे हैं कि आपका फिगर खराब हो जाएगा?”छाया हंस दी, पर उसकी हंसी में वो अपना गम छुपा ले गई. सेक्सी बीएफ होली कीअब मोना भी उसके लंड को पकड़ लिया और चमड़ी को नीचे उतार कर सुपारा बाहर निकाल लिया. थाईलैंड की बीएफअब तक मैंने उनकी पीठ की भी मालिश शुरू कर दी थी, इसलिए मैंने मेरे पैर हटा लिए थे. आते वक्त मैंने एक मोबाइल लिया जिसमें सीक्रेट तरीके से फ़ोन रिकॉर्ड हो सके और किसी को पता न चले.

उसने एक पारदर्शी जालीदार काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैंने उसके कानों पर लिकिंग करते हुए उसके गर्दन से नीचे आते हुए उसके ब्रा के हुक को अपने दांतों से खोला, बहुत देर लगी मुझे ब्रा का हुक खोलने में… फिर मैंने अपने होंठों और दांतों से ही उसकी ब्रा पूरी उतार दी.

उनके चेहरे पर ब्रायन के लंड जड़ तक घुस जाने के कारण दर्द साफ झलक रहा था. उन्होंने मेरे लंड की चमड़ी को पीछे किया और मेरा सुपाड़ा निकालकर उस पर जीभ फिराने लगीं. ’ बोल कर पदमा के मुंह में घुसा दिया, जिससे उसकी आवाजें भी बंद हो गईं.

हमने जल्द से जल्द अपना घर आफिस सब बेच दिया और सब कुछ लेकर दुबई आ गए. मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं कोई देख ना ले!किचन में किशोर मुझे चूमने लगा, मैं गर्म होने लगी, मेरी सांसें तेज होने लगी, वो मेरे जोर से बोबे दबाने लगा, मसलने लगा, मेरी आहें निकलने लगी- आह्ह्ह आह्ह!उसने मेरी लेगिंग में हाथ डाल दिया और मेरी चूत मसलने लगा. अब बारी मेरी थी, मैंने भाभी के और मेरे बाकी के कपड़े निकाल दिए और दोनों नंगे हो गए.

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” कहते हुए माया ने अंकित का लंड अपनी चुत पर सैट किया और धीरे धीरे नीचे होने लगी. फिर उसने पास ही पड़ा एक दुपट्टा उठाया जो 90% तक पारदर्शी था, उस दुपट्टे को उसने अपनी चूचियों पर डाला, जैसे उसको छुपाना चाहती हो. एक दिन रात में दस बजे मैं कमरे में बैठा था, मेरा छोटा भाई सो गया था.

उसने कहा- सुनो, तुम्हें पिंकी की गांड मारनी है तो मैं तुम्हारा साथ दूंगी, पर तुम मुझसे नाराज मत रहो.

मेरी उंगलियाँ अब उनकी ब्रा की पट्टी को बार बार छू रही थीं और मीना जी मुझसे इधर उधर की बात कर रही थीं.

तो उसने बताया कि उसकी शादी को सिर्फ एक साल हुआ है और अभी तक बच्चा पैदा नहीं हुआ है. बहूरानी के कूल्हे मेरी जांघों पर थे, मेरी एक बाजू पर बहू का सर टिक गया. बीएफ फिल्म गंदीकाजल अपने दोनों भाइयों के इस चौतरफे हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी.

संजय मेरे पूरे बदन को चूम रहा था, मुझ पर वासना इतनी हावी हो चुकी थी कि मैंने संजय के शर्ट के सारे बटन तोड़ दिए और उसकी शर्ट उतार फेंकी. इधर ब्रायन ने झड़ने से पहले अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया. इसी चूमा चाटी में पुलकित ने मंजरी को पीछे को धकेल कर बेड पे लिटा दिया और खुद भी उसके ऊपर ही लेट गया.

मैंने अपने दोस्त की बाइक ली और उसके कॉलेज के सामने जाकर उसको कॉल किया, वो कॉलेज के बाहर आकर बाइक पर बैठ गई. मेरा काम उसकी चूत को इतना चौड़ा करने का था कि जब मैं उसमें अपना लंड डालूँ तो उसको ज्यादा दर्द न हो.

ये सुन कर मेरे अन्दर बहुत जोश आ गया और मैं फिर से उसकी बुर में अपना लंड पूरे स्पीड में पेलने लगा.

मोना- आज पहली बार मेरी योनि में बड़ा मूसल ठीक से गया है और एडजस्ट भी हुआ है. मैंने बहुत सोच विचार किया, आखिर यही सूझा कि कोई भली महिला ही इसमें नेहा की मदद कर सकती है. शायद जवान होने के कारण उसमें मुझे देख कर कामवासना ज़्यादा चढ़ गई थी। मुझे आज फिर से अपनी नौकरानी के बेटे श्याम की याद हो आई थी। मेरी चूत भी फड़क उठी तो मैंने कहा- ठीक है लेकिन किसी को बताना नहीं ओके।वो- ओके चाची जी।वो बहुत खुश हुआ.

बीएफ एक्शन उसके सूरजमुखी ने अपने आप मेरे लंड को उसकी ओर खींचना शुरू किया, जैसे कि कोई चुम्बक हो. मेरा मन कर रहा था कि बस वहीं भाई की शादी के साथ साथ उसके साथ अपने फेरे ले लूँ.

मैंने कहा- चचीजान, इसमें शुक्रिया वाली क्या बात ये तो मेरा फर्ज़ था. और अब ऐसे ही रात गुज़ार दोगे क्या? कुछ करना नहीं क्या?मैंने बोला- आज मैं तुम्हें सारे मज़े दूँगा मेरी पायल रानी. वे हमें शहर से बहुत दूर ले गए, चार पांच किलामीटर दूर अपने खेत पर ले गए, वहां एक कमरा था.

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मैंने नोट किया कि प्रिया का इकहरा शरीर आकर्षक रूप से थोड़ा भर गया था, वक्ष थोड़े ज्यादा सख़्त और ज्यादा उभर आये थे, फ़िगर भी शायद 34-26-34 हो चला था. मगर अब मुझे उस दिन की बात पे पछतावा होने लगा था, जो हुआ उसमें सिर्फ़ महेश का कसूर नहीं था. यह कह कर मैंने फोन काट दिया, उधर संजय मेरी चुत में अन्दर तक लंड डालकर भरपूर चुदाई कर रहा था.

क्या मिल कर खुश नहीं हो?मैं- नहीं ऐसी बात नहीं है, मैं तो ऐसे ही रहती हूँ और मेरे पास कोई इतनी अच्छी ड्रेस भी नहीं थी, तो सोचा कि यही पहन लूँ. उसने अपने हाथ आगे बढ़ा के माया के बोबे अपने हाथों में भर लिए और निचोड़ने लगा.

फिर मैं बाथरूम में गयी और अपनी हॉट चूत में खीरा डालने लगी और वासनामयी आवाजें निकालने लगी- आह आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह!फिर थोड़ी देर अपनी चूत को खीरे से चोदने के बाद मेरी गर्म चूत ने पानी छोड़ दिया और फिर मैं भी रूम में आकर सो गयी.

तो मैं आपके सामने अपने जीवन की प्रथम अद्भुत् सेक्स अनुभव प्रस्तुत कर रहा हूँ. मंगलवार की दोपहर में जैसा मैंने कहा था अमित ने कॉल किया- हैलो मिनी, उस दिन के लिए आई ऍम सो सॉरी. मेरे नेबरहुड में एक बन्दा रहता था, उसका नाम था करण जिससे मैं हमेशा अपनी चुत गांड की सेवा करवाती हूँ… और वो करता भी है खुशी खुशी! तो मैंने सोचा कि आज उसके ही घर जाकर अपनी खुजली दूर करूंगी.

मैं 2 बजे तुम्हारे कॉलेज के गेट पर आऊँगा, तुम तैयार रहना!इतना कह कर मैंने उसे बाय कहा और वहां से निकल पड़ा. ये देख कर दीदी ने उन्हें फिर सजा का हुक्म देते हुए उन तीनों को घोड़ागाड़ी में जोत दिया और खुद गाड़ी की सीट पर बैठ गईं. जैसे जैसे बाहर ठंडी बढ़ती गई, हम दोनों के बीच की दूरियां भी घटती गईं.

मैंने तुरंत ही फिर से उनके होंठों पर जीभ फिराते हुए भाभी की जीभ को चूसने लगा.

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बाद में मैंने अलग हुआ तो हल्का सा खून भी था, मैंने उसे प्यार से चूम लिया. हम दोनों चुदाई में एक दूसरे के साथ डूबे हुए थे, हमें दुनिया की कोई फ़िक्र ना थी. मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

चचा माँ माल मेरी चूची और पेट पर गिरा जिसे चाचा ने मेरी ही पेंटी से पौंछ दिया.

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ कैंटीन गया, तो मुझे एक लड़के पर नज़र पड़ी. भाभी की चुत चुदाई की यह रियल स्टोरी तब की है, जब मैं फर्स्ट ईयर में था. फिर अचानक वो एक बार मेरे होंठ के पास आई और मेरे होंठों पर किस करके उसने सीधे मेरे लंड को पकड़ कर सुपारा अपने मुँह में भर लिया.