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धीरे धीरे मैंने उसकी दोनों चूचियों को छोड़कर उसके सपाट पेट पर चूमना चालू कर दिया. जब भाभी मुँह में मेरा लंड ले के चूस रही थी, तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था. पहले तो मैंने कोई रिस्पांस नहीं दिया, फिर थोड़ी देर बाद गुस्सा छोड़ कर मैं भी सौरव का साथ देने लगी.

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कमरे में अंधेरा था, इसलिए ये समझ पाना मुश्किल था कि कौन कहां सोया हुआ है.

आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है मुझे मेल करके बताना और कहानी पर अपनी राय देने के लिए कमेंट भी करना.

आह … क्या बताऊं दोस्तो, उस वक्त मुझे अपने आप पर काबू करना मुश्किल हो जाता था. दो मिनट में वापिस आईं तो मैंने पूछा- मैडम जी अब चलूँ?मैडम ने एक उंगली उठाकर रुकने का इशारा किया और मेरे बहुत करीब आकर यकायक मुझसे लिपट गयीं. भाभी बोलीं- देवर जी, आज तो तुमने मुझे ऐसा मज़ा दिया है कि मैं क्या बताऊं.

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थोड़ी देर में उसके हाथों में हरकत हुई और उसने मेरे लंड को हल्का सा टटोला.

बाप रे बाप! किस चक्रव्यूह में धकेल रहे थे बड़े मियाँ!” लेकिन अब तो न कहने की या पीछे हटने की स्टेज गुज़र चुकी थी तो मैंने एक कोशिश करने की हामी भर दी. रात के 10 बजते बजते सभी मर्चेंट अपने घर चल गए, बस कामिनी और मैं ही ऑफिस में अकेले रह गए. एक दिन अनुषी का फोन आया कि कल मेरे पति व ससुर सास तीनों देवर के लिए कल सुबह यूपी में लड़की देखने जाएंगे, लगभग दो दिन में आएंगे.

काम तो कल्पना में ही विराजता है और कल्पना शुरू होती है आधे-अधूरे, ढके छुपे शब्दों से, अनजाने में सीने से ढलके आँचल से, तिरछी-नज़र से, सहज़-इशारे से, झुकती पलकों में अधूरे से इकरार से, महबूब के अपने निचले होंठ को दांतों से तिरछे काटने में. तकरीबन पांच मिनट तक भाभी की गांड मारने के बाद मैंने फिर से उसकी चुत में लंड डाल दिया. मेरा हर धक्का निहारिका के पिछवाड़े पर लगने से पूरे कमरे में पटपटपट पटपटपट की आवाजें गूंज रही थीं.

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उन्होंने अपना रूम नम्बर कन्फर्म किया और मैं उनके कमरे में पहुँच गयी. लेकिन तब भी जब भी मैं अपना वीर्य उसके अन्दर नहीं गिराता था तब वो एक दर्द सा महसूस करती थी. इससे पहले कि नैना को मेरे खड़े लंड का एहसास होता, मैंने उसे अपने बगल में बिठा दिया और पूछा- क्या बात है बच्चा आज बड़ा प्यार आ रहा है चाचू पे … क्या चाहिए तुझे?तो वो मुस्कुराने लगी और बोली- चाचू प्लीज़ आज मूवी दिखाने ले चलो ना.

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मौसी ने भी अपनी चुत पसार दी और इशारा कर दिया कि चुत में अपना लंड पेल दे.

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इस छोटी सी मुलाकात में ही मैंने अपने यार का दीदार कर लिया और मैं खुश हो गई लेकिन मुझे नहीं पता था कि उससे मिलने के रास्ते में मुझे इस तरह से तीन मर्दों के लंड भी मिल जायेंगे. मगर जाने से पहले उसने मुझसे वादा लिया कि रात वाली बात कभी किसी से न कहूँ. ऐसा कहते हुए किस करने के साथ मम्मों को दबाते हुए मैंने उसकी चुदाई को जारी रखा.

यह सुनकर मैं बहुत शर्मा गई, मैं समझ गई थी कि भाई का लंड अब मेरी चूत फाड़ेगा. मेरे सामने बैठ कर मेरी फुद्दी को घूरने लगा। मुझे सच में बड़ी शर्म आ रही थी। मगर इस लुच्चपने का भी अपना ही मज़ा होता है। थोड़ी शर्म, मगर बहुत सारा रोमांच।उसने मेरी फुद्दी को अपने हाथ से छूकर देखा, उसके छूने से मुझे करंट सा लगा। उसने मेरी फुद्दी के दोनों होंठ खोल कर देखे- अरे वाह, क्या खूबसूरत गुलाबी फुद्दी है. कुछ पल तक चूचों को चूसने के बाद उसने पैटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे खींच दिया.

मैंने और तड़पाना ठीक नहीं समझा और मुँह से उसके चूचुक पर पड़ी गुलाब की पंखुरियाँ निगल गया और चूचुक चूसने लगा.

जब लण्ड का सुपारा अन्दर तक जाता तो आह ऊह की आवाजें निकाल कर मेरा जोश बढ़ाती थी. मौसी की हल्की सी आह तो निकली, पर इस बार उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ा.

मैं अपने लंड को इस तरह तो गीला नहीं करवाना चाहता था, पर उस टाइम ज्यादा जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता था. अब तो गरबा क्लास बंक करके घूमने, मूवी देखने, खाने के लिए बाहर जाने लगे. मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे उसके होंठों से लग के वाइन और भी नशीली हो गयी थी.

सुनिए! प्लीज़ आप …”कुछ मत कहिये वसुन्धरा जी! ये एक सपना था और सपनों को सिर्फ याद किया जाता है, आलम में जिक्र कर-कर के उनको रुसवा नहीं किया जाता. मौसी को दर्द हो रहा था … और होगा भी क्यों नहीं, कितने साल बाद उनकी चूत को लंड मिला था. फिर मैंने उससे कहा- जान अगर तुमको एतराज न हो, तो तुम्हारी कमीज़ उतार दूं?उसने आँख मारते हुए कहा- उतार दो.

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उसने एक नीले रंग का गाउन पहन रखा था जिसमें से उसके उरोज ज्यादा तो नहीं दिख रहे थे मगर हल्की सी घाटी यह जरूर बता रही थी अंदर और भी गहराई है. मुझे आपका अच्छा फीडबैक मिला, तो मैं अपनी दूसरी कहानी आपको जल्द ही बताउंगी. उन्होंने अपने होंठ मेरे काम्पते हुये होंठों पर रख दिए, मेरे तो पूरे जिस्म में करंट सा दौड़ गया.

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वो भी मान गए और बोले- बहू वैसे वो तो मान जाएगा, पर मैं उससे कैसे बोलूं?वनिता बोली- बाबूजी वो जब घर आए, तो आप बस बाहर चले जाना, आगे का काम मैं सम्भाल लूंगी. मैंने काजल से पूछा- जल्दी बताओ … कहां निकालूँ?वो मचलते और गांड उठाते हुए बोली- आह … मेरी चूत में ही निकाल दो … मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ. घर पर हम मिल नहीं सकते थे, तो किसी काम के बहाने बाहर जाकर ही ये हो सकता था.

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खाला मेरी दोनों दुल्हनों को लेडी डॉक्टर के पास ले गयी और डॉक्टर ने सारा और ज़रीना दोनों को 3 दिन के लिए चुदाई ना करने का हुक्म दे दिया.

लड़का फौज में मेजर है, बहुत ही शरीफ लोग हैं और ऊपर से अपनी ही जाति के हैं.

फिर उसने मेरे गालों को टटोलते हुए मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया. मेरी हालत देख वो बोला- मेमसाब, कोई परेशानी है तो बताइये, शायद मैं आपकी कोई मदद कर सकूँ!तो मैं बोली- मेरी कमर में बहुत दर्द है. बलजबरी सेक्सी वीडियोमेरा जोश हर पल उबलता हुआ मेरे लंड के धक्कों को उसकी चूत फाड़ने के लिए उकसा रहा था.

जब उसको समझ आ गया कि मैं उखड़ गया हूँ, तो वो दोपहर का हमारे घर आ गई. तेरा रुकना-खाना सब फ्री … आज के बाद कभी भी तू आ सकती है, ये मेरी गारंटी है। मैं रहूं ना रहूं, बस मेरा नाम बता देना. मैंने कहा- मैडम आप घर जाइये … मैं यह बंडल अपनी साइकिल पर आपके घर पर छोड़ दूंगा … आप समय बता दीजिये कि आप कब घर पर मिलेंगी?ठीक है राजे … तुम तीन बजे यहाँ से यह कापियां ले जाना … मैं साढ़े तीनतक घर पहुँच जाऊंगी.

मैंने टीवी बंद किया और उठा कर किचन की तरफ जाने लगा, तो किचन की ओर से आती हुई मामी अचानक मुझसे टकरा गईं. तभी भोला सिंह ने मेरी चूत में अपनी जीभ रगड़ दी और मेरी चूत को फैलाकर ऊपर करके चाटने लगा.

मैं भी ड्राइवर भैया के बगल में बैठ कर टीवी देखते हुए आम खाने लगा और मैं उनसे बातें भी कर रहा था.

वो बोला- तू इसे अपने लंड का स्वाद दे … और मैं इसकी चूत की सफाई अपनी जीभ से करता हूँ. फिर उसने अपने लंड को पकड़ा और सुमिना की चूत में घुसा दिया और दोबारा से उसके होंठों को चूसने लगा. पर मजा नहीं आया तो बाहर के मौसम में बारिश होती देख कर हम दोनों छत पर आ गए और उधर ही चुदाई का मजा लिया.

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भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैंने बड़े रोमांटिक मूड में आगे बोल दिया- मुझे तो कोई और पसंद है. करीब 10 मिनट में मैं झड़ गई और मेरे बाद उसने भी अपना पानी मेरी जवान चुत में छोड़ दिया. अब मैं केवल चड्डी में थी क्योंकि उस ड्रेस के साथ ब्रा नहीं पहनी थी.

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जो कहानी मैं आप लोगों को सुनाने जा रहा हूं वह केवल एक कहानी नहीं है बल्कि एक सच्चाई है. रफ्तार बढ़ी, आनन्द बढ़ा, लण्ड फूलकर और मोटा होने लगा, धकाधक दौड़ते दौड़ते मंजिल आ गई और लण्ड ने पानी छोड़ दिया.

अब वो रोटी बेलने लगी, मैं उसके बगल में खड़ा होकर बारी-बारी दोनों निप्पल को दबाता और चूत के अन्दर उंगली करता और पुत्तियों को मसलता.

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सरिता और नीना की कामुकता से भरी ये मस्ती को देखकर मेरा मन भी बेकरार हो गया. क्या बताऊं यार इतना सेक्सी ओर हॉर्नी अहसास मैंने मेरी जीएफ के साथ भी कभी फील नहीं किया था, जितना आज उसके साथ कर रहा था. अब आगे:शाम के 7 बजे के करीब मेरी नींद खुली, तब वहां बेड पर सिर्फ दिशा ही सो रही थी.