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तभी राज अंकल ने अपना मुँह चूची से हटा कर बाजी के मुँह पर लगा दिया जिससे उसके मुँह का दूध बाजी के मुँह में चला गया और बाजी उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. ”चाची के मुँह से सारी सचाई जानकर दुल्हन के मन को बड़ी तसल्ली हुई। उसने आगे बढ़कर अपनी सासू माँ के पैर छू लिए और उनके गले से लग कर रोने लगी।एक रोज दुल्हन यूँ ही पूछ बैठी,”चाची जी, आपकी चुदाई का खेल क्या चाचा जी को मालूम है? उन्हें पता है कि उनके प्यारे भतीजे उन्हीं की पत्नी को चोदते हैं…. लगभग शाम के 4 बजे तक हम लोग जयपुर पहुँच गए, मैं प्रिय भाभी को बिल्कुल भूल चुका था और मेरे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ सोनम का वो मासूम सा चेहरे घूम रहा था.

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आगे की कहानी पढ़ने के लिए अन्तर्वासना3 डॉट कॉम हर रोज देखते रहें!मुझे सभी के मेल का इंतज़ार रहेगा![emailprotected][emailprotected]. वो अपनी टी-शर्ट उतारने को नहीं मान रहा था, तो मैंने उसकी टी-शर्ट अपने दोनों हाथों से ऊपर उठा दी।वो टी-शर्ट को नीचे खींच रहा था और मैं ऊपर. मेरी गांड में जैसे गरम गरम लावे का सैलाब आ गया हो! मैं जमीन पर गिर गई और मुकेश मेरे ऊपर!कहानी का अगला भाग: मैं फिर से चुदी-3.

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सभी मस्त हैं ऊपर! किसी को ध्यान नहीं है!प्लीज़ छोड़ो!उसने मुझे उठाया और स्टोर रूम में ले गया, कुण्डी लगा दी और पास में पड़ी रजाई पर डाल मुझ पर सवार हो गया. थोड़ी देर में मैंने उनकी चूत में ही अपना पानी छोड़ दिया और मैं भाभी के वक्ष के ऊपर थक कर गिर गया, भाभी ने मेरे होंठ चूम लिए और बोली- थैंक्यू देवर जी!फिर हम दोनों बाथकमरे में गए और एक दूसरे को साफ़ करने लगे. मैं बहुत ही दुबला पतला हूँ, मेरे शरीर पर नाम मात्र के बाल हैं। झांट और सर के बाल के अलावा छाती या हाथ पैर पर बाल नहीं हैं। मतलब यह है कि मैं अगर साड़ी में भी आ जाऊँ तो लोग मुझे पहचान नहीं पाएंगे, मेरी आवाज़ भी वैसी ही लड़कियों वाली है।खैर, दोस्तो, यह कहानी नहीं सच्ची घटना है.

हम मेरे फ्लैट में आये तो मैंने उसको कहा- उस दिन मुझे पता नहीं था कि तुम शादीशुदा हो, इसलिए मैंने तुम्हें लिफ्ट दी थी. वो मेरे पूरे कपड़े उतार कर मेरे बराबर में लेट गई और अपने हाथों से मेरे पूरे बदन को सहलाने लगी.

पतले नक़्श, लंबे स्याह बाल, बड़ी-बड़ी आँखें जिनमें गुलाबी डोरे तैरते दिखाई देते थे और इन आँखों में हसीन और रंगीन ख्वाबों का पता देते थे. हाय रे ! फट गई मेरी ! … फाड़ डाला कमीनों ने …तीनों ने बारी-बारी चोदा ! मेरी गांड भी नहीं छोड़ा … पूरे बदन पर वीर्य बह रहा था … चार घंटे की चुदाई ने मेरा पूरा बदन तोड़ दिया था …इंस्पेक्टर : ये ले बेबी अपनी बेल … अपने यार को लेकर दफा हो जा ! वरना ये मेरे चेले तुझे कल भी रोक लेंगे, बहुत चोदते हैं साले …मैंने विक्की को गाड़ी में किसी तरह बैठाया … और गाड़ी को उल्टा घुमा लिया. लेकिन एक बात तो मेरे समझ आ गई थी कि भगवान किसी लोंडिया की शादी चाहे उस पैसे वाले से नहीं करे जिसका लौड़ा चार इंच का ही हो, शादी उससे करे जिसका लौड़ा नौ इंच का हो और जो चूत का रोज बाजा बजाये.

ह…मैंने अपनी पिचकारी छोड़ी और उधर वो भी मुझे जोर से कसती हुए अपनी आँखें बंद करके बड़बड़ाने लगी- आ.

?” वो मेरे सामने गिड़गिड़ा रहा था। यही तो मैं चाहती थी कि वो मेरी मिन्नतें करे और हाथ जोड़े।ठीक है पर धीरे धीरे कोई जल्दबाजी और शैतानी नहीं ? समझे ?”ओह. !मैंने इधर उधर देखा और उसके पास जाकर उसको मनाते हुए सॉरी बोला।पर वो थी कि मानने का नाम ही नहीं ले रही थी। मेरा भी मूड खराब हो गया, मैं अपने आप को कोसने लगा कि मैंने कमल के कमरे में रुकने का कहा ही क्यों।मैं बुझे मन से ऊपर कमरे में चला गया।कहानी अगले भाग में समाप्त होगी।आपकी मेल का इन्तजार रहेगा।आपका अपना राज. वास्तविकता यह थी कि अमित मुझे चोदने के लिए जितना बेताब थे मैं चुदवाने के लिए उससे ज्यादा बेताब थी.

सामने वो खड़ा था… उसके हाथ में कुछ नहीं था… मेरा चेहरा थोड़ा उदास जरूर हुआ पर उसे करीब देख कर फिर भी मन में संतुष्टि थी…कहाँ है मेरा तोहफा?” मैंने आंखें बंद कर उसके सामने हाथ बढ़ा दिया…उसने मेरा हाथ हाथों में भर लिया. 5 इंच लम्बा लौड़ा डाल दिया … क्या मजा आया दोस्तो ! दोनों को एक साथ चोदने में…जब मैं भाभी को चोद रहा था तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी.

मैंने उसके बाद सिर्फ़ सेक्सी साइट्स और कहानी ढूंढनी शुरु कर दी और मेरे सामने तो दरवाज़े खुलते चले गये. दर असल मेरे साथ पढ़ती थी !’‘फिर?’‘मैंने पढ़ाई छोड़ दी !’‘हम्म !!’‘अब वो मेरे साथ बात नहीं करती !’‘तुम्हारी इस हरकत का उसे पता चल गया तो और भी नाराज़ होगी !’‘उसे कैसे पता चलेगा?’‘क्या तुम्हें उसके नाम लिखी जगह पर सू सू करने में मज़ा आता है?’‘हाँ… ओह. वो भीग कर और भी सेक्सी हो गई थी, उसके कपड़े शरीर से चिपक कर उसको और भी सेक्सी बना रहे थे.

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मेरे मुँह से गन्दी बात मत कहलवाओ!’मैंने कहा- यह गन्दी बात है? तुम जब तक नहीं कहोगी मैं कुछ नहीं करूँगा.

एक तरफ कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म चल रही थी और दूसरी तरफ वो मेरा लण्ड हाथ में लिए मुझसे चिपक रही थी. उसने मेरा कच्छा खोल दिया और मेरा लंड निकाल कर जो उस समय पूरे उत्थान पर था, उसे पकड़ कर हिलाने लगी. ये भी आ गये- क्या चल रहा है?मनोज बोला- भाभी का ख्याल रख रहा था भैया!अच्छा ठीक है! अब तो बस करो! मैं आ गया हूँ, मैं रख लूंगा ख्याल!मनोज को ऐसे ही चिड़ाने के लिए ये बोले.

मुझे भी मजा आने लगा था तो मैंने अपनी जीभ को और अन्दर तक डाल कर उसकी चूत को टटोलने लगा. अगले दिन सुबह 7 बजे मेरे कमरे का दरवाजा बजा, मैंने जब उठ कर दरवाजा खोला तो देखा कि आयशा चाय ले कर आई हुई थी. सेक्सी घोड़े वाली वीडियोभाभी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया मगर उन्होंने इस बात पर कोई नाराज़गी भी नहीं दिखाई.

वो बाइक के पीछे बैठी, वो दोनों पैर एक तरफ करके बैठी लेकिन मैंने उसे लड़कों के जैसे बैठने के लिए कहा. और जोर से … आआअह्ह्ह्ह …मैंने अपने नाख़ून सोफे में घुसा दिए थे … मेरी चूत में पानी भर गया था और छप-छप की आवाज़ आ रही थी। मकान-मालिक ने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया। मैं भी कराह उठी ….

उसे पता ही नहीं चल पाया था शायद ! भीड़ के कारण शायद !करीब आधे घंटे यही घटनाक्रम जारी रहा। अजीब पहेली होती जा रही थी ये नेहा, कुछ समझ में नहीं आ रहा थी चाहती क्या है?फिर मैंने यही सिलसिला जारी रखा… नितम्ब, चूत और स्तनों को किसी भी ढंग से छू लेता। पानी के अंदर लावा जल रहा था…. और ऐसे ही अपना लंड रानी की चूत में डाले-डाले सो गया…सुबह हुई तो पहले मेरी नींद खुली. जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकल कर फ़र्श पर गिर गया.

सुबह नीचे आने के बाद मुझे बहुत ग्लानि महसूस हो रही थी कि मैंने अपनी बहन के साथ सेक्स किया मगर मुझे रह-रह कर उसकी उसकी मस्त चूचियों की चुसाई और उसकी चूत की खुशबू भी याद आती. सोमा ने भी अपनी चूत मेरे मुँह की तरफ कर दी और बोली- चाट इसको रंडी…मैं तो मस्ती में आ गई थी…. वो उसे बच्चे की तरह पीने लगा …आह्ह अहह ! मेरी सिसकियाँ निकलने लगी …उसने मेरी पैंटी में ऊँगली डाली !आह सर ! बस भी करो … !क्यूँ अखिल को तो नहीं रोकती …? बता दूँ क्या घर पे ?मैं डर गई और वहीं गार्डन में लेट गई, शाम हो रही थी घर पर कोई नहीं था.

जिस घर में मैं ब्याही थी उसमें बस दो भाई ही थे, करोड़पति घर था, शहर में कई मकान थे.

तो मैंने मना कर दिया …पर सर ने बड़े प्यार से मेरी बुर चाटी तो उसे कोई परेशानी नहीं हुई. लंड की घिर्री पर जनाब !!!मैंने नेहा को हर जगह चूमा… गाल पे… होंठों पे… कनपटी के नीचे… ईयरलोब्स पे… गले पे… कांख पे… पीठ पे… दोनों मधुघटद्वय के बीच दरार पे… तने हुए मुनक्के के आकार के चुचूकों पे….

लेकिन शायद आयशा कि चीख की वजह से ज्योति को यह याद नहीं रहा कि उसने ब्रा-पेंटी के अलावा और कुछ नहीं पहना है. मैंने मन ही मन में उन्हें गालियाँ दी- साले भेन के लौड़े, तेरी तो माँ चोद दूंगा मै, माँ को हाथ लगाता है?पर तभी मेरे होश उड़ गये, मम्मी ने तो गजब ही कर डाला. मैं तो तैयार था।उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो !मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया….

श्यामलाल के पास कोई विकल्प नहीं था इसलिए उसने मेरे माता-पिता के सामने मेरी और तान्या के शादी का प्रस्ताव रख दिया जिसे मेरे माता-पिता ने मान लिया. रात ज्यादा होने के कारण मैंने अनिल को रात वहीं पर रुकने के लिए कहा तो वो मान गया और मैं और अनिल योगी के कमरे में आकर सो गए. पाँच मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसने के बाद दीदी उठी और वहाँ से जाने लगी तो मैंने उन्हें पकड़ लिया तो वो मुझसे बिल्कुल चिपक गई जैसे एक साँप चन्दन के पेड़ से चिपकता हैं और मैं फिर से उनके होंठो का रसपान करने लगा.

बीएफ सेक्स फुल एचडी हिंदी मेरी ऊँगली गीली थी …अरी मधु बचपन में तो यह गीली नहीं हुआ करती …सुनील अब हम बच्चे नहीं रहे … उसने कहा. उनकी चूचियों को चूमता रहा और उनके चूचुक उमेठता रहा और पीता रहा।जब लगा कि उनका दर्द कम हो गया है और उन्होंने नीचे से कूल्हे उठाना शुरू कर दिए थे.

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मनोज बोला- नहीं भाभी, आज नहीं! आज तो तुम्हारे साथ!और बस उसने मेरे योनि पर हाथ रखा, तब तक मैं गीली हो चुकी थी. जीजू का लंड देखा तो मेरे होश उड़ गए, नौ इंच का फनफनाता लंड! मैं तो देखकर ही काँप गई कि यह मेरी इतनी सी चूत में जायेगा कैसे?मैंने जीजू से कहा- आप इस लंड का जो करने को कहोगे, वो मैं करूँगी लेकिन इसे मेरी चूत में मत घुसाना, नहीं तो वो फट जायेगी. मुझे अपने कानो पर विश्वास नहीं हो रहा था पर वो सच में मेरे सामने थी और मुझसे मिलने की बात कर रही थी.

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वो चौंकी और झटके से खुद को पीछे करते हुए बोली- यह क्या कर रहे हो तुम? पागल तो नहीं हो गये सुनील … तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझको छूने की?जवाब में सुनील बोला- सोनिया तुम्हारी चिंता क्या है … यह जो भी मैं कर रहा हूँ उसको जिस्म की ज़रूरत बोला जाता है … पता नहीं तुम इन सबसे इतना ज्यादा क्यों घबराती हो. देखो तो मेरा पजामा फ़ाड कर चूत में घुस गया !” आभा ने शरमाते हुये कहा।नहीं आभाजी, मुझे तो आप को चोदना था इसलिये मैंने कल आपके पजामे के तीन-चार टांके ब्लेड से काट दिये थे !”क्याऽऽऽऽऽऽऽ? शरारती कहीं के….

मैंने अब तक बहुत सब्र से काम लेते हुए अपने लौड़े को कुँवारी चूत में घुसाया था, पर अब मेरा सब्र साथ नहीं दे रहा था और मैंने उसकी चूत में धक्का-पेल चूदाई शुरू कर ही और उसको बाँहों में कस के जकड़ कर उसकी चूचियों को करीब करीब चबाते हुए खूब चोद डाला. मैंने भी उनकी हंसी में साथ दिया और पूछा- तो फिर आप ही बताओ कि क्या व्यवस्था की जाए. मैंने कहा- ऐसा नहीं हो सकता!तो आंटी ने कहा- क्यों?मैंने पूछा- अंकल नहीं करते क्या आपके साथ?तो आंटी ने कहा- करते हैं पर तुम बताओ कि करोगे या नहीं?तो मैंने कहा- ठीक है!फिर मैंने कहा- आज नहीं, फिर कभी!उन्होंने कहा- आज क्यों नहीं?तो मैंने कहा- बस ऐसे ही!फिर आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी.

वो मेरे लंड को आगे पीछे करने के बजाए दबा रही थी, मैं गरम हो कर बोला- चाँदनी, चूस ना मेरा!तो वो बोली- ‘क्या’तो मुझे लगा कि पहले इसको समझा देना ज़रूरी होगा कि सेक्स कैसे करते हैं ताकि मजा आए.

”चाची के मुँह से सारी सचाई जानकर दुल्हन के मन को बड़ी तसल्ली हुई। उसने आगे बढ़कर अपनी सासू माँ के पैर छू लिए और उनके गले से लग कर रोने लगी।एक रोज दुल्हन यूँ ही पूछ बैठी,”चाची जी, आपकी चुदाई का खेल क्या चाचा जी को मालूम है? उन्हें पता है कि उनके प्यारे भतीजे उन्हीं की पत्नी को चोदते हैं…. ”देखो रानी, तुम्हें हमारी कसम, आज हमें अपने चिकने गोरे-गोरे बदन का जायजा लेने दो न, आज हम लोग रौशनी में ही सब काम करेंगे और देखेंगे भी तुम्हारे नंगे, गोरे बदन को। अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो हम जाते हैं. मान जाओ ना ?” उसने मेरी ओर जिस तरीके से ललचाई नज़रों से देखा था मुझे हंसी आ गई। मैंने उसका नाक पकड़ते हुए कहा ठीक है पर कोई शैतानी नहीं ?”ओ.

जंगली हल्दीप्रिया की चूत को देख कर ही मैं समझ गया कि भाभी को चुदवाने का काफी तजुर्बा है और भैया के अलावा भी बाहर कई लोगों से चुदवा चुकी हैं. मैंने मन ही मन में उन्हें गालियाँ दी- साले भेन के लौड़े, तेरी तो माँ चोद दूंगा मै, माँ को हाथ लगाता है?पर तभी मेरे होश उड़ गये, मम्मी ने तो गजब ही कर डाला.

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!और मैं खिलखिला कर हंसने लगी…वेदांत : बड़ी हंसी आ रही? अभी बताएँगे ना जब अंकल आंटी तब पता लगेगा…!!! चल अब. जैसे ही हम अलग आये तो सोनम ने मुझे एक लाल गुलाब पकड़ाया और मुझे ‘आई लव यू ‘ बोलकर मेरे गले लग गई. अभी मुझे 2-3 दिन ही हुए थे कि भैया की साली आने वाली थी और भैया कोई काम की वजह से स्टेशन नहीं जा पा रहे थे तो उन्होंने मुझे स्टेशन जा कर मेघा (भैया की साली) को लाने के लिए कहा.

मेरे लौड़े से वीर्य की धार मेरी बहन की चूत में निकली तो उसकी गर्मी पाकर मेरी बहन बड़ी जोर से झड़ी. उसके बाद शीतल ने मुझे कंडोम पहना दिया और फिर मैं उसे दनादन चोदने लगा। मेरा चिक बहुत जल्दी निकल गया था। मगर थोड़ी ही देर में मैं अच्छे से चोदने लगा। उसे मैं बहुत जबरदस्त शारीरिक सुख दे रहा था और वो उससे आनंदित हो रही थी।सच में जब लंड चूत में जाता है तब जो आनंद मिलता है उससे कोई आनंद बड़ा नहीं।हाए ओह ओह ओह…. लेखिका : श्रेया अहूजाशाम के समय हर रोज मैं श्रेया, पीयू और निशा बायलोजी पढ़ने कालेज कैम्पस में ही सर के घर जाते थे।सर की उम्र करीब 30 साल थी और हमारी रही होगी अठारह उन्नीस … !पीयू सर पर लाइन मारती थी… कहती थी वो सर को प्यार करने लगी है।मैं और निशा उस पर हँसा करती थी.

खैर, अनीता दीदी ने नेहा के गलों पर एक चुम्बन लिया और कहा- मैं जानती हूँ नेहा, तुम दोनों कभी भी ऐसी हरकत नहीं करोगे. उसने मुझसे पूछा कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या?मैंने मना कर दिया तो वो चौंक कर बोली- मैं यह बात नहीं मान सकती! आजकल कोई लड़का इतना शरीफ नहीं हो सकता!मैंने फिर मना किया तो वो बोली- क्या कभी किसी लड़की को किस किया है?मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया क्योंकि वो पहली बार मुझसे इस तरह से बात कर रही थी. शाम को जब मीनाक्षी रसोई में खाना बना रही थी, तब भाभी मुझे अपने बेडरूम में ले गई और बोली- रोहित, यार आज तो चोदो मुझे.

इस तेज प्रहार से मुझे दर्द तो बहुत हुआ…मगर थोड़ी देर के बाद मुझे उससे कहीं ज्यादा मजा आ रहा था. बेचारी तीन-फोल्ड हुई रीटा किसी घायल हिरणी की भांति छटपटा कर रह गई- आहऽऽऽ नहीं छोड़ो मुझे! प्लीज़ छोड़ो नाऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी, आपका बहुत बड़ा है.

)पूरे बाथरूम में उस वक़्त कोई नहीं था सामने के दर्पण में मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में अपने आपको काफ़ी देर तक देखती रही.

आज मैं आपको एक और जोरदार चुदाई का किस्सा सुनाने जा रही हूँ पहले की तरह ये भी मेरी निजी लाइफ का एक किस्सा है. सरसों की सेक्सीप्रेम गुरु और नीरू बेन को प्राप्त संदेशों पर आधारितप्रेषिका : स्लिम सीमामुझे आते देख कर वह जल्दी से खड़ा हो गया और मुझे बाहों में भर कर नीचे पटकने लगा।ओह. सेक्सी राजस्थानी चूत’उसने जैसे ही अपना लंड मेरी चूत में डाला वैसे ही मैं समझ गई कि ये वास्तव में खिलाड़ी है. ’मुझे सु सु आने लगी थी। मैंने अपनी गांड ऊँची की और उसके मुंह में पेशाब की धार छोड़ दी । उसने अपना मुँह बंद कर लिया, आंखे भी बंद ली। मैं अब उसके पूरे शरीर पर पेशाब करने लगी। वो पूरा भीग गया। महिमा भी उत्तेजित हो चुकी थी.

उसकी प्यारी सी चूत मेरे हाथों में आते ही रस से भर गई और मैं खुद को उसकी जांघों के बीच घुसने से नहीं रोक पाया.

”ठीक है तू माल ला और मुझे मस्त कर दे… बस…” हम दोनों एक दूसरे का राज लिये मुस्कुरा उठे. प्रेषक : राज शर्माआज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ कि मैंने कैसे पहली बार चुदाई की ! उम्मीद है आप सबको यह कहानी पसंद आएगी !तो दोस्तो, बात आज से पांच साल पहले की हैं जब मैं बी. यह सुन कर मैं भी पागल हो गया और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया और हिलना चालू किया।वो तो मानो स्वर्ग के मज़े ले रही थी, अपनी गाण्ड उछाल-उछाल के मेरा लंड डलवा रही थी और बोल भी रही थी- चोदो ! ज़ोर ज़ोर से चोदो.

तो वो बोली- वो तो ठीक है! पर मेरी चूची आप क्यूँ चुसोगे? वो तो छोटे बच्चे चूसते हैं और मैं आपका ये ‘लंड’ क्यूँ चूसूंगी?तो मैं बोला- करके तो देखो कितना मजा आता है. वोह………कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. जी वो… मुझे छबीली से मिलना है…”माईने पधारो सा…” उसकी मीठी सी मुस्कान से मैं घायल सा हो गया.

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जब मेरी ऊँगली से टकरा कर टिकेट और अन्दर घुस गया तो मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा- सॉरी. एक शुक्रवार की बात है, घर पर भी मेरे अलावा कोई नहीं था, भाभी ऑफिस से जल्दी घर आ गई और बिना कपड़े बदले ही मुझे पढ़ाने लग गई ताकि मेरी पढ़ाई का नुक्सान ना हो क्योंकि अगले दिन हम सबका पिकनिक पर जाने की योजना थी मगर उस दिन मेरा ध्यान पढ़ाई की जगह भाभी के चूचे देखने में ज्यादा था क्यूंकि भाभी ने शर्ट पहनी थी और उसमें से उनके चूचो का आकार साफ़ दिखाई दे रहा था. बोलते बोलते मैंने अपने खाना लगे हुए हाथों से उसको निकालने की नाकाम कोशिश की और इधर उधर से ऊँगली डाल कर टिकेट पकड़ने की कोशिश करते हुए उसे अपने बूब्स के दर्शन करवाती रही.

श्यामलाल ने बाहर कुछ देर इन्तजार करने के लिए कहा और बोला- कुछ ही देर में मेरी बेटी भी यहाँ आने वाली है तो तुम भी उससे मिल सकते हो और जल्द से जल्द पढ़ाना शुरू कर सकते हो.

उसके पास मेरी बात मानने के अलावा कोई रास्ता ही नही था, इसलिए बोली – ठीक है सर , आप जो कहेंगे मै करुँगी लेकिन लैटर की बात आप किसी को नही बताएँगे!इतने में स्कूल के दूसरे बच्चे भी आने लगे थे.

तैरती सी तरंग मेरे जिस्म में फ़ैल गई।अब तो गाण्ड का दर्द भी जा चुका था… ऐसा लग रहा था जैसी दुनिया भर का समंदर मेरी दो टांगों के बीच समा गया है।सभी मंत्रिगण मेरे हाल देख कर मुठ मार रहे थे…महामंत्री मेरे चूचे और जोर से मसल मसल के दाँतों से काटने लगे…मैं कराह रही थी. बहादुर अपनी अंगुलियों से रीटा की बुंड टटोलता बोला- अब कुछ आराम आया क्या?मस्ती में रीटा सिर को हाँ में हिलाती बोली- हूमऽऽऽ जरा थोड़ा और अन्दर और जोर से करिये तो बताती हूँ, सीऽऽऽ!रीटा के मुँह से अनजाने में बहुत जोर से आनन्द भरी सिसकारी फूट पड़ी जैसे किसी ने गर्म गर्म तवे पर ठण्डा पानी छिड़क दिया हो. हीरो हीरोइन वाली सेक्सीआँखों से आंसू निकल आये लेकिन बेदर्दी ने अपना लंड जड़ तक पहुँचा कर छोड़ा!खून से सफ़ेद चादर पर दाग पड़ चुके थे.

नहीं, वो तो कुछ नहीं कर पाते थे ना, आपको तो पता है, कम उम्र में ही डायबिटीज से पापा की दोनों किडनियाँ खराब हो गई थी. ‘विपिन, चुप हो जा, बड़ा आया गुड मॉर्निंग करने वाला!’‘इतनी प्यारी और सलोनी गाण्ड का उदघाटन तो करना ही पड़ेगा, भाभी, कर दूँ उदघाटन?’मैं शरमा उठी. प्लीज…लेकिन उसने हाथ नहीं छोड़ा…उसकी हालत देखकर मुझे लगा कि वो शायद ठीक से सो भी नहीं पाया है और कुछ परेशान भी है…फिर उसने धीरे धीरे अटक अटक कर बोलना शुरू किया- मैं कुछ दिन से बहुत… परेशान हूँ, ठीक से.

’‘और गोमती, दिन में दो बार भी चुद गई!’‘देर से ही मानो, पर हमने इतना सब्र तो किया ना, मिला ना फ़ल!’‘हाँ री, मिला क्या, लगता है अब तो रोज ही मिलेगा यह फ़ल!’‘दीदी, एक बार चारों से एक साथ चुदवा कर मजा ले!’‘साली मर जायेगी…’‘अरे दीदी, अभी तो मौका है… जाने फिर ऐसा समय आये, ना आये?’दोनों ने अपनी निंदासी आँखें खोली और अपनी आँखें एक दूसरे की आँखों से लड़ा दी. क्यों नयन, मजा आया?”बहुत मामी…बहुत मजा आया!”अरे अभी कहाँ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे!”और मामी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी.

मैं तड़पने लगी लेकिन उसको इससे क्या!उसने तो धक्के मारने शुरू किये तो रुका ही नहीं! दे दनादन! दे दनादन!मेरी नाजुक कमसिन चूत की धज्जियाँ उड़ गई- फच फच फच फच से पूरा कमरा गूंज उठा.

” चोट तो नहीं लगी…? पागल है क्या तू… ज्यादा सुपरमैन बनने का शौक चढ़ा है… जा छत से भी कूद ले. मैंने देखा कि चूत पर एक भी बाल नहीं था शायद प्रिया ने अपनी चूत की ताजी-ताजी सफाई की थी. किया… शायद आज तुम कुछ भूल गए… शायद आज हमारे बीच इतनी दूरियाँ आ गई हैं कि एक दूसरे की जिंदगी में क्या चल रहा है.

एक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्सएक्ससी ”रंजू कहते हैं ! है ना?”हाँ ! आपने सही अंदाजा लगाया।” कहते हुए वह मुस्कुराई।उदास चेहरे पर क्षणिक मुस्कान भी अच्छी लगी। मैंने उस मुस्कान में मिठास घोलते हुए पूछा,”क्या मैं आपको रंजू कह सकता हूँ?”ओ श्योर. वो मेरी गांड में जीभ फिरा फिरा कर इस तरह चूस रहा था कि मैं आपको भी सलाह देना पसंद करूँगी कि अपनी गांड में किसी मर्द की जीभ जरूर चटवाना! आपकी गांड मस्त हो जाएगी.

खुश इसलिए क्योंकि भाभी मान गई थी और भाभी सभी को मना सकती थी और दुःखी इसलिए क्योंकि अभी शादी में कम से कम एक महीना और लगना था. वो अभी बच्ची है !”अरे बच्ची कहाँ है ! पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल सोलह साल की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी !”हाँ ये तो सच है पर …. लड़कियाँ आपस में हंसी मज़ाक कर रहीं थीं और उनके कपड़ों में से उनके छिपे हुए अंग नज़र आ रहे थे। कुछ लड़कियों ने तो ऐसे कपड़े पहने थे कि उनके गहरे गले में से उनके चुचूक तक दिख जाते थे। मुझे मज़ा आ रहा था और मैं मन ही मन ज़ाहिरा का शुक्रिया अदा कर रहा था। लड़कियों के ऐसे नज़ारे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया था, मैंने सोचा एक बार चल कर देखा जाये ज़ाहिरा सोई या नहीं।मैं सीधा तम्बू के अन्दर चला गया.

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अब उसके जिस्म पर सिर्फ एक काले रंग की पेंटी थी और उसके गोरे रंग के कारण वो किसी संगमरमर की मूरत जैसी लग रही थी. यहाँ तो दो दो है… पर दो क्यूँ…? राजेश अंकल आ गये थे, उनका मोटा सा लटका हुआ लण्ड देख कर तो मैं भी हैरत में पड़ गया. मैंने चुपचाप अपने कदम लड़कियों वाले बाथरूम की तरफ बढ़ाये, बाथरूम में से हमारे स्कूल की एक मैडम की आवाज आई.

वो धीरे से मेरे ऊपर लेट गया और मेरे होंठों को उसने अपने होंठों से दबा लिया और रसपान करने लगा. फिर रीटा बहादुर के हाथ में अपनी कच्छी पकड़ा कर बहादुर को टायलट के दरवाजे पर ही रोकती बोली- बहादुर, तुम यही ठहरो नहीं तो मेरी शेम-शेम हो जायेगी.

पापा को ट्यूशन से बहुत नफरत थी इसलिए मैं वो भी नहीं लगवा सकता था तो भाभी से मदद मांगी तो उन्होंने मदद करने के लिए हाँ कह दी.

पर मैंने अपनी बात कहनी जारी रखी : तरकीब यह है कि हम दोनों एक ही कॉपी पर दो कवर चढ़ाएंगे एक पर तेरा नाम होगा और दूसरे पर मेरा. इसके विपरीत बॉबी एक चुलबुला, शरारती युवक था, लड़कियों में दिलचस्पी रखने वाला लड़का था. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कभी करुँगी… मैं सच कह रही हूँ।’‘लेकिन अच्छा लगा ना?’‘हाँ, बहुत अच्छा.

आँखों में चमक… शरारत भरी कातिलाना मुस्कान से वो अपनी कक्षा की कई लड़कियों के दिलों पर राज करने लगा…यहाँ तक कि हमारे अलग होने की खबर के कुछ ही महीनों बाद उसे एक लड़की ने एक प्रेम पत्र लिखा. अब मैं भी मज़े लेने लगी थी; मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी… मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी. जैसे ही हम घर पहुँचे तो मम्मी और पापा ने हमें खाने के लिए बुलाया मगर मुझे भूख नहीं थी इसलिए मैंने मना कर दिया और मैं सीधा अपने कमरे की तरफ चल दिया.

मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी.

बीएफ सेक्स फुल एचडी हिंदी: मैंने थोड़ी आँख खोल कर देखा तो यह तो मोना आंटी का हाथ था हो मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लण्ड को छू रही थी और मसल रही थी. एक जवान खूबसूरत लड़की की जांघों को सहलाना… हाय, मेरी किस्मत…छबीली, तुम्हें पता है कि तुम कितनी सुन्दर हो?”छैल जी, यूं तो मती बोलो, मन्ने कुछ कुछ होवै है.

‘उफ़्फ़्फ़ जीजू, बहुत मजा आ रहा है, क्या मस्त लण्ड है… और जोर से मेरे जीजू!’‘ये ले… मेरी जान… तेरी चूत तो आज फ़ाड़ कर रख दूंगा. ’‘तो क्या हुआ, मेरे भगवान है वो, चाहे जो करें… जैसे करें!’तभी बॉबी के कमरे से कुछ खटपट की आवाजें लगी. जैसे ही हम घर पहुँचे तो मम्मी और पापा ने हमें खाने के लिए बुलाया मगर मुझे भूख नहीं थी इसलिए मैंने मना कर दिया और मैं सीधा अपने कमरे की तरफ चल दिया.

‘नहीं रे… तेरी गाण्ड तो ठीक है बिल्कुल… बस छेद में थोड़ी लाली है या सूजन है… ‘‘अन्दर जलन सी लग रही है…’ मैं कुछ कुछ बेचैन सी हो गई थी.

कंडोम के बिना नहीं!मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, मैं तुरंत उठा, कपड़े पहने और होटल के बाहर एक दुकान से ‘बनाना फ़लेवर’ का कंडोम लिया और एक दाढ़ी बनाने वाला रेज़र क्योंकि मैंने अपनी झांट नहीं बनाई थी. वो धीरे से मेरे ऊपर लेट गया और मेरे होंठों को उसने अपने होंठों से दबा लिया और रसपान करने लगा. मैंने देखा कि अंकल मम्मी को चूम रहे हैं और मम्मी उनको अपनी बाहों में लेकर किस करवा रही हैं.