बिहार के बीएफ देहाती

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यह सुनकर करण पाल ने कहा- फिर ये पागल क्या बोल रहा है?मैं बहुत डर गया क्योंकि मैं जानता था कि करण पाल बहुत खतरनाक गुंडा है.फिर तुरन्त उसने उसकी नाईटी खोल दी, अगले ही पल अनु सिर्फ पेंटी में थी.

तब मनीषा ने मेरे लन्ड को मुँह में लेकर गीला किया और लन्ड को अपने हाथों से पकड़ कर चूत पर रखा और मुझे जोर लगाने को बोला. बिहार के बीएफ देहाती सलोनी अभी भी वैसे ही आंखें बंद करके लेटी थी, मैं उसके बगल में लेट गया और वो भी मेरी बाँहों में सिमट आई.

मैं उसका कुरता ऊपर उठाने लगा, उसने अपनी बांहें ऊपर उठा के मुझे कुरता निकालने में मदद की.

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भाभी- अच्छा और अभी क्या कर रहे हो?मैं- आपसे बात कर रहा हूँ … और आपसे बात करके मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. रवि उठ कर सीधे हो गए और मुझसे बोले- थोड़ा कमर पीछे घोड़ी स्टाइल में ऐसी कर लो. कुछ देर तक लंड चूसने के बाद अब मुझसे बिल्कुल रहा नहीं जा रहा था, मैं बोली- रवि जी सीधे हो जाओ और अब मत तड़पाओ.

तब भी मैं उससे बात करने के नए नए बहाने ढूंढने लगा था और किसी न किसी काम के बहाने ऊपर जा के उनसे मिलने भी लगा था. मेरा जोश बढ़ता ही जा रहा था। बहुत दिनों बाद मुझे इतना मस्त माल हाथ लगा था, इसलिए मैं उसका पूरा मज़ा ले रहा था. मास्टर जी जरा वो ऊपर रखी चीनी का डब्बा निकल दीजिये ना … मेरा हाथ नहीं पहुँचेगा.

जी … अच्छा लग रहा है!” मैंने जवाब दिया और फिर से उनके मेरे होंठों पर लंड रखते ही मैंने अपने मुँह को खोल लिया. एकता ने उससे पूछा- क्या बात है, घर पर कोई नहीं है क्या?प्रमिला बोली- हां यार ये अभी अभी ऑफिस निकल गए हैं … बोल रहे थे कि बाहर जाने का हो सकता है, फोन पर बता दूँगा … और आपके पति का तो आप ही ध्यान रखो. पैंट से मेरा लंड बाहर निकलना चाह रहा था और वो चाहत मनीषा ने पूरी कर दी.

नेहा ने मेरे बदन को निहारा और मुस्कुरा कर बोली- चलो यार, मैं भी थक गई हूं, मैं तो सोने जा रही. अपने कुछ दोस्तों के साथ बगल वाले गांव से निकलती नदी पर नहाने चला गया, जहाँ हमने ठंडे ठंडे पानी में बहुत देर तक उछल कूद की.

बस मैं पूरा मस्त होकर उसकी चुत ऐसे झड़ा जैसे कि अपनी पूरी जान उसकी चुत के जरिये ट्रान्स्फर कर रहा हूँ.

जब मैं घर वापसी आया, तब मैंने देखा कि वंदना लाल कलर के सूट में एक दुल्हन की तरह तैयार होकर मेरे सामने खड़ी थी.

मैं भी गर्म थी और मुझे भी चुदवाने का मन कर रहा था तो हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत देर तक किस किये. उसके मुँह की गर्मी से मुझे ऐसा मज़ा आया कि मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से मोनिंग करने लगा. छोड़ो भी ना …” सुबह के बारे में उससे कैसे बात करूँ … कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

रवि मामा का लंड झटके मार रहा था और मैं उसके काम रस को पीने को उतावला था. उसे दर्द चूची काटने का हो रहा था, जबकि उसकी चूत ने मेरी उंगली को पूरा लील लिया था. इसके बाद उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में अपना जीभ डाल मेरी चूत को चाटने लगा.

मैंने अपनी टी-शर्ट और जीन्स उतारी और उसके गाउन के ऊपर से ही उसकी चूचियों को सहलाने लगा.

मैंने उससे पूछा कि वो क्यों बाहर आ गयी?तो वो बोली- मैंने तुमको बताया था ना कि रमेश का ड्रिंक पे कोई कंट्रोल नहीं है, आज भी कहाँ है किसके साथ है इसका कोई ध्यान ही नहीं, सारे लोग एक लिमिट में ड्रिंक करके उठ गये… पर ये है कि कंट्रोल नहीं करते. मैंने अपने दोस्त को आवाज दी, जब कोई जवाब नहीं आया, तो मैं उसे ढूंढते उसके घर घुस गया. इससे मुझे फिर से सेक्स चढ़ने लगा और मेरी सहेली का पति भी सेक्स करने के मूड में आ गया था.

रात में फिर से हमने बातें शुरू की और इस बार उसने अपने और प्रीति की बातें करनी शुरू कर दीं. इससे मुझे साफ पता चलता था कि उसकी चुत में खुजली हो रही है और वो चुदवाना चाहती है. तभी बुड्ढे मियां कुछ मिनट बाद जोर से कस के मेरी गांड को लिपटकर रगड़ के बोले- वन्द्या सेक्सी इस उम्र में भी मैंने तेरी इतनी देर तक चुदाई कर ली, यह तेरी मस्त गांड का ही कमाल है.

अब आनन्द ने लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और प्रेस करने से उसके लंड की सिर्फ टोपी ही चली गई.

मुझे ये सब साफ दिखाई दे रहा था क्योंकि वे दोनों हॉल में सोफे पे ही चुदाई में लगे हुए थे. अब हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और उसके कुछ देर बाद मैं नंगी ही बाथरूम में गयी और पेशाब करने लगी.

बिहार के बीएफ देहाती मैं उसके रस भरे मम्मों को मसलता और ऊपर से उसके जिस्म का मजा लेने लगा था. करीब 15 मिनट तक किस करने के बाद स्वीटी बोली- अब कुछ करो यार … सब्र नहीं हो रहा है.

बिहार के बीएफ देहाती मुझे तुम लोग अच्छे लगते हो, तो मैं बिल्कुल आपके घर आऊंगा … तुम्हें कोई परेशानी है … तो बताओ?मैंने तुरंत डरते हुए कहा- ठीक है. मैं चुदासी सी बोल उठी- जेठ जी … यार अब मत तड़पाओ, मेरी चुत कब से आप के लंड के लिए तरस रही है.

मामा कभी बाइक पर खड़े हो जाते, तो कभी बैठ जाते, तो कभी एक हाथ पीछे लेकर मेरी छाती के उभार को मसल देते.

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वो बहुत अलग ही तरीके से मेरे होंठों में अपनी जीभ को धीरे धीरे ऐसे चला रहा था कि मेरी हालत उसकी हरकत से बिगड़ रही थी. बता बनेगी रखैल?मैं होश में तो थी नहीं, मुझे कुछ नहीं याद है कि क्या बोलूं. मैंने गीला लंड उसकी गांड में लगाया और एक कस के धक्का मारा तो एक ही धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया.

इसके बाद उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में अपना जीभ डाल मेरी चूत को चाटने लगा. मैंने चाय खत्म की और शूज पहन के कार की चाबी उठाई, तो राहुल भी आ गया. हुआ यूं पूजा का मेरे पास फोन आया कि मैं शहर से बाहर जा रही हूँ और मुझे लौटने में बहुत देर हो जाएगी, आपको मुझे रिसीव करने आना है.

मेरा आग्रह है कि आप मेरी पुरानी कहानियाँ पढ़ें तो आपको मेरे बारे में काफी कुछ पता चल जाएगा और कहानियाँ पढ़ने में आनन्द आयेगा.

थोड़ी देर चूसने के बाद वो अपने घुटने मेरी कमर के अगल बगल बेड पर टिका कर बैठ गयी. मगर मालती तो उस को उसी हालत में भी मेरी चूत पर धक्के पर धक्का मारती रही. तभी आंटी बोलीं- तुम ही विक्रम हो?तो मैंने बोला- जी आंटी, मैं ही विक्रम हूँ.

उसके बाद वह मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से अन्दर बाहर अपना लंड करने लगा. फिर मैंने वंदना के हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और दूसरे हाथ से मैं वंदना की चुत दबा रहा था. चाची की गांड हर धक्के पर ऐसे हिल रही थी, मानो पानी से भरा गुब्बारा हिल रहा हो.

वो करीब 5 मिनट तक बिना रुके धक्के लगाती रही और मैं केवल लेट कर उसकी हिलती चुचियों से खेलता रहा. दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी थी, इसलिए मैं आप सबके कमेंट्स का वेट करूँगा.

जब उसकी बहन की आंख से आँसू निकलने लगे, तब मैंने उसकी चुत से लंड बाहर निकाला. मैंने कहा- साली, एक बार नीचे हाथ कर के देख ले, कहीं तेरी बात झूठी न हो जाए. प्रेमरस और मेरे मुँह की लार से उसकी चुत के सारे बाल गीले होकर चुत से चिपक गए थे, इसलिए चुत की गुलाबी फांकें अब अलग ही नजर आ रही थीं.

इधर आगे अनवर मेरी एक टांग को अपने कंधे में रखकर जोर से अब पूरा लौड़ा मेरी चूत में अन्दर करने लगा.

फिर खुद की ही टॉप अपने जिस्म से अलग कर दिया और अपने कबूतरों को टॉप से आज़ाद कर दिया. मैंने उनकी तरफ से हाँ सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर उनको कहा- हाँ ठीक है, जैसा आप कहोगी, मैं ठीक वैसा ही करूंगा!उस समय वो गुलाबी कलर की मेक्सी में थी. मैं बोला- दीदी उससे मुझे मेरी किताब वापिस लेनी है, आप जरा निकाल दोगी?वो बोली- रुको … तुम्हारे जीजा को टिफ़िन पैक करके दे दूँ, फिर तुम्हें दे दूँगी.

आखिरकार मेरी कोशिश रंग लाई और कुछ ही देर बाद भाभी का बदन अब फिर से अकड़ने लगा … मेरा सब्र भी अब टूट ही गया था, इसलिए मैंने भी अब तीन चार ही धक्के अपने पूरे वेग से लगाये और सुलेखा भाभी को कस कर पकड़ लिया. कभी इंग्लिश में, कभी हिंदी में- याआआह गुड हार्ड कॉक … सो बिग कॉक उह्ह्ह गूऊउ … गूऊउ! मस्त लंड है साले का आह क्या मस्त लंड है साले का!नीचे मेरे लंड के करीब, एकता और प्रमिला एक दूसरे को किस भी कर रही थीं.

इस बीच मैंने भाभी के दूध भी पकड़ लिए और दबाने लगा, जिससे भाभी और भी ज्यादा गर्म हो गईं. नीचे गाड़ी लगी थी, राज अंकल आए और बोले- चलो सोनू, वापस घर चलते हैं. बस मैं पूरा मस्त होकर उसकी चुत ऐसे झड़ा जैसे कि अपनी पूरी जान उसकी चुत के जरिये ट्रान्स्फर कर रहा हूँ.

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जब नामित और मॉम रूम में मदमस्त चुदाई का खेल खेल रहे थे, तब मैं और नेहा आंटी खिड़की से उनकी हर हरकत देख कर अपनी हवस की आग में भड़क रहे थे.

मैंने और सुलेखा भाभी ने अब एक दूसरे को जोरों से भींच लिया और हल्के हल्के धक्के लगाते हुए एक दूसरे के यौन अंगों‌ को अपने अपने प्रेमरस से सींचने लगे‌. मैं उठ कर घुटनों के बल उसके मुँह के पास बैठ गया और लंड को उसके होंठों पे रख दिया. देखूं तो जरा, क्या हुआ है मेरी जान को?”नीना के मन की चाह लेने के लिए प्रशांत पीछे पलटा.

वंदना ने मेरे पास आकर मुझसे पूछा- तुम परेशान क्यों देख रहे हो?तब मैंने उससे कहा- कल ही तो मिली हो और आज ऐसे छोड़ कर जा रही हो. अब मैं झड़ने वाला था- मजा आ रहा है!मानसी- बहुत …मैं- अब हाथ हटाओ मेरे लंड से … नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा. ब्लू सेक्सी वीडियो 2000मैंने भी भाभी के गाउन को उतार दिया उनकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया.

इस हालत में मैं बिल्कुल पागल सी हो गई और अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मनीषा- सूर्या जिद मत करो … अभी चलो प्लीज!मैं- मैं नहीं जाऊँगा तुम्हारे साथ! तुम जाओ … और फिर कभी मत बोलना कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो.

”लेकिन ये सब गलत है मास्टर जी … समाज क्या कहेगा, किसी को पता चल गया तो?”घबराती क्यों हो कौशल्या रानी … किसी को नहीं पता चलेगा. इसके बाद मेरे बेटे ने मुझे कैसे चोदा और नेहा के साथ हम चारों ने कैसे ग्रुप सेक्स का मजा लिया ये आपको अगली बार लिखूंगी. जब वह मेरे होंठों को चूसने लगा तो मन कर रहा था कि बस यहीं चुदवा लूं अपनी निगोड़ी चूत को।इसके बाद अगले भाग में बताऊंगी कि कैसे मैंने राहुल से अपनी चूत का उद्घाटन करवाया। आप सभी लोग अपने विचार मुझे यहाँ बताएं।[emailprotected]कहानी का अगला भाग:देवर जी को ही पतिदेव मान लिया-2.

लता ने कहा- मैं घर चलती हूँ, तुम कुछ देर बाद मेरे घर ही आ जाना, तब तक मैं खाना बनाती हूँ, खाना इकट्ठे खाएंगे, तुम मेरे घर सीढ़ियों वाले दरवाज़े से आना जिससे कोई देख न सके, मैं दरवाजा अन्दर से खोल कर रखूंगी. चूंकि हम दोनों रेस्टोरेंट एक कोने में बैठे थे, जिससे बाहर से आने वाले उसकी सिर्फ पीठ देख सकते थे. मनीषा- सूर्या जिद मत करो … अभी चलो प्लीज!मैं- मैं नहीं जाऊँगा तुम्हारे साथ! तुम जाओ … और फिर कभी मत बोलना कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो.

वो मेरे कूल्हों को फैलाकर अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा और बोला- वन्द्या तू सच में बहुत बड़ी कुतिया है.

मैंने कंडोम इस लिए लगाया था कि रिक्शे वाले के लंड ने नेहा को चोदा था. नैना इतनी गरम हो चुकी थी कि उसकी पैंटी उसकी चूत के पानी से गीली हो गयी थी.

बोली- यह मेरी चूत के अंदर कैसे जाएगा, यह तो मेरी चूत को फाड़ ही देगा. ये मेरी पहली चुदाई मुझे जिंदगी भर याद रहेगी।दोस्तो, इसके कुछ दिन के बाद मौक़ा मिलने पर मैंने चाची की गांड की चुदाई भी की. मैंने सोनू से कहा- सोनू हम अपनी फ्रेंडशिप की शुरुआत कैसे करें?सोनू ने कहा- मुझे नहीं पता, आप ही बताओ?मैंने कहा- ठीक है, पहले हाथ मिलाओ और फिर खड़ी हो जाओ.

पांच, दस, पंद्रह, बीस, पच्चीस … मिनट पर मिनट घड़ी की सुई भागती जा रही थी. अब पीछे से मेरी गांड खुल गई तो राज अंकल बोले- रवि भाई आप बुरा नहीं मानो तो मैं सोनू की गांड मार लूं. दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई की पहली स्टोरी है जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ.

बिहार के बीएफ देहाती इतनी जल्दी कहां जा रही हो?” मैंने सुलेखा भाभी को अपनी बांहों में भरकर उनके मखमली गालों को चूमते हुए कहा. फिर मैंने मालिनी का ब्लाउज उसके बदन से अलग किया और उसने लाल ही कलर की ब्रा पहन रखी थी, मैं समझ गया कि मालिनी ने पहले से ही सब प्लान कर रखा है.

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वहीं से टाइम निकाल कर ही अपने जिस्म की अधूरी चाहतें पूरी कर सकती हूं।मैंने सुबह उनको मैसेज किया कि राजीव आप मुझे रतन चौक वाले कॉर्नर वाले पंप से पिक कर सकते हो क्या?वह बोले- क्यों नहीं मेरी जान!मैंने लड़की को कहा- पार्लर खोल लेना. आह … क्या गर्म चूत थी उसकी, मानो किसी आग की भट्टी पर ही मैंने अपना हाथ रख दिया हो … मैं अच्छे से उसकी चुत को सहला कर देखने लगा. मैंने उससे पूछा- बेटा तुम्हारा नाम क्या है … और करते क्या हो? घर में और कौन कौन है?वो- सर मेरा नाम मदन है, मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, मेरा घर बस आपके स्टाफ कॉलोनी से कुछ दूरी पर है.

मैं- अरे यार राजू (पान वाला) आज मेरी गाड़ी ख़राब हो गयी है … मुझे बार जाना था, क्या करूँ बिना पिये नींद नहीं आयेगी साली. मेरे लिए शायद ये नेहा की तरफ से इशारा था कि मैं भी अब अपना काम शुरू कर दूँ … इसलिए मैंने अब अपनी पूरी जुबान निकालकर धीरे धीरे उसकी प्रवेशद्वार की दीवारों पर घिसना शुरू कर दिया. गुजराती सेक्सी पिक्चर दोकुछ ही देर में हम दोनों सेक्स की 69 की पोजीशन मैं होकर एक दूसरे को चाट रहे थे.

पिंकी अपने हाथ को वापस खींचने की कोशिश करते हुए बगैर उनकी तरफ देखे बोली- जाने दो ना सर … प्लीज़ … !”सर ने मेरा हाथ अपने दूसरे हाथ में पकड़ा और मुझे अपने लंड के नीचे लटक रहे ‘गोले’ पकड़ा दिए … मैंने हल्का सा विरोध भी नहीं किया और उनके गोले अपनी उंगलियों से सहलाने लगी.

इससे पहले भी मैंने बहुत सारे लंड देखे और चूसे थे लेकिन उसके लंड की बात ही मुझे निराली लगी. मैंने लंड बाहर खींच लिया और उसको घोड़ी बना कर उसके पीछे से लंड डालकर चूत में लंड के धक्के देने लगा.

फिर 10 मिनट में ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उससे कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो उसने और ज़ोर से और तेज़ी से लंड चूसना शुरू कर दिया. सब में से एक बोली- यार काश मुझे मिल जाए ऐसा कड़क लंड वाला कोई … साला मेरा वाला तो मुझे ठीक से चोद भी नहीं पाता … फिर भी जब तक कोई नया नहीं मिलता, इसी को झेल रही हूँ. तो मैं वहां पर काम कर रहा था तभी वहां लैब का काम संभालने वाली मैम आईं और मेरे से इधर उधर की बात करने लगीं.

वो बोला- मालिकों आपको बहुत बहुत धन्यवाद, मैं आपका एहसान नहीं भूलूंगा, आप लोग कुछ करना या नहीं इसकी गांड जरूर मारना, इसकी गांड बहुत मस्त है.

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इसलिए काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाए पड़े रहे. मेरे परिवार में माता-पिता के अलावा मेरी दो बहनें और एक बड़ा भाई है, मेरी दोनों बहनें मुझसे छोटी हैं. अब ये बात शायद सुलेखा भाभी को मंजूर नहीं हुई, इसलिए भाभी ने मेरे होंठों को अब एक बार तो जोर से चूमा.

अब मैंने भी उसके चेहरे से अपना हाथ फेरते हुये धीरे से उसके गालों से होते हुये उसके होंठों पर अंगूठा टिका दिया. कुछ लोगों की शिकायत थी कि कहीं मेरी कुछ सेक्स स्टोरी शायद उन्हें काल्पनिक लगीं, तो मैं केवल इतना ही कह सकता हूँ स्टोरी, स्टोरी है.

मैंने दरवाजा खोला तो देखा उसने अनु को बेड पर लिटा रखा था और खुद ऊपर चढ़कर खुद चुम्मा चाटी कर रहा था.

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अनु मस्त होकर बोल रही थी- हाय जानू चोदते रहो … मुझे खूब मजा आता है … तुम ऐसे चोदते हो तो चूत गर्म हो जाती है. ’नेहा आंटी के बूब्स बहुत ही टाइट और मजेदार थे, उनके निप्पल भी बहुत बड़े थे. चूंकि अब तो गाहे बगाहे मैम के फोन आते रहते थे और मैम से मेरी हंसी मजाक होती रहती थी.

अब मैंने अपना अंगूठा उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने दूसरे स्तन पर रख लिया. अब स्वीटी बहुत मजे से अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरे लंड से चुदवा रही थी. फिर सुनील ने पूछा- मैं अभी डाल दूं? चुदवाएगी न?मैंने फिर से हां में सिर हिला दिया तो महेश बोला- अबे पूछता क्या है, डाल दे न यार … देख बेचारी की चूत हालत देख कैसे बह रही है.

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तो जगत अंकल बोले- सेक्सी वन्द्या अब थोड़ा ऊपर नीचे बैठो … धीरे धीरे अन्दर बाहर होगा, तो दो-तीन मिनट में तुम्हें जन्नत लगने लगेगी. मैंने कहा- सोनू, मुझसे कुछ भी मत छुपाओ क्योंकि जिस दिन मैं और मालती भाभी पिक्चर देखने गए थे तो वहां तुम किसके साथ पिक्चर देखने गई थी?सोनू ने कुछ झिझकते हुए यह बात स्वीकार कर ली और कहा कि वह मेरा बॉयफ्रेंड नहीं है, ऐसे ही मेरी क्लास में पढ़ता था और मुझे मिल गया था. उसने मेरी ट्रैक पैंट को उतार दिया और मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी.

तो मैंने पहले तो ना कर दी फिर पापा ने भी मुझे चलने को कहा तो मैंने हाँ कर दी.

मैंने एक हाथ से चूची पकड़ी और दूसरे हाथ से उसकी चूत में भी उंगली डाल दी.

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मैं- जेठ जी, आज से मैं आपकी भोग्या पत्नी हूँ, आपको जो करना है, वो करो और वैसे मुझे भी आपका लॉलीपॉप अच्छे से देखना है और चूसना है. फिर किस छोड़ कर वो मेरे कान को चूसने लगी तो मैंने भाभी के कान में कहा- क्या आगे का काम नहीं करना है?भाभी ने कान चूसते हुए गर्दन हिला कर हां कहा और नशीली आंखें ले कर अपनी गर्दन आगे कर दी.

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एक गिलास दूध से मेरा मन नहीं भरा तो मैंने एक गिलास का और आर्डर दिया. प्रिया के मुँह से अब निरंतर मादक आवाजें निकलने लगीं, जो मेरा जोश बढ़ाये जा रही थीं … उसकी एक चूची का सारा रस पीने के बाद मैंने अब उसकी दूसरी चूची को मुँह में भर लिया और उसी तरह से चूसने लगा. कुछ देर बाद मामी की चूत में ही लंड का पानी छोड़ कर थोड़ा लेट गए और मुझे अपने ऊपर खींच लिया, बांहों में भर लिया.

जगत अंकल कान में मेरे बोले कि अपनी टांगें फैला कर थोड़ा मेरी गोंद में ऐसे बैठना कि मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुस जाए. मैं समझ गया कि शायद रिया को नींद आने वाली है। मैंने कुछ देर तक उसके होठों को चूसा और जिस्म से खेलता रहा।जब मैं उसके जिस्म को चाट कर थक गया तो हम दोनों अलग हो गए। रात भी काफी हो चुकी थी. इस दिमागी उथल पुथल के कारण मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और दुनिया को बेशर्मी दिखाते हुए अगले 2 मिनट में ही अपना हाथ गाड़ी चलते हुए मामा के लंड के उभार पर रख दिया.

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बिहार के बीएफ देहाती: लेकिन ऐसे रिलेशन्स में लोगों को दूसरे की फीलिंग्स से कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं- ज्यादा मजा किस के सथ चुदवाने में आया … मेरे साथ या चाचा के साथ.

गुड़िया मेरी क्लासमेट थी, पर हमने कभी बात नहीं की थी और ना ही मैंने कभी उसकी तरफ ध्यान दिया था. सर्राफा मार्केट और पिपली बाजार में खाने पीने की चीजों की बहुत शानदार दुकानें हैं. जब घर आया तो यही सोचने लगा कि भैया कब न आ जाएं और मुझे घर से निकाल दें.

अचानक मुझे ब्लू फिल्म के कुछ सीन याद आये तो मै उसके दूसरे दूध पर धीरे धीरे थप्पड़ लगाने लगा। उसे और भी मजा आने लगा रोजी की सिसकारियाँ बढ़तीं जा रहीं थीं। अब उसका एक हाथ मेरे बालों में था और दूसरा हाथ नीचे की तरफ बढ़ाकर उसने पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड महाराज को पकड़कर सहलाने और दबाने लगी।अब मैंने उसकी स्कर्ट को भी उतार दिया.

फिर बोली- यह तब तक अन्दर ही रहेगा, जब तक तुम ये नहीं बोलोगी कि हां मज़ा आ रहा है … इसको अन्दर रहने से तुझे मजा आ रहा है. इतने में अनवर अपना लंड पूरा खींच लिया और जोर से पकड़ कर मेरी जांघों को फैलाकर अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में जैसे ही फंसाया, मैं कस के लिपट गई. रवि मामा का लंड झटके मार रहा था और मैं उसके काम रस को पीने को उतावला था.