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मैंने सोचा इतना पैसा वाला आदमी दीदी के घर में क्या कर रहा है !मुझे देखते ही दीदी बोली- नमस्कार भाई साहब, आप अचानक? कैसे आना हुआ? ओह, किराया लेने आए होंगे महीने पर.हिंदी बीएफ भेजिए तो: मैं अब से तुम्हारी दीवानी हूँ।रोहन- अरे रिया मेरी जान… तू अब ऐसे ही मेरे पास आया कर, मैं तुझे इससे भी ज्यादा मजा दूँगा।मैं- सच में आज मेरी जिन्दगी का सबसे अच्छा दिन है.

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मैं घोड़ी बनी हुई थी, तेजी से आगे पीछे होने के कारण मेरी चूचियाँ लटक कर हिल रही थी, मैं बड़ी जोर से चुदवा रही थी. मैंने दीदी की टांगों को अपने कंधों पर रख कर अपना लण्ड चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा लण्ड चूत में डाल दिया. इतना कहते ही सोनिया ने सबके सामने मेरे गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा, मेरे तो शर्म से बस आँसू ही निकल गए, आज तक मुझे स्कूल में भी कभी किसी टीचर तक ने भी थप्पड़ नहीं मारा था और आज!तभी मुझे याद आया कि मुझे अपना दूसरा गाल भी आगे करना है, एकदम से सोनिया बोली- साली कुतिया! कुछ भूल रही है तू!और उसने मेरे दूसरे गाल पर भी थप्पड़ मार दिया.

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मेरी नज़र छत पर गई तो देखा दोनों ऊपर खड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी, मुझे इशारा किया कि दीवार फांद कर आ जाओ।मैंने वैसे ही किया.

मैं नहीं करूँगा मुझे घिन आती है, उल्टी हो जाएगी!मेरी मुक्ता की इस वासना से मुझे बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं खुद को उसके सामने अनाड़ी समझ रहा था। उसमें बहुत आग थी उसकी इस आग को मैं अगले भाग में लिखूँगा तब तक आपसे अनुरोध करता हूँ कि यदि आप अपने कमेन्ट देना चाहते हों तो मेरी ईमेल आईडी पर मुझे ईमेल कीजिए।[emailprotected]कहानी का अगला भाग:मस्त मुक्ता और उसकी वासना-2. !’मैं अब क़मर हिला के आगे पीछे कर रहा था…भाभी की चूत ने इतना पानी छोड़ दिया कि अब लंड आराम से जा रहा था और मैंने भी अब सनसना कर धक्का मारा और पूरा लण्ड अंदर!मर गई ईई…! सच में मर्द हो… आज मुझे लगा कि असली मर्द क्या होता है… लव यू आदी… चोदो मुझे ज़ोर से चोदओ! फाड़ दो मेरी!मैं धक्के लगाते हुए और उनके निप्प्ल काटते हुये)- क्या फाड़ दूँ भाभी?भाभी- जो फोड़ रहे हो…मैं- उनका नाम बोलो. खाना और ड्रिंक सब कुछ मिल जाता है…और कपल्स भी आते थे… इसलिए कोई डर नहीं है…मैंने पहले भी सलोनी के साथ कई बार ड्रिंक किया था.

सच में दोस्तो, बनाने वाले ने भी पता नहीं क्या सोच कर बनाया होगा! जैसे पानी को जिस बर्तन में भी डालो वो वैसा ही आकार ले लेता है, वैसे ही औरत के बदन को भी कोई भी कपड़ा पहनाओ, वो कयामत ही लगती है. मैंने शीशे में देखते-देखते ही रफ्तार बढ़ाना शुरू किया।तेज गति के साथ उसके बड़े-बड़े मम्मे भी आगे-पीछे हिलते जा रहे थे और मेरी चुदाई की गति के साथ ‘थप. तू अभी अपने अंकल के लौड़े का रस पिला कर लाई है। अब मेरा रस भी सटक कर देख !’यह कह कर उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे लंड की तरफ नीचे झुकाने लगा और मेरी चूची को बेरहमी से दबाते हुए बोला- चूस कुतिया.

!मैं भी हँस कर रह गया।उसने पूछा- भाभी जी कहाँ हैं?मैंने कहा- रसोई में है।मैं उसके लिए पानी लाने रसोई में गया और सोनू को बोला- चाय बना देना. मैं- अरे छोड़ो यार ये तो अब… मैंने कहा था ना… चलो गाड़ी में ही बदल लेना…सलोनी- अरे गाड़ी में कैसे… क्या हो गया है आपको जानू?? सब देखेंगे नहीं क्या.

चूत में जाकर गुम ही होता है और चूत दिखने में छोटी लगती है, मगर साली बड़े से बड़े लौड़े को निगल जाती है। अब देख मैं कैसे तेरी सवारी करता हूँ. आपका स्वागत है।तभी सुनील बोले- आप लोग एन्जॉय करो मैं और आकाश चलते हैं।उन लोगों के जाने के बाद दरवाजा अन्दर से बंद करके मैं राज के पास आ गई।राज जी बोले- नेहा तुम्हारी चर्चा जब से सुनी है. तुम चाहो तो इन्हें छू सकते हो।रौनक- न न नहीं…रौनक शरमा रहा था तो मैंने उसका हाथ उठा कर अपनी जांघों पर रख लिया…रौनक मेरी जांघों को सहलाने लगा।मैं- कैसा लगा रौनक… मैं तुम्हें पसंद नहीं??रौनक- तुम… तुम्हें कौन नहीं पसंद करेगा… तुम इतनी सुन्दर जो हो…मैं- सच में… मैं तुम्हें सुन्दर लगती हूँ…?मैंने अपना टीशर्ट ऊपर किया और रौनक को अपने मम्मे चूसने को कहा.

जूही तुम तो बिना कपड़ों के मस्त लग रही हो… उस समय तो खून की वजह से मैंने ध्यान नहीं दिया और ये शरमा क्यों रही हो, मुझे भी तो दिखाओ अपनी जवानी।जूही- भाई प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।आरोही- ओये.

!मैंने अपना चोदन थोड़ा रोका और भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसा। भाभी कुछ ही क्षणों में अपना दर्द भूल कर अपने चूतड़ उठाने लगीं।‘आ…आहह. इसी तरह सारा दिन बीत गया, मैं उन सभी लोगों के सामने सारा दिन सरेआम नंगी होकर अपनी जवानी करते हुए खुद को ज़लील करती रही. हँसते हुए नीचे चला गया। शायद समझ भी गया हो। पर मुझे क्या अब प्यार किया तो डरना क्या।उसके बाद मैं हर वक़्त उसे देखने के चक्कर में लगा रहता… दो दिन बाद मुझे वो मौका मिल ही गया जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था.

उसने भी दे दिया।फिर मैंने अपने कमरे में आकर उसे फ़ोन किया और उससे बातें कीं और बातों के दौरान ही उससे बोल दिया- रात में 12 बजे दरवाजा खोलना. !तो मैंने कहा- जान आज से यह जिस्म आपका हो चुका है, अब मैं उसे छूने भी नहीं दूँगी… मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी बन कर रहना चाहती हूँ.

हमारी बिल्डिंग के सामने एक छोटा बंगला था, जिसमें एक बैंक मैंनेजर रहते थे जिनका नाम हेमंत था जो अपनी पत्नी रजनी और बेटे सोनू के साथ रहते थे. पर उस दिन के बाद रमेश बहुत उदास रहने लगा, उसे बहुत अफसोस हुआ कि सब बर्बादी का कारण उसकी शराब और बुरी आदत है. !’यह कह कर मार्क मेरे ऊपर आ गया। उसका सिर मेरी योनि की तरफ था। मैंने अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं और उसने मेरी योनि को अपने मुँह में भर लिया और अपनी जीभ से मेरी योनि, यहाँ तक की मेरी गुदा भी चाटने लगा।मैंने भी उसका ढीला लिंग अपने हाथ में पकड़ा, उसकी चमड़ी पीछे की और उसका सुपारा बाहर निकाल कर लिंग मुँह में ले लिया।अब हम दोनों फिर एक शानदार चुदाई के दौर के लिए तैयार थे।[emailprotected].

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इस दर्द में भी मजा है।मैंने भी पूरे जोश में आकर उसकी चुदाई चालू कर दी।तभी उसने कहा- जानू बहुत मजा आ रहा है और जोर-जोर से चोदो.

यहाँ सबसे अजीब बात यह थी कि चेतन उसका पति ही मुझे उससे बात करा देता था और प्रफुल्ला भी अपने पति की मौजूदगी में मुझसे कामुक और अश्लील बातें कर लिया करती थी या यों कहें कि वो दोनों एक साथ फोन पर होते थे मेरे साथ! और वो मुझ से ऐसे बातें करता था- अरुण यार, बताओ, हम बिस्तर पर हैं और मैंने इसके कपड़े उतार दिए हैं, अरुण तुम बताओ कि मैं क्या करूँ आगे. !’ की आवाजें आने लगीं। अब मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग की सैर कर रहा हूँ।अब वह जोर-जोर से मेरे लंड को चूसने लगी और मैं ‘आआह्ह्ह्ह’ करता रहा, मैं अब अपनी वृंदा के मुँह को चोदने लगा, मेरा लंड उसके गले तक जाने लगा।करीब दस मिनट के बाद मैंने उससे कहा- डार्लिंग मैं झड़ने वाला हूँ।तो उसने कहा- मेरे मुँह में ही झड़ जाओ. ” मैंने भी प्रेम भरे शब्दों में प्रिया को जवाब दिया।हाँ…अब ये बस मेरा है… उम्म्मम्म…कैसे चोदे जा रहा है मुझे… उफ्फ्फफ्फ.

के दूसरे वर्ष में था। मेरे पड़ोस मे एक लड़की रहती थी और वो 12वीं में थी। उम्र 19 के आस-पास थी, पर लगती कॉलेज की लड़कियों जैसी मस्त गोल-मटोल, अपनी माँ की तरह उस के बड़े-बड़े मम्मे, मस्त गोल-गोल कूल्हे, ऊँचाई साढ़े 5 फुट की रही होगी, पर देखते ही लण्ड खड़ा हो जाए. वो एकदम से तड़प उठी और उसकी चूत से खून आया थोड़ा और वो अपना सर इधर उधर पटकने लगी और थोड़े घूंसे मारने लगी मुझे हटाने को. ગુજરાતી સેક્સી પિક્ચરजब भी कोई उचित समय रहेगा तो मैं बता दूँगी क्योंकि नेहा ही एक ऐसी सहेली थी, जिससे वो अपने दिल की सभी बातें साझा करती थी।कहानी जारी रहेगी।आपके ईमेल का इन्तजार रहेगा।[emailprotected].

दोस्तो, इस तरह चुदाई करते समय लंड पूरी तरह से तो चूत के अन्दर नहीं घुसता, वो सिर्फ़ आधा या आधे से ज्यादा ही घुस पाता है. पर मैं कुछ समझ नहीं पाया।प्रोग्राम करीब 11 बजे खत्म होने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया।मैंने अपने कपड़े खोले.

वो कुछ नहीं बस कपड़े समेट रही थी… क्या हुआ?’‘वो भाभी जी आपको खाना खाने शाम को हमारे घर पर आना है और भाभी जी आपके ससुर जी कहाँ हैं?’‘वो ऊपर हैं, कुछ काम कर रहे हैं।’‘अच्छा आप जाओ. ’ मैं जोर से चिल्लाई।एक ही झटके में उसने अपना पूरा लन्ड मेरी गाण्ड के अन्दर डाल दिया।मैं रोने लगी,’छोड़ दो मुझे. कैसा सुख लूटोगी तुम…’थोड़ी देर और कोशिश की मैंने, पर कच्ची कली की फुलवारी में घुसना आसान ना था।मैं जैसे ही धक्का लगाता, वो ऊपर को सरक जाती थी।वैसे तो वो भी चुदने के लिए बेताब थी, पर पहल तो उसके पुरुष को ही करनी थी।उसने कातरभाव से मुझे देखा, जैसे कह रही हो.

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अब तो बक।रश्मि मुस्कुराई फिर धीरे से बोली- आज मैं सुबह नहा रही थी, उस समय रवि की याद कर रही थी।नेहा- ये बात.

?बोला- आज दूसरी तारीख है, सोचा पैसों का हिसाब-किताब करके जाऊँ !कल सुबह कर लेते !”वह बात नहीं है सनी यार !” कहते उसने मुझे बाँहों में जकड़ लिया, मेरे चूतड़ों पर, मेरी गांड में, जाँघों पर हाथ फेरने लगा।अबे छोड़ दे कमीने. ।फिर लक्ष्मी मेरे ऊपर आ गई और लण्ड पर बैठकर झटके मारने लगी।थोड़ी देर बाद ऊई मैं गई ! कहकर मेरे ऊपर लुढ़क गई और छाती पर चूमने लगी। उसकी चूत का पानी मेरे लण्ड पर आ रहा था।मैं लक्ष्मी की गाँड पर हाथ फेरने लगा, वो मुस्कराने लगी और बोली- आज फिर गाँड मारोगे जानू?[emailprotected].

बड़े शरारती हैं आप !” प्रिया ने ये कह कर मेरे गालों पे दांत गड़ा दिए।जवाब में मैंने अपना एक हाथ पीछे लेजाकर उसकी एक चूची को दबा दिया।आउच…. !और अपने आँसू पोंछने लगी।‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।मैंने कहा- हाँ. जाओ, मुझे भी काम है, यह घर पर ही रहेगा!मैं चली गई, उसकी नज़र अब तक मेरी कमीनी सोच में बसी थी। मेरा मन स्कूल में लग नहीं रहा था। उसका चेहरा, उसका बलशाली शरीर.

तीसरा चुम्बन (मिक्की/सिमरन) से लेकर तीसरी कसम (दूसरी सिमरन) तक का प्रेम गुरु की कहानियों का यह दौर यहीं ख़त्म होता है। अगर अगला जन्म हुआ तो हम फिर मिलेंगे… और फिर दुनिया की कोई ताकत मेरी सिमरन को मुझ से जुदा नहीं कर सकेगी …. समय दस बजे का पक्का हुआ था और ठीक दस बजने में पाँच मिनट पर पीली शर्ट और काली पैंट पहने एक छ: फुट का हट्टे-कट्टे बदन वाला नौजवान लड़का रेस्टोरेंट में दाखिल हुआ. उन्हें थोड़े काम से जाना था अपनी सहेली के यहाँ !अब मैं थोड़ा जोश में आ गया और मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर चूम लिया.

हिंदी बीएफ भेजिए तो अब ऊपर से बॉस ने दीदी की गाण्ड पर थूक लगाकर लंड गाण्ड पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा, जिससे आधे से ज़्यादा लंड दीदी की चूत में पहुँच गया. पर उसने एक बहुत बड़ी गलती की थी कि पिछली फ़ाइलों को ना देख पाने का विकल्प नहीं चुना जिसके कारण उसका राज़ खुल गया और मुझे रेलगाड़ी ढूँढने में सफ़लता हासिल हुई.

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प्लीज किसी को मत कहना।मैं- मैं किसी से नहीं कहूँगा लेकिन क्या मैं फिर से तुम्हें उसी तरह देख सकता हूँ?सिम्मी- एक शर्त पर. !इस पर उन लोगों ने शुक्रवार के दिन की कहा और सुबह ही आने को बोला और अपन घर का पता दिया।मैं बोला- ठीक है आ जाऊँगा. ये करेगी मेरा मुकाबला? आप शॉट रेडी करो मैं तैयार हूँ।आरोही की बात सुनकर सब के चेहरे पर एक स्माइल सी आ गई क्योंकि वो सब यही चाह रहे थे।अन्ना- ओके बेबी गुड वेरी गुड जाओ वहाँ लेट जाओ।आरोही उसी पोज़ में वहाँ लेट जाती है और सचिन उसके शरीर से खेलने लग जाता है। उसके मम्मे दबाने लगता है, आरोही भी उसकी पीठ पर हाथ घुमा रही थी।सचिन- आ.

बेरहम बेहया रीटा ने अपनी गाण्ड और भी पीछे को उचका दी तो चिकने चूतड़ों के बीच से भिंची भिंची चूत भी नुमाया हो आई. आखिर छबीली रीटा की रसीली चूत ने छोटे छोटे पाँच छः झझाकों के साथ मूतना बंद कर, टप टप हीरे सी जगमगाती बूंदे टपकाने लगी. सेक्सी बफ बफमैंने भी उनकी हाँ में हाँ मिला दी, जिससे कि हम पर रूचि को शक न हो।हम ठंडा पी ही रहे थे तभी विनोद भी केक और होटल से खाने के लिए खाना वगैरह सब लेकर आ गया था।फिर उसने बताया- ट्रैफिक की वजह से जरा देर हो गई।मैंने बोला- चलता है यार.

अब हम दोनों ने अपनी स्थिति बदली और मैंने दीदी की चूत से लंड निकाला तो दीदी की चूत से फव्वारा सा निकला.

उसने तो अपनी बाहें मेरे गले में डाली हुई थी, अपने चूतड़ों को अपनी पूरी ताकत से उठा उठा कर लंड पर बरसा रही थी, और अपने मुँह से मस्त मस्त आवाज निकाल रही थी. मैं उसके मुँह में लण्ड अन्दर बाहर करने लगा पर उसकी साँस फूलने लगी, उसने मुँह से लण्ड बाहर निकाल दिया और हांफने लगी.

मैंने कहा- चल कोई बात नहीं !और मैंने अम्बिका को चूम लिया और उसे बोला- अब किसी और सहेली को मत ले आना बस. वी देख रही थी।फिर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और सहलाने लगा। उसकी तरफ देखा तो वो लगातार मुस्कराते हुए टी. मैं- तो मैडम, फिर यह अधूरा काम कब पूरा होगा?पूजा- इतनी भी क्या जल्दी है, अभी तो हम मिले हैं, सही वक्त आने पर इस अधूरे काम को पूरा करेंगे, अभी तुम जाओ, नहीं तो फिर से कोई आ जायेगा.

तब पापाजी ने अपनी दो ऊँगलियों मेरी चूत में डाल कर बाहर निकालीं और उसमें लगे चूतशेक को चाटने लगे, फिर बोले- हाँ, तुम ठीक कह रही हो, यह तो मलाई ही है, मेरी और तुम्हारी.

आ जाओ।फ़िर राज मुझसे बात करने लगे।आपसे उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी कहानी अच्छी लग रही होगी। यह मेरे जीवन की सच्ची कहानी है और अभी भी मेरे जीवन की धारा बह रही है, मैं आपसे बार-बार मुखातिब होती रहूँगी।आपके प्यार से भरे ईमेल के इन्तजार में मैं आपकी नेहा रानी।. बना लो मुझे अपनी!रीना सीधी लेट गई, बाबा की आँखों में चमक आ गई थी, वो उस पर टूट पड़े और उसके मम्मे दबाने लगे, निप्पल चूसने लगे।रीना- आ. मालिश करनी है !रीना- बाबा, यह पोजीशन सबसे अच्छी है, ऐसे ही कर दो !बाबा इसके आगे कुछ ना बोला और उसकी पीठ पर तेल डाल कर मालिश करने लगा। रीना सिसकारियाँ लेने लगी।रीना- आ उ उफ़फ्फ़ आह !बाबा- बेटी तेरे दिमाग़ के लिए तू यहाँ आई है.

ℎ𝑖𝑛𝑑𝑖 𝑥𝑥𝑥कितने बड़े हैं?’‘कैसे बताऊँ?’‘अपने मुँह से ही बता दो?’ मैं अपनी हंसी नहीं रोक पाया।‘मैं 28 नंबर की ब्रा पहनती हूँ पर वो भी ढीली रहती है।’‘ओह… ऐसे नहीं !’‘तो कैसे समझाऊं?’‘संतरे जितने हैं?’‘नहीं !’‘आम जितने?’‘नहीं !’‘तो क्या नीबू जितने हैं?’‘नहीं उससे तो थोड़े बड़े ही लगते हैं. मगर मैं पीने के बाद घर वापस नहीं जा पाऊँगा क्योंकि मैं घर वालों के सामने कभी ड्रिंक नहीं करता हूँ, सो मैं किसी दोस्त को कहता हूँ कि आज रात को उसके पास सोऊँगा।तो वो बोली- किसी दोस्त को क्यों परेशान करते हो.

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वैसे सब को नहीं देता मेरा सैंया, बड़ी संभाल कर रखता है चचाजी !चचा ने मुँह में उंगली ले कर गीली की और मेरी गांड में उंगली करने लगे, मैंने गांड सिकोड़ ली। वाह. प्रेषिका : सानिया सुलतानसम्पादक : इमरानमेरा नाम सानिया सुलतान है, मैं दिखने में बेहद खूबसूरत और सैक्सी हूँ, मेरा रंग गोरा, बदन भरा हुआ, बाल सुनहरे घने लंबे और आँखें भूरी हैं। मैं अपने रंग-रूप का बेहद ख्याल रखती हूँ और हमेशा सज-संवर कर टिपटॉप रहना पसंद है मुझे। मैंने होम-साइंस में एम. !और अपने आँसू पोंछने लगी।‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।मैंने कहा- हाँ.

इस काम को करते हुए हमें 15 मिनट हो गए थे और वो एक बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने मुँह से लंड निकाला और उसका दूध दबाने लगा।वो बोली- भैया, अब चोद भी दो ना. फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरु किया, वो मेरे लंड को गपागप चूस रही थी और मेरे मुँह से कामुक आवाज़ें निकल रही थीं… आअह्ह्ह ओह्ह्हा आह्ह और चूस मेरी जान मेरे लंड को पूरा मुँह में ले. यार साहिल आराम से डाल ना देख कैसे आँखों में आँसू आ गए बेचारी के…!नीचे से सचिन धका-धक चोदने में बिज़ी था।सचिन- उह उह आ.

मज़ा आ रहा है… और ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूची को चूसो…मैंने उसके निप्पल तो हल्के से काटा तो रूबी मादक आवाज़ में बोली- ऊहह जानू… तुमने ये क्या कर दिया. तमन्ना ने टांगों को चौड़ा कर रखा था और अलका सलवार के ऊपर से ही तमन्ना की चूत को अपने मुँह में चुमहला रही थी. उंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रीटा ने अपनी कसी चूत की मखमली फांकों से भींच कर टाँगों को बंद करके राजू के हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया.

वो एक नई दुल्हन की तरह बैड पर बैठ गई, उसने अन्दर काला ब्लाऊज और काला पेटीकोट पहना हुआ था जिसमें उसका गोरा बदन कोयले की खान में हीरे की तरह चमक रहा था. चुदाई कला में निपुण़, वहशी मोनिका ने जंगली बिल्ली को काबू करने के लिये जवाबी हमले में रीटा की गांड में अपनी थूक से सनी उंगली घुसेड़ कर गोल-गोल घुमाने लगी और चूत के दाने को होठों तले दबा कर जीभ से उस पर चुम्मा करने लगी तो रीटा का बैंड ही बज गया.

मुझसे नहीं होगा।मैं- डार्लिंग ऐसे ना करो, एक बार कोशिश तो करो, क्यूँ हनीमून खराब कर रही हो।मेघा- हनीमून… क्या मतलब?मैं- हाँ.

हह !बाबा ने आव देखा ना ताव, रीना के पैरों को फैला दिया और अपना भारी लौड़ा उसकी बुर पर टिका दिया और जोरदार झटका मारा… सुपारा ही बड़ी मुश्किल से फिट हो पाया !रीना- आआआ अयाया मर गई रे…ईई !बाबा- साली अभी तो सिर्फ टोपा ही गया है. एक्स वीडियो एक्स एक्सलड़के से हो गई और वो उसके साथ विदेश चली गई। आज भी वो मुझे बहुत याद आती है।कहानी कैसी लगी जरूर बताना…आपका अपना राज. सेकस मराठीभाभी जोर-जोर से हंसने लगी- समीर, दिन में तो मैंने अपनी लिप्सटिक से तुम्हारा मुँह लाल किया था लेकिन पूजा ने तो अपने काम रस से तुम्हारा मुँह एक दम से सफेद बना दिया है, शाबाश पूजा…मैं बाथरुम में गया और अपना मुँह अच्छी तरह साबुन से धोया, कुल्ला किया और वापस कमरे में गया. ‘ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जो जी में आये कर लो!’ राजू ने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेना ठीक समझा.

वासना का तूफान खत्म होने पर राजू के नीचे दबी रीट हाँफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली- आहऽऽऽ भईया, आप तो बड़े ही कसाई निकले! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ!’राजू रीटा की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला- बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी.

!मैंने कहा- बात ही ऐसी है।उसने कहा- क्या बात है।मैंने उसे झट से ‘आई लव यू’ बोल दिया। उसने कहा- शर्म नहीं आती, इतनी रात को पूछते हो।मैंने कहा- मुझे जवाब चाहिए और मैं इंतजार करता हूँ।फिर मैंने उसे उसके घर छोड़ दिया और अगले दिन उसका फ़ोन आया।उसने कहा- मेरे घर आ जाओ।मैं उसके घर चला गया।उससे कहा- कहाँ है, तुम्हारे माँ और पिताजी। उसने कहा- क्या करना है उनसे मिल कर. मुझे रोज चोदे बिना उनको सुकून कहाँ था और क्या पता आज वो भी मेरे मुँह से ही खुश हो जाएँ।पापा- अरे क्या बात है. हे भगवान यह मैं क्या देख रहा हूँ? एक ससुर अपने ही बेटे की पत्नी यानी भाभी जी को चोद रहा है और भाभी जी भी मज़े लेकर उनके लंड पर उछल रही हैं… वाहह क्या सीन है.

राजू भी अब रीटा की गाण्ड से पूरा का पूरा लण्ड खींच कर धक्के पर धक्के मारने लगा तो रीटा मजे के मारे चिल्ला उठी. मुझे शर्म आती है !-1भाई बहन की चुदाई की इस कहानी के पिछले भाग में अभी तक आपने पढ़ा कि बहन ने अपने भाई को मुठ मारते देखा. !उन्होंने उठ कर मेरे बाल भी खोल दिए। मैंने आज शिफौन की नेट वाली गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी, जो एकदम मेरे शरीर से चिपकी हुई थी।ससुर जी- तू बिना घूँघट और खुले बालों के अच्छी लग रही है बहू.

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मैंने उससे पूछा तो उसने कहा- जिंदगी के इन खूबसूरत पलों को अपनी डायरी में छुपाने की कोशिश कर रही हूँ ताकि जब तुम चले जाओ तो मैं इन्हें पढ़-पढ़ कर अपना सारा वक्त इन बीते दिनों में ही बिता सकूँ क्योंकि अब तुम्हारे बिना एक पल भी जीना मुश्किल है अर्पित… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. तक… अरे जीजू आप… वाओ…और बिना किसी औपचारिकता के दरवाज़ा खोल मेरे निकट बैठ गई, मैंने गेट लॉक पहले ही खोल दिया था।गुड्डू ने नीली जीन्स और सफ़ेद टॉप पहना था… दोनों ही कपड़े बहुत कसे थे, उसके चिकने बदन से चिपके थे।मैं- हेलो गुड्डू… यहाँ कैसे. मैंने कोई ‘मिस-कॉल’ नहीं की… आप कौन हैं और आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?’ वो हैरान होकर बोली।मैं- स्वीटी अभी भी नहीं पहचाना.

औरत बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं होती!उसे मेरी बात का शायद बुरा लगा और कहा- देखिए आप गलत समझ रही हैं.

!लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और उसकी गांड को कसके चोदा और अपना सारा पानी उसकी गांड में ही डाल दिया। फिर कुछ देर तक हम दोनों लेटे रहे और सो गए।जब हम दोनों उठे तो उस से चला नहीं जा रहा था, तो मैंने उसे एक दर्द-निवारक दवा दी।उसने दवा खाई और कहने लगी- सर.

आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई।” मैंने उसके कान में लेटे लेटे हल्के से कहा।हाँ, तुम्हे तो मज़ा आएगा ही ! मैं तो मरने ही वाला था। अब तुमसे कभी नहीं मिलूँगा।” उसने मुझे ताना मारते हुए कहा।वैसे वरुण और मैं अभी भी मिलते हैं, मेरे लंड को शुरुआत में अन्दर लेने के बाद उसे बहुत दर्द होता था, लेकिन अब उसकी गांड लचीली हो गई है और वो मज़े ले लेकर मेरे लंड से अपने गांड मरवाता है।. मेरी चाची का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं! मेरी और चाची की बहुत जमती थी और चाचा एक बिजनेसमैन हैं, चाचा मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे. देसी सेक्सी ऑंटीफिर हम लोग केक काटेंगे।तो विनोद ने ठंडा पीते हुए मुझसे पूछा- तुझे आए हुए कितनी देर गई?मैंने बोल दिया- शायद एक घंटा.

आप यह भी कह सकते हैं मुझे अन्तर्वासना की लत लगी हुई है और मैंने अन्तर्वासना की 2008 से लेकर आज तक प्रकाशित होने वाली अधिकतर कहानियाँ पढ़ी हुई हैं. मैं सोने के लिये लेट गया और मेरी आँख लग गई। दस मिनट बाद जब मेरी नींद खुली तो मेरे बाजू में कोई चादर ओढ़ कर सोया था, मैंने सोचा कि कोई मेहमान होगा। कुछ देर बाद वो मेरे से सट गया और उसकी चादर मेरे शरीर पर आ गई, तो मैंने भी थोड़ी ठंड होने के कारण चादर में आना सही समझा. !मैं कांप गई और मैं सहम कर उसकी तरफ़ मुँह करके उससे चिपक गई।मैंने उसे कस लिया, उसका शरीर मुझे गजब की गर्माहट दे रही थी। मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी योनि में अब मैं हल्की नमी महसूस कर रही थी।अमर ने मुझसे कहा- सारिका.

जैसे ही उसमें से पानी निकला, उसने अपने होंठ वहाँ रख दिए…उसने एक सेक्स की देवी की तरह ही मुझे मजा दिया, मेरे लण्ड को चाट चाट कर पूरा साफ कर दिया।मैं- मधु तूने पहले भी सेक्स किया है न?मधु- क्या भैया?मैं- हा हा. यूँ तो मैंने कई बार हस्तमैथुन किया था लेकिन उसके हाथों का स्पर्श पाते ही मुझे लगा कि कहीं मेरा वीर्यपात न हो जाए.

अब जीजू सीधा लेट गए और मेरी बहन ने जीजा जी के लंड को पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी गाण्ड को लंड पर ला रही थी.

पर सिर्फ निराशा हाथ लगती रही, होटल में रिस्क लेना नहीं चाहते थे, और किसी दोस्त की मदद लेकर बदनाम होना नहीं चाहते थे।एक दिन अम्बिका पार्क में मुझसे मिलने आई तो उसने मुझे बताया- यश, एक मौका है हमारे मिलने का पर थोड़ा रिस्की है। पर ऐसा भी नहीं कि हम मिल ना सकें।मैंने उसे कहा- बोल यार, इस तड़फने से अच्छा हैं कि कुछ रिस्क उठा लें. ”‘पूरा अन्दर चला गया…?’ उसने फिर से दोहराया और उठ कर देखने की कोशिश करने लगी।‘हाँ… देखो न।’ मैंने उठने में उसकी मदद करते हुए कहा।‘कितना अजीब है न. बाएं हाथ से मेरी चूची को मसलते हुए पूछा- अब कैसा लग रहा है? अगर तुम कहती हो तो मैं निकाल लेता हूँ नहीं तो जब कहोगी तभी आगे सजा दूंगा.

वीडियो सेक्सी एक्स एक्स एक्स !मैंने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और उससे साड़ी भी गंदी हो सकती थी।ससुर जी मेरे कान में बोले- चल ठीक है, चल घर पर, आज तेरी गाण्ड मारूँगा में. उसके कमरे में आते ही मैंने अपने होंठों को उसके होंठों से लगा दिया, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, उसके निचले होंठों को अपने होंठों में भरकर उनको पीने का जो अहसास था वो मैं शब्दों में नहीं बता सकता.

क्या हुआ मज़ा आ रहा था रोनू…!रेहान- जान जल्दी से घोड़ी बन जाओ, अब मेरा पानी निकालने वाला है, तुम धीरे-धीरे कूद रही थीं, अब देखो कैसे तुम्हें घोड़ी बना कर सवारी करता हूँ।जूही घोड़ी बन जाती है, रेहान उसकी गोरी गाण्ड पर हाथ फेरता है।रेहान- वाह जान. यार क्या मस्त लग रही थी उस दिन ! मैंने तो तभी सोच लिया था कि इसकी तो जरूर मारूँगा यार…तीसरा बूढ़ा- अरे मुझे नहीं पता यार, बता न, कैसे देखे थे?पहला बूढ़ा- हाय. उसे इस रूप में देख कर मैं पागल हो रहा था और मेरा लिंग मेरे अंडरवियर के अंदर ही अपने विकराल रूप में आ चुका था.

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!’अब तो यह बिल्कुल साफ़ था कि चूत-चटाई की बात हो रही थी।उसने फिर मुझे गौर से देखा- भागोगे तो नहीं?‘क्यों क्या इतनी गंदी है कि मैं देख कर डर कर भाग जाऊँगा. जैसे आवाज़ें निकलने लगी। मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत को चूसा।मैं- बेबी, चलो कुछ नया करते हैं।शालिनी- मगर क्या?मैं- मैं अभी आया. लेखक : प्रेम गुरुप्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज)तीसरे भाग से आगे :‘भौजी…चलो कमरे में चलते हैं !’‘वो.

” सिन्हा आंटी ने धीरे धीरे मेरे कन्धों को हिलाकर मुझे उठाया तो मैंने अपनी आँखें खोलीं।दिन पूरी तरह चढ़ आया था और सूरज की रोशनी में मेरी आँखें चुन्धियाँ सी गईं। करीब 12 बज चुके थे. कहा तो है, पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।तो अनिल बोला- इसमें सोचना कैसा? देखो मेरे पास बहुत ज्ञान है और मैं उसमें से थोड़ा तुम्हें देना चाहता हूँ.

फ़च’ की आवाजें सारे कमरे में आ रही थीं। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों का माल निकलने को हुआ तो उसने मुझे कमर से कस कर पकड़ लिया और बोली- अब सारा माल मेरे ऊपर गिरा दो और फिर मेरे साथ लेट रहो और उन्होंने मुझ को अपनी बाँहों में कस लिया।हय.

ये माल तेरे लायक है। इसकी गाण्ड बहुत बड़ी, गोल और एकदम गोरी है। एकदम खरबूज़े की तरह दिख रही है। पहले मैं इस को ठोक देता हूँ।कहानी अगले भाग में समाप्य।आपके विचार मेरी ईमेल आईडी पर आमंत्रित हैं।[emailprotected]. मुझे लगा कि यूँ तो मैं 15 दिनों की छुट्टी ले कर आया हूँ और यहाँ 3 दिन में ही बोर हो गया हूँ, क्यूँ ना मैं ही चला जाऊँ लेकिन ससुरजी क्या सोचेंगे, यह सोच कर मैं खामोश था. मैं- ठीक है, जैसी आपकी मर्ज़ी…पूजा ने टी-वी ओन किया और चैनल बदल-बदल कर देखने लगी, कुछ देर बाद उसने टीवी बंद कर दिया.

उसने बहुत देर तक चूसा और उसके बाद मैंने उससे कहा- चलो, अब पति पत्नी वाला काम करें!तो वो तुरंत मान गई. बहुत ही मस्त लग रहे थे।वो ब्रा नहीं पहने हुए थी, सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो उसने शरमा कर आँखें बंद कर लीं।मैं बोला- डियर अब काहे की शरम. मैं सुबह जब बिना ब्रा के झाड़ू लगाती हूँ, तू मुझे देखने के लिए खड़ा होता है।मेरी तो यह सुन कर गाण्ड फट गई।बोली- देखने हैं मेरे चूचे?मैं तो अवाक रह गया और इतने में मैं कुछ समझ पाता, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने चूचों पर रख दिया।ओए होए.

लेकिन मुझे तो लगा कि सारी लड़कियाँ अच्छी लग रही थी।जब हम दोनों क्लब के अंदर पहुँची, महक के दो दोस्त लड़के हमरे पास आए और बातें करने लगे.

हिंदी बीएफ भेजिए तो: पिंकी सेनशाम के सात बजे बाबा हाथ में कटोरा लिए अन्दर आए उन्हें देख कर रीना ने कपड़े उतार दिए और घुटनों के बल पैर फ़ैला कर घोड़ी बन गई, जिससे उसकी बुर बाबा को साफ दिख रही थी।उसकी बुर का मुँह थोड़ा खुल गया था और उसकी अन्दर की लाली साफ नज़र आ रही थी। बाबा हैरानी से सब देख कर उसके सामने आ गए।बाबा- यह क्या है बेटी, ऐसे क्यों कर रही हो ठीक से लेट जाओ. पूजा कमरे से बाहर निकली और उसके दरवाज़ा बंद करते ही मैं जल्दी से उठा और अपने खड़े लंड को मुश्किल से अंदर डाला, तभी पूजा ने झटके से दरवाज़ा खोलकर कहा कि पानी मटके का पियोगे या फ़्रिज का.

अब वो भी चूत उठा उठा कर मेरा पूरा लंड अपनी चूत में गड़प रही थी। वो मुझे कस के पकड़े हुए बोल रही थी- और जोर से! और जोर से करो!मैं और जोश से भर उठा। बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने उसकी चूत में दर्द डाल दिया था. !यह कहते हुए मैंने उसके माथे को चूम लिया और मेरी आँखों से खुशी के आँसू निकल आए।बोला- हिम्मत नहीं हुई. फ़िलहाल चलो, देर हो रही है।तब विजय ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए कहा- मैं तुम्हारा यह खूबसूरत जिस्म चखने के लिए बेताब हूँ!मैंने उसे मुस्कुराते हुए जवाब दिया- ठीक है.

राजू भी झट से रीटा की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रीटा भी राजू की ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती.

देख लो बेटा इसका बदला ले लूँगी।रश्मि- कोई बात नहीं मैं तैयार हूँ और दोनों खिलखला कर हँस पड़ीं।फिर नेहा ने कहा- कोई बात नहीं. दुबे और मामा ने एक साथ मिलकर नेहा से कैसे मजे लिये। इस कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया मेरे ई-मेल आईडी[emailprotected]पर भेज सकते हैं।प्रकाशित : 15 अप्रैल 2013. वे कहती हैं कि दर्द होता है, पर मैं उनकी गाण्ड को खूब दबाता हूँ और चाट भी लेता हूँ।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी आपको, अगर कोई गलती हो गई हो तो माफ़ कर देना।कहानी का अगला भाग:जन्मदिन के तोहफे में भाभी की गाण्ड मारी.