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भाभी अंदर आकर बोली- दूसरा बाथरूम खाली है, वहाँ नहा लो!मुझे भाभी के ऊपर बहुत गुस्सा आया मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकता था.दुकानवाला माफ़ी मांगते हुए बोला- अरे, मैं तो मजाक कर रहा था! ही…ही…ही…स्कूल का कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद मैं स्कूल के गेट के बाहर खड़ा हो गया.

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फिर मैंने उसे कहा कि अपनी पैंट उतार दे तो उसने मना कर दिया मगर थोड़ा जोर देने पर वो मान गई और उसने अपनी पैंट उतार दी. इतने में सुनीता कस्टमर से चुदवाकर बाहर आई। मैंने उसे मौसी ने जो कहा वो बताया तो बोली- बिल्कुल सच है, मुझे यह सब भाने लगा है। साले मूछ पे ताव देने वाले मर्द भी हमारे भोसड़े पे सब कुर्बान करने चले आते हैं. माँ तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई थी, उनकी निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ मूह्ह्हमेरी उंगली अंदर जाने लगी और उन की सिसकियाँ भी तेज़ होने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्हामेरी माँ की चूतएक दम गीली थी, मेरी उंगली अंदर बाहर होने लगी.

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आशा करता हूँ सभी चूतों और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी. और जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ! मम्मी अंकल के घर पर जा घुसी!फिर मैं भी उनका पीछा करता अंकल के घर की तरफ निकल पड़ा. मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और अपना 7 इंच का लौड़ा अपनी प्यारी बहन की चूत में डाल दिया.

आज मैं एक कामवाली के वजह से कुंवारा नहीं रहा, मेरा पहला सेक्स हो गया था।इतने में शर्मा आँटी का कॉल आया- केदार, आज शीतल नहीं आई हमारे यहाँ काम करने।मैं- हाँ, वो आज हमारे यहाँ भी काम करने नहीं आई, वो कल आएगी, आज उसकी तबियत ख़राब है।मैं और शीतल हंसने लगे। पर शीतल अचानक थोड़ी बैचेन हो गई।मैं- क्या हुआ?शीतल- हमने जो भी किया वो सब गलत है, मैं एक शादीशुदा औरत हूँ। पर मैं भी…. मैंने कभी बेड पर लिटा कर चोदा तो कभी उसे घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत में अपना बड़ा लंड डाला फिर उसकी गांड में अपना लंड डाला। उसने आज से पहले कभी गांड नहीं मरवाई थी इसलिए उसकी गांड टाइट थी। मैंने पहले तो थोड़ा धक्का मारा जिससे मेरा आधा लंड उसकी गांड के अन्दर चला गया। फिर मैंने अपनी गति बढ़नी शुरू की जिससे उसकी गांड का छेद खुलता गया.

” नेहा ने अपने उरोजों को अपने हाथों से सहलाया और अनीता दीदी की तरफ देख कर मुस्कारने लगी.

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थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव.

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”सच, आपका बदन कैसा चिकना है… हाथ लगाने का जी करता है!”उसकी बड़ी बड़ी आँखें मेरी तरफ़ उठ गई.

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जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी।मैंने उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबाने लगा. मैं दुकान में पहुँचा, दो कोल्ड ड्रिंक मंगाए और पिंकी को लेकर अन्दर के कमरे में चला गया. प्रेषक : अमित शुक्लालेकिन मैं अब मुट्ठ मार-मार कर थक गया था और उसको हर हाल में चोदना चाहता था !एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और मेरे परिवार को एक शादी में मुंबई जाना पड़ा एक हफ्ते के लिए।मैंने उसको अपने घर बुलाया तो थोड़ी ना-नुकुर के बाद आने को तैयार हो गई.

मैं उस बुक-स्टाल पर चला गया और कुछ किताबें खरीदी और अपने घर के लिए टैक्सी लेकर निकल पड़ा. आह स्स्स्स गुलुप गुलुप म्मम्मम्म म्मम्मम्मम म्म्म्मम्मअब तक मेरी चूत भी एक दम गीली हो गई थी और एजेंट पीछे से मुँह घुसा के मेरी चूत का रस चाट रहा था। फिर वो उठा और उसने अपने लंड का सुपारा मेरी गांड के छेद पर टिका दिया। मैं एक दम से चीख उठी- नहीं नहीं ! मेरी गांड मत मारना, बहुत दर्द होगा ! नहीं …. सोनिया- यहाँ? सवाल ही पैदा नहीं होता … अगर किसी ने मुझे देख लिया या पहचान लिया और अगर ग़लती से मीडिया को पता लग गया तो मेरी बनाई सारी इज़्ज़त और गुण्डों में मेरा ख़ौफ सब कुछ खत्म हो जाएगा.

खासकर मेरे लिए… लड़के का लण्ड सख्त हो चुका था और बेकाबू भी होता जा रहा था क्योंकि अब उसकी छलांगे मेरी गाण्ड महसूस कर रही थी.

नमस्कार दोस्तों,सबसे पहले तो मैं आप सबका धन्यवाद करता हूँ कि आप सभी को मेरी पिछली कहानीमैं और मेरी प्यारी शिष्याकाफी पसंद आई।साथ ही आपसे क्षमा चाहता हूँ कि मेरी अगली कहानी में इतना विलम्ब हुआ। दरअसल बीच में ज़िन्दगी कुछ ज्यादा ही व्यस्त हो गई थी, पहले तो यू एस ए का दौरा और फिर मेरा तबादला नई दिल्ली में. मैं बहुत थक गई थी… हम सभी ने एक एक पैग और लगाया। मेरी गाण्ड अभी भी दर्द कर रही थी… मगर पैग के बाद मुझे फिर से सरूर होने लगा था. सोनिया- यहाँ? सवाल ही पैदा नहीं होता … अगर किसी ने मुझे देख लिया या पहचान लिया और अगर ग़लती से मीडिया को पता लग गया तो मेरी बनाई सारी इज़्ज़त और गुण्डों में मेरा ख़ौफ सब कुछ खत्म हो जाएगा.

पर मम्मी का लेक्चर अभी भी चालू था…!!और अगर कभी ज्यादा रिसाव हो तो सावधान रहना कि कपड़े गंदे न होने पाएँ… और खून देख कर घबराना नहीं. इसका कारण ये था कि मेरी माहवारी ख़तम हुए अभी एक ही दिन बीता था और जैसा कि आप सब लोग जानते हैं ऐसे दिनों में चूत की प्यास कितनी बढ़ जाती है. आंटी बोली- रुको मुझे मूतना है !तो मूतिये आंटी जी ! यह तो मेरे लिए प्रसाद है, चूतामृत यानि बुर का अमृत !”आंटी खड़ी हो कर मूतने लगी, मैं झुक कर उनका मूत पीने लगा। मूत से मेरा चेहरा भीग गया था। उसके बाद आंटी की आज्ञा से मैंने उनकी योनि का स्वाद चखा। उनकी चिकनी चूत को पहले चाटने लगा और फिर जीभ से अंदर का नमकीन पानी पीने लगा.

मैं उनका लण्ड बाहर निकालना चाहती थी मगर उन्होंने नहीं निकालने दिया और फिर मुझे भी पता था कि दर्द तो कुछ देर का ही है। वैसा ही हुआ, थोड़ी देर में ही उनका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में था। दोनों तरफ से लग रहे धक्कों से मेरे मुँह से आह आह की आवाजें निकल रही थी…फिर राठौड़ अंकल ने मेरे सामने आकर अपना तना हुआ लण्ड मेरे मुँह के सामने कर दिया. हाय राम… चुदने की इच्छा तो मेरी ही थी, पर ऐसी नहीं कि वो मेरी चटनी ही बना दे…आप बतायेंगे पाठकगण, कि मैं उससे पीछा कैसे छुड़ाऊँ? ना… ना… चुदना तो मुझे उसी से है… पर इतना नहीं….

आजकल सोशल साईट का जमाना है … मेरी प्रोफाइल पिक्चर देख कर सब लोग मेरे फ्रेंड बनना चाहते थे।मैं नाम से सेक्सी श्रेया आहूजा और फिगर तो पंजाबन वाली लम्बे बाल गोरा चिट्टा रंग …पीले रंग की टॉप में गोल गोल मम्मे और वक्ष-रेखा पर तिल! नीचे शॉर्ट-स्कर्ट. अन्तर्वासना के सभी दोस्तों का ढेर सारा प्यार मिला उनके ई-मेल के ज़रिये ! काफी अच्छा लगा इतने सारे ईमेल देख कर. जैसे जैसे मुझे सेक्स के बारे में पता चलता गया मेरी नज़र बदलती गई और मेरी नीयत बदलती गई.

भाभी अंदर आकर बोली- दूसरा बाथरूम खाली है, वहाँ नहा लो!मुझे भाभी के ऊपर बहुत गुस्सा आया मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकता था.

उधर अनिल के चाटने से मैं भी झड़ चुकी थी।अब अनिल का लौड़ा मुझे शांत करना था।अनिल सोफे पर बैठ गया और अनिल के आगे उसी की तरफ मुंह करके उसके लौड़े पर अपनी चूत टिका कर बैठ गई। उसका लोहे जैसा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया. मेरे सामने नन्ही मुन्नी सी गुड़िया नंगी लेटी थी और मैंने उसे पकड़ लिया। और जब अब पकड़ ही लिया था तो चोदना तो बनता ही है न !”मुझे उसकी हरामीपने की बातें सुन कर शर्म आ रही थी मगर मुझे उसके धक्कों से मजा भी आ रहा था।आह्ह्ह्ह …. मुझे फिर से दर्द होने लगा था… आधे से ज्यादा लण्ड अंदर जा चुका था… मेरा दर्द बढ़ती जा रहा था। मैंने फिर से उसका लण्ड पकड़ लिया और रुकने को कहा.

फिर भाभी ने पूछा- दूसरी शर्त क्या है?तो मैंने बोला कि मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ. मैंने पहले तो सोचा कि मेरे से 15 साल छोटी लड़की है, कुँवारी है, मुझे गंदा नहीं सोचना चाहिए…पर दिल और लंड मेरे दिमाग़ पर हावी हो गये, और उसको देख कर मैंने अपना लंड मसलना शुरू कर दिया…मैंने देखा कि जल्दी ही चाँदनी उसके छुपा-छुपी के खेल में नहीं मुझमें ज़्यादा ध्यान दे रही थी.

तभी तान्या की आँखें खुल गई और उसे पता चल गया कि मैंने उसे चूमा किया है, मैं घबरा कर पीछे हो गया. फ़िर मैंने उसका पूरा पायजामा उतार दिया अब वो पूरा नंगा लेटा था मुझे उसे देखने में शर्म आ रही थी. रात के तीन बज़े तक उधर संगीत चला, इधर चुदाई!इतने में उसने मुझे तीन बार चोदा, पहली चुदाई में ही तीन बार चुदी.

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तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी।कैसे शुरुआत करें….

मैंने उसकी पेंटी नीचे की तो चिंकी की चूत देखते ही मैं मस्त हो गया, मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरू किया. लण्ड व चूत से पच्च पच्चर फच्च फच्चर की गुन्डी आवाजें, मस्ताई हुई रीटा की सुरीली ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ सिसकारियाँ और किलकारियाँ, पलंग की चरमराहट राजू के दिल दहला देने वाले ठप्पों की थाप की आवाज और दोनों की बहकी बहकी साँसों ने वातावरण को और भी गर्म और रंगीला बना दिया. मुझे समझते देर न लगी और मैंने खिड़की से झाँका तो मैंने जो सोचा था उससे ज्यादा देखने को मिला.

उसने अब तक मेरे हाथ पकड़े हुए थे… अब मुझे उनका भी होश नहीं था…उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे, वो बोलता गया… मुझे कुछ भी… अच्छा नहीं लगता… ना खाना… सोना भी… बस आप… ही आप… मैं आज के बाद आपको कुछ नहीं कहूँगा…देखूँगा भी नहीं… चाहे तो आप मुझे मार सकती हैं…यह कह कर उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया…अब मुझे होश आया. उसने डरते डरते मेरे गाउन के अन्दर हाथ डाला और टिकेट पकड़ कर बाहर खीचने की कोशिश करने लगा. आयशा की सेक्सीवो मेरी बाईक पर बड़ी मुश्किल से बैठ पाई क्योंकि मेरे पास यामाहा एंटआयिसर बाईक है जिसकी सीट काफी छोटी होती है.

उन्होंने मेरी टाँगें फैलाई और बीच में आकर बैठ गए और अपना लौड़ा चूत पर टिका कर बोले- इसको ज़रा सही जगह पकड़ कर रखना!उन्होंने मुझे पूरा जकड़ लिया. शायद उसके बॉस श्यामलाल पहले भी उसकी गांड मार चुके थे इसलिए मैंने ज़ोर का धक्का लगा दिया जिससे मेरा लगभग आधा लंड स्वाति की गांड में समा गया और वो चिल्ला उठी.

सेक्सी आंटी की चुदाई का मौक़ा मुझे तब मिला जब शहर में दंगों के कारण कर्फ्यू लगा हुआ था. उन सब में नीला आज बड़ी सेक्सी लग रही थी। उसने नीली साड़ी कस कर पहनी थी और गहरे गले का बिना बाहों वाला ब्लाउज़ पहना था।उतने में मौसी नीचे आई और बोली- आ री ! तू ही है क्या जूली की सहेली? बहुत तारीफ़ करती थी. इस तरह मेरे और नीना के बीच एक तरह का एग्रीमेंट हो गया और हमने नई जिंदगी की शुरुआत कर दी.

और तो और वो समझेंगे भी नहीं कि यह सिर्फ दोस्ती है… और इससे ज्यादा कुछ नहीं…मैं इस बात से परेशान नहीं थी की घरवालों को पता चला तो क्या होगा. पर जब राजू ने अपना लण्ड का सुलगता सुपारा रीटा की नन्ही चूत के चीरे पर आगे पीछे फिसलाया तो रीटा का बदन ढीला पड़ गया और ना-नुकर हाँ में तबदील हो गई. वो पूरी तरह मेरे ऊपर लेट कर मुझे चोद रहा था…उसकी छाती मेरे दोनों स्तनों को दबा रही थी और वहाँ पे बॉस-रस होने की वजह से चिपक भी रही थी…वहाँ से अभी फच फच फच की आवाज आ रही थी….

मैंने देखा कि उसकी जांघ पर कुछ गीला-गीला सा लगा था … मैं समझ गया था कि रीना अब पूरी तरह से गर्म हो गई हैं और यह अब मोटे से मोटा लंड भी खा लेगी.

!भाभी ने कहा- मैं खुद कर लूँगी।मैंने कहा- मैं एक बार कर देता हूँ, फिर खुद कर लेना।तो भाभी ने कहा- ठीक है।मैं भी तेल ले आया और उनकी टाँग पर तेल लगा कर मालिश करने लगा। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।मैं उनकी जांघों तक उन्हें मसलने लगा। उनकी आँखें अब बंद हो गई थीं. उसने इतनी जोर से मेरी पेंटी को खींचा कि वो फट गई पर सब कुछ भूल के वो बस मेरी चूत सहलाने में लगा था … मैं तो मज़े से मरी ही जा रही थी … झड़ने ही वाली थी कि उसे दूर धकेला … झट से नीचे उतर कर उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया.

कभी कभी सब घर वालों और राजू के साथ टेलीवीज़न पर पिक्चर देखते तो रीटा राजू की गोद में टैडीबियर लेकर बैठ जाती और टैडीबियर के नीचे रीटा के हाथ राजू के लण्ड को खूब सहलाती और राजू रीटा की चूत रगड़ता रहता. … फ़िर मेरे पास और कोई चारा नहीं था सिवाय उसकी बात मानने के, मैं ने चुप चाप सर हिला कर हाँ कह दी… उसने कहा- वाह मेरी बहना ! आज तो मजा आ जाएगा… आज तक बस ब्रा और पैंटी ही मिली थी मुझे तुम्हारी आज तो पूरी की पूरी रूबी मेरे सामने खड़ी है… फ़िर उसने मुझे उसका पायजामा नीचे करने को कहा, मैंने वैसा ही किया. उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया, लगभग 11 बजे अनिल चला गया और उसके बाद मैंने और ज्योति बातें करने लगे.

मर गई रे ! करके चिल्ला उठी।अब मैं अपनी उंगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी उंगलियाँ किसी आग की भट्टी में अन्दर-बाहर हो रही हैं। उसकी चूत बहुत गर्म थी और मेरी उंगली के अन्दर -बाहर करने की वजह से अपना रस फेंक रही थी। मेरी उंगलियों के स्पर्श से वो आह्ह……. 15 मिनट तक लण्ड चुसवाने के बाद मैंने उसके मुँह से अपना लण्ड निकाला और उसकी चूत के कोने पर रख दिया और एक जोर का झटका मारा. उसके बाद मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया। उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी और मेरे साथ वो भी झड़ गई थी…मैंने उसे पकड़ कर बेड के ऊपर ले लिया वो मेरे सीने पर थी.

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पिंकी अन्दर आते ही बोली- मनुजी, मुझे घबराहट हो रही है!मैं बोला- कमसिन लड़कियों से चुसवाते वक़्त नहीं होती? असली मजा ले लो, फिर याद करोगी. शायद ज्योति ने उससे पहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई थी, मगर मैंने उसकी एक भी ना सुनी और उसके दोनों चूतड़ों के बीच में अपना लण्ड घुसाने लगा. प्रेषक : रिन्कू गुप्ताप्रिय पाठको,मेरा नाम रिंकू है जैसा कि आप लोग पहले से ही जानते हैं.

सोनू ने हाथ से उसे नाकाम रोकने की कोशिश की- भैया… ये मत करो… मुझे शरम आ रही है… मुझे बेवफ़ा मत बनाओ!’ सोनू ने ना में हाँ करते हुए कहा. कि अनिरुद्ध का एक्सिडेंट हो गया है…अनिरुद्ध के हाथ पाँव टूट चुके थे उस दिन के बाद तीन महीने तक वो कॉलेज़ नहीं आया…!!!अब मेरे और वेदांत के रिश्ते में भी स्पष्टता आ गई… आखिर उसने अपने प्यार का इज़हार जो कर दिया था. सेक्सी पिक्चर दिखाओ इंग्लिशकहानी के पिछले भाग:मैं फिर से चुदी-1मैं फिर से चुदी-2उसने अपने लंड की मलाई मेरी गांड में छोड़ दी.

सभी बच्चे बस से उतरने लगे, मैं अपनी जगह पर खड़ी उसका उसकी सीट से हिलने का इंतज़ार कर रही थी.

फिर वो टी वी का रिमोट मुझे देकर बोली- तुम टी वी देखो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूँ. मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चोथाई लंड उसकी चूत में समा गया.

आह!’‘लो ये लो!’ और मैंने लंड को उनकी चूत के एकदम अंदर मुँह पर टिका दिया और मेरी पिचकारी शुरू हो गई।दोनों ने एक दूसरे को कस कर पकड़ा था. फिर मैं कमरे से बाहर गया और अपने दोनों हाथों में कुछ लेकर वापस आ गया और फिर मैंने अपने दोनों हाथ नीचे से उसकी बनियान में डाल दिए और जो मेरे हाथों में था वो मैंने उसकी दोनों चूचियों के ऊपर रख कर उनको पकड़ लिया ताकि वो उस चीज को गिरा ना दे. लहरें आती और जाती हैं…फ़ेनिल उठता है और शांत हो जाता है…किनारे की रेत बह जाती है और वापिस आ जाती है….

!”मैं दर्द के मारे कसमसाने लगी थी पर वो मेरी कमर पकड़े रहा और 2-3 धक्के और लगा दिए।मैं तो बिलबिलाती ही रह गई !आधा लण्ड अंदर चला गया था। उसने मुझे कस कर पकड़े रखा।ओह… जस्सी बहुत दर्द हो रहा है.

उसके बलिष्ठ प्रहारों को भी मैं कितना झेलता, कुछ ही मिनटों में मेरा वीर्य भी लण्ड से छलक पड़ा. ”और पहले पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। अब मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर हल्के से ही चूत के मुँह पर स्पर्श किया था कि तुरंत अन्दर प्रवेश कर गया। इस बार ज्यादा मज़ा आ रहा था …… अब वो खुद ऊपर नीचे हो रही थीं।” मर गई रे……तू मेरा असली बेटा क्यूँ नहीं हुआ ! वर्ना तुझसे तो रोज़ चुदवाती…. हम दोनों एक दूसरी की हमराज़ हैं मुझे सब पता रहता है कि आजकल उसका कितने लड़कों से चक्कर है किस किस से चुदवाती है और उसको मेरा सब कुछ पता रहता है.

सेक्सी दुल्हन की सुहागरातमैं तुम को अच्छी नहीं लगती क्या…?तो वो बोला- नहीं भाभी, आप तो बहुत अच्छी हैं…मैंने कहा- तो फिर तुम मुझसे हमेशा भागते क्यों रहते हो…?वो बोला- भाभी, मैं कहाँ आपसे भागता हूँ?मैंने कहा- फिर अभी क्यों मेरे कमरे से भाग आये थे, शायद मैं तुम को अच्छी नहीं लगती, तभी तो तुम मुझसे ठीक तरह से बात भी नहीं करते।‘नहीं भाभी, अभी तो मैं बस यूँ ही अपने कमरे में आ गया था. बहरहाल पीछे के दरवाजे से कमरे में घुसा तो देखता हूँ कि नीना है ही नहीं और दोनों बच्चे सो रहे हैं.

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एक घंटे के बाद मैंने उनको कॉल किया और कहा- मैं अभी भी ऍफ़ सी रोड पर ही हूँ, अगर घर चलना हो तो बता दो. में नंबर आ गया और मैंने वो नौकरी भी छोड़ दी। फिर उनका तबादला भी हो गया, कभी कभी फोन आता लेकिन कभी गलत बात उन्होंने नहीं की।एक बार बी. मैं तो निहाल हो गई, मुकेश मेरी चूत को चूसने लगा, मैं मुकेश के सर पर हाथ फिराने लगी.

उसने मुझे जोर से दबोच लिया और बोली- वाह, तुमने मुझे जन्नत में भेज दिया, अब यह रूपाली सदा के लिये तेरी हो गई, जब जी चाहे बुला लेना, मैंने ऐसा मजा आज तक नहीं लिया. ”(मीना कुछ नहीं कहती)तुम्हारे मम्मी-पापा कितने अच्छे हैं… दोनों अभी भी जवान लगते हैं … !”(मीना ज़रूर मुस्कुराएगी)कुछ देर उसके माँ-बाप, भाई-बहन की तारीफ करने के बाद …. अब दीदी मुझे तरह-तरह के कारण देने लगी मगर मैंने बिना कुछ कहे चाभी उठाई और बाहर आ गया और दीदी के कैबिन में जाकर बैठ गया.

‘क्या तुम रोज़ एंजोय करते हो…?’‘अरे कहाँ विनोद… सप्ताह में एक बार या फिर दो सप्ताह में…’‘इच्छा तो रोज होती होगी ना…’‘बहुत होती है… हाय राम… तुम भी ना…’ अचानक वो शर्म से लाल हो उठी. उन्होंने कहा- एक आप हैं जो मेरा साथ चाहते हैं और मेरे पति को मुझसे कोई मतलब ही नहीं है, शादी के दो सप्ताह बाद ही वो अमेरिका वापस चले गए यह बोलकर कि मेरा आश्रित वीजा बनवा लेंगे और मुझे वह बुला लेंगे…वो मायूस हो गई…फिर उसकी आँखों में आंसू आ गए. अब तो मैं बेसुध हो गई, मेरे मुँह से अपने आप स्वर निकलने लगे- हाय जीजू! इसे मत चूसो! अरे मादरचोद, मेरी जान निकल रही है! ओ गांडू, ओ भोसड़ी के!लेकिन जीजू ने एक नहीं सुनी, उन्होंने तो पूरी चूत की एसी चुसाई की कि कई बार ऐसा लगा कि मेरी चूत से पानी ही पानी निकल रहा है.

फिर राजू के डैडी की ट्रांसफर किसी और शहर में हो गया और राजू वहाँ से दूसरे शहर में चला गया. जैसे ही मैंने दरवाजा बजाया तो योगी की छोटी बहन आयशा ने दरवाजा खोला, सुबह का वक्त होने की वजह से बाकी सारे सोये हुए थे तो मैं आयशा से बात करने लगा.

वो जल्दी ही समझ गई कि अब्बास अब क्या चाहता है… जो अब्बास ने उससे थोड़ी देर पहले कहा था, वो उनको सच करने जा रहा था.

फिर मैंने धीरे से उसकी पेंटी उतार दी और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपना मुँह रखा वो सिसकारियाँ लेने लगी और रुकने के लिए बोलने लगी. सेक्सी वीडियो दिखाओ चोदामगर मुझे टीचर की नौकरी पसंद नहीं आ रही थी इसलिए मैंने स्वाति दीदी से सिफारिश लगाने के लिए कहा, तो दीदी ने कुछ दिनों तक इन्तजार करने के लिए कहा. बहू सासुर की सेक्सी व्हिडीओमैंने बोला- ठीक है, जब तक तुम नहीं चाहोगी मैं सेक्स नहीं करूँगा … लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हू और तुम्हारे पूरे बदन को मैं चूमना चाहता हूँ…यह सुनने के बाद उसने मुझे नहीं रोका।फिर मैंने उसका कुरता उतारा, काले रंग की ब्रा में क्या चूचियाँ थी बिल्कुल मक्खन जैसी…. चूत पानी छोड़ रही थी… चिकनी हो गयी थी… लंड फिसल कर अन्दर घुसता चला गया… कामिनी के मुंह से सिसकारी निकल पड़ी.

लेकिन शायद आयशा कि चीख की वजह से ज्योति को यह याद नहीं रहा कि उसने ब्रा-पेंटी के अलावा और कुछ नहीं पहना है.

”मेरी रीता… मसल डाल मेरी चुंचियां… जोर से… अ आ अह ह्ह्ह ह्ह्ह हह… ”उधर साहिल राहुल की गांड चोद रहा था. अंकल मम्मी से बात करते करते उन्हें कुछ इशारा कर रहे थे पर मैं समझ नहीं पाया कि दोनों में क्या इशारेबाज़ी चल रही है. मैं इसी उधेड़बुन में थी कि तभी वो आगे बढ़ा, उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़कर.

फिर मैं उठा और बाथरूम में से तेल की बोतल ले आया और थोड़ा सा तेल अपने लण्ड और थोडा सा उसकी चूत में डाल दिया ताकि लण्ड आसानी से अंदर घुस जाए और उसके बाद मैं अपना लण्ड झटके से अंदर घुसाने लगा मगर झटके की वजह से आयशा फिर से चिल्ला उठी और मना करने लगी लेकिन मैं तेज-तेज झटके मारता रहा. मैं बहुत ही दुबला पतला हूँ, मेरे शरीर पर नाम मात्र के बाल हैं। झांट और सर के बाल के अलावा छाती या हाथ पैर पर बाल नहीं हैं। मतलब यह है कि मैं अगर साड़ी में भी आ जाऊँ तो लोग मुझे पहचान नहीं पाएंगे, मेरी आवाज़ भी वैसी ही लड़कियों वाली है।खैर, दोस्तो, यह कहानी नहीं सच्ची घटना है. तीनों के ये बड़े-बड़े लंड … शहरी लड़कों के छोटे और पतले होते हैं पर ये तो विशाल आकार के लण्ड थे।एक ने अपना लंड मेरे मुँह में डाला और एक मेरे मम्मों को चूसने लगा।तभी एक झटका मेरी चूत पर लगा ….

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उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया. वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. ”मेरा लौड़ा अब चोदने को बेताब हो उठा था लेकिन मुझे कुछ नहीं करना पड़ा, चाची ने मेरा एक हाथ पकड़कर नीचे रख दिया और कहा,” बेटा इसको सहला दे इसमें बहुत खुजली है !”तब मैंने कहा,” चाची जी यह तो बहुत गर्म है।”तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,”मुझे चाची मत बोल … या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो ….

मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो बोल रही थी- चाटो प्लीज़ आआआआ ह्ह्ह्हह्ह और चाटो ! जोर जोर से चाटो ! खा जाओ मेरी चूत को ! आआअ ह्ह्ह्हह्ह सीईईईइ म्मम्मम आआआ ह्ह्हह्ह.

मुझे महसूस होने लगा कि मेरा जादू उस पर सही असर कर रहा है। फिर मैंने भी उससे गाने की जिद की तो दोस्तों पता है उसने क्या गाया?ज़रा ज़रा बहकता है, दहकता है आज तो मेरा तन बदन…मैं प्यासी हूँ… मुझको भर लो अपनी बाँहों में.

फिर मैंने उनसे कहा- भाभी! भैया का कितना बड़ा है?तो भाभी ने कहा- वैसे तो तुम मुझे चोदना चाहते हो और अभी भी मुझे भाभी बोल रहे हो? तुम मुझे प्रिया कह कर बुलाओ, मुझे अच्छा लगेगा और ऐसे सवाल पूछ कर क्यों समय खराब कर रहे हो? फिर मैंने इस बेकार के सवालों को छोड़ते हुए प्रिया के बाल पकड़ लिए और फिर से उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसका जोश खत्म ना हो और चुदाई में ज्यादा मजा आये. वो मेरे गोलवे दबाते रहा और चोदता रहा… मुझे बहुत मजा आया…फ़िर मैंने उसे खड़ा किया और मैं उस पर चढ़ गई और धक्के लगाने शुरु कर दिए… वो मेरे कूल्हे दबाने लगा। मैंने उसकी उन्गली अपने मुँह में ले ली और पूरी भिगो दी और उसे कहा- भोला, यह उन्गली मेरी गान्ड में डालो !उसने पूरी उन्गली मेरी गान्ड में डाल दी। मेरे मुँह से आवाज निकली- आ…आ…आ…वो बोला- मैं झड़ने वाला हूँ !मैंने कहा- मैं भी…. सोनिया भाभी सेक्सी वीडियोबस मज़ा आ जाए !क्या चुसवाती भी हो ?अब तो यही करना पड़ता है वो साला तो २ मिनिट में ही टीं हो जाता है।कमर कितनी होगी ?कमर है ३२ इंच !और स्तन ?वो तो बड़े मस्त हैं ३६ साइज़ के गोल मटोल बिलकुल ठां लगती हूँ !ठां बोले तो ?ओह ….

ओ के पद पर हूँ। वैसे तो हमारा फार्महाउस गाँव में है और वहाँ पापा जी खेती-बाड़ी के काम की देखभाल करते हैं, मैं भी आता जाता रहता हूँ, क्योंकि अमृतसर शहर में हमारी बहुत बड़ी कोठी है, मेरा बड़ा भाई यू. अब मेरे लिप्स तुम्हारी जाँघो पर हैं… बहुत सुंदर हो तुम मेरी जान… मुझे आज इस पूरी सुंदरता को भोगने दो. अब सुनीता का रंग बदला-बदला सा लग रहा था। मैं चुप रहा और उन्हें देखता रहा!चाय पीने के बाद सुनीता ने ब्लू फिल्म लगा दी और आकर बिस्तर पर बैठ गई, करीब 15-20 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के बदन को रह-रह कर नोचते रहे।मैंने हाथों से उनकी चूचियाँ जोर से दबाई तो उनकी आवाज निकली- आआह्ह्ह धीईरे!यह सुन कर मैं समझ गया कि सुनीता चुदवाना तो बहुत चाहती है… लेकिन बड़े आराम से! किसी भी प्रकार की कोई जल्दबाजी नहीं.

रागिनी के कुछ समझने के पहले मैंने उसकी पतली कमर को पूरी ताकत से जकड़ कर एक धक्का लगा दिया. ई…इस तरह चीखते हुए उसने अपने चूतड तीन-चार बार जोर से हवा में उछाले और शान्त पड़ गई.

एक दिन मीनाक्षी किसी काम से बाहर गई तो मैंने भाभी की बीस दिन की सेक्स की भूख शांत की…बड़ा मजा आया बीस दिन बाद भाभी को चोदने में.

तुम निरे लोल हो कुछ समझते ही नहीं।प्लीज बताओ ना ?देखो ज्यादा गांड मरवाने से उसका रंग काला पड़ जाता है. एक बार तो मैंने वासना में आकर उसे खींच कर बाहों में भर लिया… नतीजा… गालियाँ और चिड़चिड़ापन. मैंने जल्दी से निकर और टीशर्ट पहनी और दरवाजे पर आकर कहा- कौन है?बाहर से आवाज़ आई- बेबी, मैं मुकेश! आपका टिफिन ऑटो में रह गया था, वो देने आया हूँ.

सेक्सी नंगा बोलने वाला फिर अचानक मेरा हाथ उसके उरोजों पर चला गया, मैं उनको दबाने लगा, वो सिसकारियाँ लेने लगी. इससे भाभी भी जोश में आ गई और उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने चूचों पर रख दिया और हम दूसरे को पकड़ कर चूमते रहे.

बाकी चार लोग पीछे ही रुके थे जो भागने वालों पर नज़र रखने के लिए थे।दरवाजे के करीब पहुँचते ही एक सिपाही ने जोर से पैर से धक्का मारकर दरवाजा खोल दिया और अंदर जाते ही सोनिया बोली- कोई चालाकी नहीं… जो जहाँ है वो वहीं खड़ा रहेगा… तुम को पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया है !गुंडों ने उनकी एक नहीं सुनी और अपने हथियार निकालकर फायर शुरू कर दिया…. वो पूरी तरह मेरे ऊपर लेट कर मुझे चोद रहा था…उसकी छाती मेरे दोनों स्तनों को दबा रही थी और वहाँ पे बॉस-रस होने की वजह से चिपक भी रही थी…वहाँ से अभी फच फच फच की आवाज आ रही थी…. फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मजा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा.

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आप ठीक तो है न… मेम?तेल लगा दूँ…?वो पूरी रात मैं मेम की फटी हुई बुर पर तेल मालिश करता रहा…मेम, एक बात कहूँ…हाँ राजू बोलो!कहकर अपनी टांगें जोड़ ली और मुझे बिस्तर में बैठा लिया…छोटी मेम आइ लव यू…[emailprotected]. मैंने माँ को घर भेज दिया और उनसे कहा कि अस्पताल में रुकने के लिए जरूरी चीजें शाम को लेते आयें. पूरा लन्ड मेरी चूत में ……अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था, मैं लन्ड अपनी चूत से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से चोदने लगा। मेरे मुँह से बस आ.

’और उसने एक हाथ से अपनी चूची पकड़ी और मेरे मुँह में डालने लगी… उसके पैर उसी तरह हिल रहे थे. हम दोनों जोर जोर से आहें भर रहे थे- आआ ह्ह्ह ऊ म्मम्म आआ ह्ह्हह्ह सीईईईईए आआह्ह्ह और ऐसे ही हम दोनों अपने लंड और चूत को एक दूसरे से रगड़ते रहे। लगभग 5 मिनट के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और मैं भी अपनी चरम सीमा को पहुँचने वाला था, हम दोनों झड़ गए, अपनी अपनी चड्डियों में.

मैं उसकी ये आवाज़ें सुनकर और भी जोश में आ गया और जोर जोर से उसकी चूत को खाने लगा, उसके दाने को अपने दांतों के बीच लेकर दबा देता बीच बीच में.

इस बारे में और अपने बारे में ज्यादा बात ना करते हुए मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ. बताओ ना ?इस आसन में औरत बेड के एक किनारे पर अपने पंजे थोड़े से बाहर निकल कर घुटनों के बल बैठ जाती है, अगर औरत थोडी मोटी है और ज्यादा चुद्दक्कड़ है या उसकी चूत कुछ बड़ी या ढीली है तो गोद में एक तकिया रखकर घुटनों में सर लग कर अपने नितम्ब कुछ ऊँचे कर लेती है. मैं सेंटर टेबल पर इस तरह झुकी थी कि वो मेरी चुंचियां अच्छी तरह देख सके… ऐसा ही हुआ… उसकी नजरें मेरी चुन्चियों पर गड़ गयी.

मामी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है?”नहीं नयन, ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते! तो इसको क्या चाटेंगे!”मामी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊँगा भी!”मामी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो!”मामी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया. !!!”हम दोनों ही यौवन की काम क्रीड़ाओं में सारे संसार को भूल चुके थे…मैं धीरे धीरे उसका लण्ड सहलाने लगी… और अब वो जोर जोर से मेरी अमरुद जैसी चूचियों को अपने हथेलियों के भीतर कुचल रहा था… साथ ही साथ उसके होंठ मेरी सीत्कारों को बंद करने के लिए मेरे होंठो को बार बार चूमते, उसकी जुबान मेरी जुबान से टकराती और फिर दौर शुरू हो जाता एक लम्बे चुम्बन का…. बहादुर ने हाथ ओर ऊपर सरका दिया- अब?मस्ती में रीटा स्कर्ट उलटती बोली- नहीं, जरा सा और ऊपर करिये तो बताती हूँ!बहादुर एक हाथ से अपना लौड़ा रगड़ने लगा और दूसरे हाथ से हाथ रीटा की मक्खन सी गुदगुदी गाण्ड को मसलने लगा- अब कुछ आराम आया?बेहया रीटा टांगों को चौड़ाती बुदबुदाती सी बोली- नहीं, जरा बीच में करिये तो बताती हूँ.

फिर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा और जीभ से चोदने लगा।थोड़ी देर बाद उसने बोला- जान, मेरे नीचे कुछ निकल रहा है ! मैं उसका पूरा पानी चाट गया, कितना स्वादिष्ट पानी था.

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आज जब एक बार फिर से मैं अन्तर्वासना की साईट पर गया तो फ़ैसला किया कि एक बार तो अपना अनुभव मैं भी लिखूँ.

मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. कभी कभी पीछे से करता है ना ?’‘ओह ‘ मेरी भी हंसी निकल गई। ‘तू तो एक नंबर की छिनाल है री ? तू मना नहीं करती क्या ?’‘अपने मरद को मना कैसे किया जा सकता है ? मरद की ख़ुशी के लिए वो जब और जैसे चाहे करवाना ही पड़ता है। क्या आप नहीं करवाती ?’‘धत्. अच्छी हैतुम्हे एक और सेक्सी मेल चाहिए था न ओकेमैंने तुम्हे फ़िर उसी कमरे में बुलाया.